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हादसों के कारखाने

हमारे देश में औद्योगिक इकाइयों में मशीनों, संवेदनशील पदार्थों की ढुलाई आदि करने वाले वाहनों के संचालन आदि को लेकर इस कदर लापरवाही बरती जाती है कि अक्सर हादसे हो जाते हैं।

हमारे देश में औद्योगिक इकाइयों में मशीनों, संवेदनशील पदार्थों की ढुलाई आदि करने वाले वाहनों के संचालन आदि को लेकर इस कदर लापरवाही बरती जाती है कि अक्सर हादसे हो जाते हैं। अभी कुछ दिनों पहले मुजफ्फरपुर के एक कारखाने में बायलर फटने से कई लोग मारे गए। अब गुजरात के सूरत में एक टैंकर से जहरीली गैस का रिसाव होने से छह लोगों की मौत हो गई और करीब बीस लोग गंभीर हालत में अस्पतल में भर्ती कराए गए हैं। घटना बुधवार देर रात की बताई जा रही है।

पुलिस का कहना है कि जहरीली गैस से भरा एक टैंकर नाले के किनारे खड़ा करके उसका चालक कुछ अपशिष्ट बहाने का प्रयास कर रहा था कि गैस का रिसाव हो गया और वहां आसपास के इलाके में सो रहे मजदूर इसके प्रभाव में आ गए। उनमें दम घुटने से छह लोगों की मौत हो गई। अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि जिस वाहन में जहरीली गैस भरी हुई थी, उसका चालक या तो अनाड़ी था या फिर जानबूझ कर उसने कोई रासायनिक कचरा चोरी-छिपे बहाने की कोशिश की थी। अगर उसने जानबूझ कर कोई अनुपयोगी हो चुका रासायनिक कचरा निपटाने का प्रयास किया, तो यह न सिर्फ उस चालक, बल्कि उस कारखाना मालिक का भी अपराध है।

दरअसल, हमारे यहां औद्योगिक सुरक्षा को लेकर नियम-कायदे इतने ढीले-ढाले हैं कि उनके तहत दोषियों को कठोर सजा नहीं हो पाती। फिर औद्योगिक इकाइयों के मालिक जान-बूझ कर भी औद्योगिक नियमों को ताक पर रखते हैं। बहुत सारे कल-कारखाने सुरक्षा संबंधी नियमों की अनदेखी करते या फिर प्रशासन की मिलीभगत से उन्हें ताक पर रखने का प्रयास करते हैं। उनमें से ज्यादातर का प्रयास होता है कि वे दिहाड़ी और अकुशल मजदूरों से काम निकालें।

नियमित और प्रशिक्षित कर्मचारी रखने पर चूंकि अधिक वेतन और भत्ते खर्च करने और कानूनी बाध्यताओं का पालन करना पड़ता है, इसलिए भी वे उन्हें रखने से बचते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि मशीनों का सही ढंग से रखरखाव और संचालन न होने की वजह से अक्सर बड़े हादसे हो जाते हैं। सूरत में जिस टैंकर से गैस का रिसाव हुआ, उसमें भी यही बात हो सकती है। उसका चालक शायद इस बात से अनजान रहा होगा कि जो कचरा निस्तारण करने की जिम्मेदारी उसे सौंपी गई है, वह कितना खतरनाक हो सकता है।

कायदे से अनुपयोगी रसायनों का निस्तारण खुले में नहीं किया जा सकता। उन्हें बिना शोधन के नदियों या नालों में नहीं बहाया जा सकता। इसके लिए भारी जुर्माने का प्रावधान है। मगर कारकाना मालिक इस नियम का पालन करते नहीं देखे जाते। संभव है, जिस टैंकर से जहरीली गैस का रिसाव हुआ, उसमें पुराना पड़ चुका रसायन भरा हो और कारखाना मालिक ने टैंकर चालक को चुपके से उसे नाले में बहाने को कह दिया हो।

ऐसे औद्योगिक रसायनों की प्रतिक्रिया आदि को लेकर तकनीकी जानकारी अक्सर कारखाना मजदूरों या टैंकर आदि के चालकों को नहीं होती और कई बार वे अपना समय बचाने या काम जल्दी खत्म करने की गरज से जहां-तहां उनका निस्तारण करने का प्रयास करते देखे जाते हैं। इस तरह काफी नुकसान की आशंका होती है। सूरत में गैस रिसाव की वजह से हुई मौतों को सामान्य मानवीय चूक नहीं माना जा सकता। इसके मद्देनजर औद्योगिक सुरक्षा संबंधी नियम-कायदों को और कड़ा करने और कारखाना मालिकों की जवाबदेही तय करने की जरूरत है।

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