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संपादकीयः पाकिस्तान को झटका

अमेरिकी प्रशासन ने पाकिस्तान को दी जाने वाली तीस करोड़ डॉलर की सहायता राशि रोक दी है। यह पाकिस्तान सरकार के लिए बड़ा झटका है। आतंकवाद के मसले पर दोनों देशों के बीच लंबे समय से संबंधों में कड़वाहट बनी हुई थी।

अमेरिकी प्रशासन ने पाकिस्तान को दी जाने वाली तीस करोड़ डॉलर की सहायता राशि रोक दी है। यह पाकिस्तान सरकार के लिए बड़ा झटका है। आतंकवाद के मसले पर दोनों देशों के बीच लंबे समय से संबंधों में कड़वाहट बनी हुई थी। जनवरी में ही अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि अगर आतंकवाद से लड़ने के उसके अभियान में पाकिस्तान अपेक्षित सहयोग नहीं करेगा तो वह उसकी सैन्य मदद रोकने पर मजबूर होगा। हालांकि पाकिस्तानी हुकूमत को अपने रवैए में बदलाव लाने के लिए छह महीने का वक्त दिया गया था, पर उसने ऐसा नहीं किया। अमेरिकी सैन्य पर्यवेक्षकों की राय के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन ने आखिरकार तीस करोड डॉलर की मदद रोक दी। अमेरिका पहले ही उसके रूस के साथ हाथ मिलाने से नाराज होकर पाकिस्तानी सैनिकों के प्रशिक्षण पर रोक लगा चुका है। उसके ताजा कदम से स्वाभाविक ही इमरान खान की नई बनी सरकार की मुश्किलें बढ़ेंगी। अमेरिका पाकिस्तान का बड़ा मददगार रहा है, पर जबसे उसका झुकाव चीन की तरफ बढ़ा है, अमेरिका ने उस पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसलिए जब पूरी दुनिया में आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान निशाने पर है, अमेरिका से दूरी बना कर रहना उसके लिए आसान नहीं होगा।

अमेरिका के ताजा कदम से पाक के खिलाफ भारतीय रणनीति को भी बल मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत लगातार साबित करने की कोशिश करता रहा है कि पाक आतंकवादियों की पनाहगाह बना हुआ है। अमेरिका ने पाकिस्तान की आर्थिक मदद पर रोक लगा कर एक तरह से भारत के पक्ष को मजबूत किया है। उड़ी सैन्य ठिकाने पर आतंकी हमले के बाद भारत ने पूरी दुनिया में पाक को अलग-थलग करने का अभियान चलाया। उसके तहत सार्क सम्मेलन रद्द हुआ और पड़ोसी राज्यों के साथ उसके व्यापारिक, आर्थिक संबंध कमजोर हो गए। अमेरिका सहित अनेक देशों ने पाकिस्तान को आतंकवादी संगठनों पर नकेल कसने की नसीहत दी। पर चीन ने उसे समर्थन देना शुरू किया, जिससे आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान के रवैए में बदलाव नजर नहीं आया। अमेरिका करीब सत्रह साल से अफगानिस्तान में आतंकवाद समाप्त करने की लड़ाई लड़ रहा है, इसलिए वह चाहता है कि पाकिस्तान उसका सहयोग करे। मगर पाकिस्तान लगातार झूठे आंकड़े पेश कर या दिखावे की कारर्वाइयां कर अमेरिका को भरमाने का प्रयास करता रहा है। अमेरिका इसी से नाराज है।

बेशक इस वक्त चीन पाकिस्तान के साथ खड़ा नजर आ रहा है, पर इस आधार पर वह देर तक अमेरिका की नाराजगी झेल नहीं सकता। पाकिस्तान की तरफ सहयोग का हाथ रूस भी बढ़ा चुका है। उसके साथ पाकिस्तान का सैन्य प्रशिक्षण करार है। फिर चीन के पाकिस्तान से अपने स्वार्थ जुड़े हैं। वह तभी तक उसको ओट देता रहेगा, जब तक कि उसके स्वार्थ नहीं सध जाते। फिर अमेरिकी आह्वान पर दुनिया के बहुत सारे देश आतंकवाद को समाप्त करने की लड़ाई में शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन इस मामले में कुछ अधिक सख्त है। ऐसे में पाकिस्तान आतंकवाद में भेद दिखा कर देर तक अपने को नहीं बचा सकता। अब ऐसा नहीं चल सकेगा कि अफगानिस्तान में चल रहा आतंकवाद अलग है और भारत में आतंकवाद का रंग अलग है। भारत के साथ अमेरिका की नजदीकी बढ़ी है। वह सीमा पार से भारत में चल रही आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ भी पाकिस्तान को चेतावनी दे चुका है। इसलिए उसका ताजा कदम पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ाएगा ही।