ताज़ा खबर
 

संपादकीयः असुरक्षित स्कूल

हरियाणा के गुरुग्राम में स्थित रेयान इंटरनेशनल स्कूल में सात साल के छात्र प्रद्युम्न की हत्या का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि इसी राज्य के पानीपत के द मिलेनियम स्कूल में बुधवार को कक्षा चार की एक छात्रा के साथ हुई छेड़छाड़ और हमले की घटना ने एक बार फिर से आम जनमानस को झकझोर दिया है।

Author September 23, 2017 02:38 am
प्रतीकात्मक तस्वीर

हरियाणा के गुरुग्राम में स्थित रेयान इंटरनेशनल स्कूल में सात साल के छात्र प्रद्युम्न की हत्या का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि इसी राज्य के पानीपत के द मिलेनियम स्कूल में बुधवार को कक्षा चार की एक छात्रा के साथ हुई छेड़छाड़ और हमले की घटना ने एक बार फिर से आम जनमानस को झकझोर दिया है। इस घटना से अभिभावकों में स्वाभाविक ही तीखा आक्रोश देखा गया। बड़ी संख्या में लोगों ने स्कूल के बाहर प्रदर्शन कर घटना की सीबीआइ जांच कराने तथा स्कूल के चेयरमैन और दूसरे आला अधिकारियों की गिरफ्तारी की मांग की। गौरतलब है कि बुधवार की सुबह कक्षा चार में पढ़ रही बच्ची स्कूल में परीक्षा देने गई थी। इस दौरान वह शौचालय गई। वहां से लौटी तो बच्ची के शरीर पर नोचने और काटने के घाव मिले। यह भी पता चला कि हरे रंग की टी-शर्ट पहने किसी व्यक्ति ने उसे पकड़ लिया और जान से मारने की धमकी भी दी।

जाहिर है कि इस हादसे के बाद बच्ची बहुत डर गई और वह परीक्षा तक नहीं दे पाई। लेकिन स्कूल प्रबंधन ने इस घटना पर परदा डालने की कोशिश की। प्रबंधन ने बच्ची के अभिभावकों को बुलाया लेकिन सही बात नहीं बताई। बल्कि परिजनों से कहा गया कि बच्ची की तबियत खराब हो गई है। लेकिन वह जब घर गई तो उसने अपनी मौसी को सारी हकीकत बताई। इसके बाद परिजनों ने महिला थाने में इसकी शिकायत की। फिलहाल पुलिस ने प्रबंधतंत्र से पूछताछ की है लेकिन अभी तक अभियुक्त की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

देखा जाए तो इस पूरे प्रकरण में रेयान स्कूल की ही तरह प्रबंधतंत्र की चालाकी सामने आई है। प्रद्युम्न हत्याकांड में भी स्कूल प्रबंधन ने हत्या के सबूतों को मिटाने की कोशिश की थी। काफी देर तक तो बच्चे के माता-पिता को भी अंधेरे में रखा गया। विंडबना यह है कि जिस तरह स्कूलों में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और यौन-दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आ रही हैं, वह बेहद चिंतित करनेवाली बात है। पिछले दिनों दिल्ली और राजस्थान से भी ऐसी ही खबरें आई थीं। दिल्ली के शाहदरा इलाके में स्थित एक स्कूल में पांच साल की बच्ची के साथ बलात्कार की घटना सामने आई थी, जिसमें पुलिस ने स्कूल के ही चालीस वर्षीय चपरासी को गिरफ्तार किया था।

इसी तरह राजस्थान के सीकर के एक स्कूल प्रबंधक और शिक्षक ने एक छात्रा के साथ भयादोहन करके महीनों तक बलात्कार किया और जब वह गर्भवती हो गई तो एक निजी अस्पताल की मिलीभगत से उसका गर्भपात कराया। लेकिन छात्रा ने अस्पताल में जाने के बाद असलियत सामने ला दी। आखिरकार अगर स्कूल भी बच्चों-बच्चियों के लिए सुरक्षित नहीं रहेंगे तो फिर ऐसी कौन सी जगह होगी, जहां सुरक्षा की उम्मीद की जाए। अब समय आ गया है कि केंद्र और राज्य की सरकारें मिल कर कोई ऐसी नियमावली तैयार करें और उसका पालन भी सुनिश्चित करें, जिससे स्कूलों के माहौल को सुरक्षित और भयरहित बनाया जा सके। देखा यह भी जाता है कि शिक्षा बोर्ड भी अक्सर ऐसे प्रबंधतंत्रों को भी स्कूल चलाने की अनुमति दे देता है जो मानक पूरे नहीं करते। इसके अलावा जिला प्रशासन को भी जिस तरह इन स्कूलों की समय-समय पर जांच-पड़ताल करनी चाहिए, वह भी नहीं की जाती। यही वजह है कि स्कूल परिसरों में ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। लेकिन अब वक्त आ गया है कि फौरन से पेशतर इस दिशा में कुछ सार्थक कदम उठाए जाएं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App