अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया गया है। इससे उन आशंकाओं पर फिलहाल विराम लग गया है कि पश्चिम एशिया में फिर से बारूद बरसने लगेगा। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से की गई इस घोषणा को अस्थायी रूप से भले ही एक अच्छी पहल माना जा रहा है, लेकिन जब तक दोनों पक्षों के बीच विवाद का स्थायी समाधान नहीं होगा, तब तक युद्ध की चिंगारी अंदर ही अंदर सुलगती रहेगी।
यही नहीं, युद्धविराम की अवधि बढ़ाने का फैसला तभी सार्थक साबित होगा, जब होर्मुज जलमार्ग को दुनिया के लिए खोल दिया जाएगा, क्योंकि इसकी वजह से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा का संकट पैदा हो गया है। इसका प्रभाव उन देशों पर भी पड़ रहा है, जिनका युद्ध से सीधे तौर पर कोई संबंध नहीं है। होर्मुज जलमार्ग को लेकर ईरान के अड़ियल रवैये के बाद अमेरिका की नाकेबंदी से हालात और जटिल हो गए हैं। ऐसे में जरूरी है कि अब दोनों पक्ष उस शांति वार्ता को आगे बढ़ाने को प्राथमिकता दें, जो पाकिस्तान के इस्लामाबाद में बेनतीजा रही थी।
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में दो सप्ताह के युद्धविराम की अवधि बुधवार को खत्म हो रही थी, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के दूसरे दौर को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी।
ईरान ने अमेरिका की ओर से मिल रही धमकियों पर जताई नाराजगी
अमेरिका चाहता था कि वार्ता आगे बढ़े, लेकिन ईरान ने अमेरिका की ओर से मिल रही धमकियों का हवाला देते हुए बातचीत की मेज पर आने की सहमति नहीं जताई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि उन्होंने यह कदम तेहरान के आंतरिक मतभेदों से जूझ रहे नेतृत्व को सात सप्ताह से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए एक प्रस्ताव तैयार करने का समय देने के उद्देश्य से उठाया है।
मगर, सवाल है कि ईरान की ओर से जो प्रस्ताव पूर्व में दिया गया था और जिसे पहले दौर की शांति वार्ता में रखा गया था, जब उस पर किसी तरह की सहमति नहीं बन पाई, तो नए प्रस्ताव की स्वीकार्यता कैसे संभव हो पाएगी? क्या ईरान अपनी शर्ताें में नरमी लाएगा या फिर अमेरिका अपने रुख में बदलाव लाने पर विचार करेगा? वर्तमान में दोनों पक्षों की ओर से जिस तरह के तेवर दिखाए जा रहे हैं, उससे स्थिति सुधरने के बजाय जटिल होती जा रही है।
अमेरिका के राष्ट्रपति ने युद्धविराम बढ़ाने के एलान के साथ यह भी स्पष्ट कर दिया है कि ईरान पर हमले तभी तक रुकेंगे रहेंगे, जब तक उसके नेता और प्रतिनिधि समेकित प्रस्ताव तैयार नहीं कर लेते। साथ ही कहा कि ईरान के बंदरगाहों पर आर्थिक नाकेबंदी जारी रहेगी। इस घोषणा के बाद ईरान की ओर से होर्मुज में तीन जहाजों पर हमले किए गए। इससे पहले अमेरिका की नौसेना ने ईरानी कच्चे तेल को ले जा रहे एक जहाज को अपने कब्जे में ले लिया था।
इस बीच, ईरान ने कहा है कि अमेरिका की ओर से जब तक नाकेबंदी नहीं हटाई जाती है, तब तक बातचीत दोबारा शुरू नहीं होगी। इससे साफ है कि भले ही युद्धविराम काफी हद तक कायम रहे और ईरान तथा अमेरिका बड़े हमले दोबारा शुरू न करें, फिर भी यह तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाए रखेगा। सवाल है कि क्या अमेरिका और ईरान की यह जिम्मेदारी नहीं है, जिन देशों का इस युद्ध से सीधा संबंध नहीं है, उन पर इसका कोई प्रभाव न पड़े? दोनों देशों को इस बात पर गंभीरता से विचार करना होगा कि वे शांति वार्ता की मेज पर आएं और ईमानदारी से विवाद का स्थायी हल खोजने की कोशिश करें।
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अमेरिका और ईरान दूसरे दौर की बातचीत के करीब पहुंच रहे हैं। हालांकि, पूरे क्षेत्र में तनाव जारी रहने से राजनयिक प्रयासों पर अनिश्चितता छाई हुई है। न्यूयॉर्क पोस्ट (NYP) की एक रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत फिर से शुरू होने को लेकर अगले 36 से 72 घंटों के भीतर “अच्छी खबर” सामने आ सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि एक सफलता अभी भी संभव है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
