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संपादकीयः प्रदूषण की मार

अब कहने-सुनने के लिए यह कोई नई बात नहीं रह गई है कि दिल्ली दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित महानगरों में शुमार है और भारत के ज्यादातर शहर वायु प्रदूषण की गंभीर मार झेल रहे हैं।

Author August 27, 2018 4:27 AM
वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं है। ज्यादातर शहरों में वाहन पेट्रोल और डीजल से ही दौड़ रहे हैं।

अब कहने-सुनने के लिए यह कोई नई बात नहीं रह गई है कि दिल्ली दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित महानगरों में शुमार है और भारत के ज्यादातर शहर वायु प्रदूषण की गंभीर मार झेल रहे हैं। हाल में जो चौंकाने वाली बात सामने आई है, वह यह कि वायु प्रदूषण इंसान की उम्र को भी कम कर रहा है। एक शोध में पता चला है कि पीएम 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर 2.5) की वजह से औसत उम्र एक से डेढ़ साल तक कम हो रही है। और ऐसा सिर्फ भारत में नहीं है, बल्कि एशिया और अफ्रीका के ज्यादातर प्रदूषित देशों में यह देखने को मिल रहा है। हवा की गुणवत्ता और जीवन अवधि में संबंध को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहली बार इस तरह का अध्ययन कराया है। इसमें एक सौ पिच्यासी देशों को शामिल किया गया। पता चला कि दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित पंद्रह शहरों में से जो चौदह शहर भारत में हैं, उनकी हवा में पीएम 2.5 की मात्रा सबसे ज्यादा है। पीएम 2.5 की वजह से लोगों पर बुरा असर पड़ रहा है। यह स्थिति एक गंभीर खतरे की ओर इशारा करती है और साथ ही चेतावनी भी देती है कि अगर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए तो हालात विस्फोटक हो सकते हैं।

सवाल है कि अगर वायु प्रदूषण जिंदगी के लिए इतनी गंभीर चुनौती बन गया है तो इससे बचाव के लिए हम कर क्या रहे हैं? पिछले एक दशक में जिस तेजी से प्रदूषण बढ़ा है, उससे हमने क्या कोई सबक लिया? पिछले साल दिल्ली में वायु प्रदूषण से हालात इतने बिगड़ गए थे कि इमरजंसी जैसे कदम उठाने पड़े थे। महानगर गैस चैंबर में तब्दील हो चुका था। हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा खतरनाक स्तर से भी कई गुना ज्यादा हो गई थी। पीएम 2.5 कण फेफड़ों को संक्रमित करते हैं। इससे दिल का दौरा, मस्तिष्काघात और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इस शोध में यह सामने आया कि अगर पीएम 2.5 के स्तर को दस माइक्रोग्राम प्रति वर्ग घन मीटर रखा जाए तो साठ से पिच्यासी साल के लोगों की औसत आयु पर बढ़ते खतरे को टाला जा सकता है। पीएम 2.5 का उत्सर्जन सबसे ज्यादा वाहनों से निकलने वाले धुएं की वजह होता है। पिछले कई सालों से उत्तर भारत के ज्यादातर राज्य पंजाब और हरियाणा में पराली जलने से उठने वाले धुएं से त्रस्त रहे हैं।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद इन दोनों राज्यों ने इस समस्या निपटने की दिशा में शुरुआती कदम तो उठाए हैं। लेकिन सिर्फ इतने भर से समस्या का हल नहीं होने वाला। इसके लिए जरूरी है कि पराली को जलाने के बजाय उसे नष्ट करने के दूसरे विकल्प तलाशे जाएं। वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं है। ज्यादातर शहरों में वाहन पेट्रोल और डीजल से ही दौड़ रहे हैं। समस्या यह भी है कि अधिकतर शहरों में पेट्रोल और डीजल मिलावाटी मिलता है। इसके बावजूद डीजल-पेट्रोल पर निर्भरता कम नहीं हुई है, बल्कि बढ़ी ही है। वाहनों में सीएनजी का इस्तेमाल कुछ ही शहरों में हो रहा है। लोग निजी वाहनों का इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति से मुक्त नहीं हो पाए हैं। सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का बुरा हाल है। देश में अभी तक बिजली से चलने वाले वाहनों के निर्माण को लेकर कोई खास प्रगति भी नहीं हुई है।

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