तेजी से बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों में दुनिया भर में अभी सबसे ज्यादा जोर आधुनिक तकनीकों के विकास और इस क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा नवाचार के प्रयोग पर दिया जा रहा है। सभी देश अपनी विकास नीतियों में अद्यतन तकनीकों को अपना रहे हैं और पारंपरिक तरीके से होने वाले बहुत सारे कामों का स्वरूप अब बदल रहा है। खासतौर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, यानी एआइ के फैलते दायरे ने वैश्विक स्तर पर कामकाज के तौर-तरीकों और उसमें इंसानी भूमिका पर व्यापक असर डाला है।

इसे समय के साथ कदम मिला कर चलने और विकास के परिप्रेक्ष्य में जरूरी माना जा रहा है तथा सभी देश एआइ के सकारात्मक उपयोग को लेकर सक्रिय दिख रहे हैं। भारत की इसमें एक महत्त्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। गौरतलब है कि नई दिल्ली में सोमवार से पांच दिनों का एआइ शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया है, जिसमें कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष से लेकर एआइ कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शामिल होंगे। सम्मेलन का उद्देश्य एआइ के व्यापक तंत्र पर चर्चा के साथ-साथ आम लोगों की जिंदगी पर इसके सीधे असर और फायदों के बारे में जागरूकता फैलाना है।

दरअसल, तकनीक के मामले में जितनी तेज रफ्तार से नवाचार का प्रयोग हुआ है, सभी जरूरी क्षेत्रों में एआइ का दायरा फैला है, उसमें इस पर चर्चा जरूरी हो जाती है कि इसकी संभावनाओं और उम्मीदों के साथ-साथ इससे जुड़ी आशंकाओं पर भी विचार हो। यह ध्यान रखने की जरूरत है कि विकास के किसी स्वरूप से अंतिम तौर पर आम लोग प्रभावित होते हैं और कोई भी तकनीक इसी कसौटी पर देखी जाएगी कि उससे मनुष्य का कितना समग्र हित सुनिश्चित हो सका और दुनिया की ज्यादातर आबादी के लिए वह कितनी उपयोगी साबित हुई।

हाल के दिनों में जब से एआइ के बढ़ते दायरे और इसके असर की बात होने लगी है, तब से इसे भविष्य में नौकरियों का सृजन करने का औजार भी बताया गया है। दूसरी ओर, एआइ के फैलते पांव के समांतर रोजगार पर इसके व्यापक प्रभाव और खतरों को लेकर आशंकाएं भी जताई गई हैं। दिल्ली के सम्मेलन में एक उद्देश्य एआइ से रोजगार, आम लोगों की जिंदगी पर पड़ने वाले असर और उसके खतरों को कम करने के लिए ठोस उपायों तथा प्रयासों पर भी चर्चा करना है।

यह जगजाहिर है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का दायरा कितने बड़े क्षेत्र में फैल चुका है। हाथ में मौजूद स्मार्टफोन अब केवल तस्वीरें संपादित करके सोशल मीडिया के मंचों पर सुर्खियां हासिल करने का जरिया भर नहीं है। चिकित्सा जगत में एआइ का उपयोग बीमारी की पहचान से लेकर इलाज में भी होने लगा है। अपराध पर लगाम लगाने के मामले में एआइ की उपयोगिता साबित हो चुकी है।

शिक्षा जगत से लेकर रक्षा और कारोबार के विभिन्न क्षेत्र में नए स्तर पर इसका प्रयोग हो रहा है। जाहिर है, विकास के नए मानक रचने और आधुनिक दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए एआइ के मामले में हर वक्त अद्यतन रहने की जरूरत होगी।

मगर रोजगार के अवसरों के सिकुड़ने से लेकर कई स्तर पर लोगों की जिंदगी से जुड़े बहुस्तरीय जोखिम के जैसे मामले तेजी से सामने आने लगे हैं, उसका हल निकालना सबसे बड़ी चुनौती होगी। साथ ही एआइ डेटा केंद्रों के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव और पानी की खपत को लेकर जिस तरह की चिंताएं उभरी हैं, अगर उसका कोई ठोस हल नहीं निकाला गया, तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर निर्भर विकास कसौटी पर होगा।