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बेतुके बोल

चुनावों के दौरान अगर किसी पार्टी के नेता मतदाताओं को अपने पक्ष में वोट देने के लिए वादे या दावे करते हैं, तो इसमें कुछ अस्वाभाविक नहीं है।

Author March 2, 2017 5:52 AM
भाजपा सांसद साक्षी महाराज को फोन पर मिली जान से मारने की धमकी

चुनावों के दौरान अगर किसी पार्टी के नेता मतदाताओं को अपने पक्ष में वोट देने के लिए वादे या दावे करते हैं, तो इसमें कुछ अस्वाभाविक नहीं है। लेकिन कुछ नेताओं की बयानबाजी अगर अलग-अलग तबकों, धार्मिक समुदायों के बीच दूरी पैदा करने या धर्म के आधार पर ध्रुवीकरण करने की कोशिश होती है तो इसका बड़ा नुकसान आखिरकार देश के सामाजिक ताने-बाने पर पड़ता है। लेकिन कुछ नेताओं को इसका खयाल रखना जरूरी नहीं लगता। खासकर भाजपा सांसद साक्षी महाराज का नाम पिछले कुछ समय से विवादित बयानों के लिए ही जाना जाता है। अब एक बार फिर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक बयान का हवाला देकर कहा कि समूचे देश में कब्रिस्तान के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए और इस सिलसिले में कानून बनाया जाना चाहिए। जब उनके इस बयान पर सवाल उठने लगे तो उन्होंने सफाई दी कि देश की आबादी बढ़ रही है और जमीन की कमी है। जाहिर है, यह इस बात के मूल आशय से बचने के लिए भोला बनने की कोशिश है।

प्रथम दृष्टया इस बयान के पीछे एक खास धार्मिक समुदाय के प्रति दुराग्रह और उसकी पारंपरिक मान्यता के अतिक्रमण का भाव झलकता है। कोई समुदाय मृत्यु के बाद शवों को जलाएगा या दफनाएगा, इसमें बेमानी दखल उचित नहीं है। कुछ अध्ययनों में शवों को जलाने से होने वाले प्रदूषण से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की बात कही गई है। तो क्या शवदाह में विश्वास रखने वाले समुदायों पर यह राय थोपी जा सकती है कि वे अपनी इस प्रथा को बंद कर दें? लेकिन साक्षी महाराज का मकसद शायद श्मशान और कब्रिस्तान की उपयोगिता के बारे में बताना था ही नहीं। दरअसल, हाल ही में अपने एक चुनावी भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र ने श्मशान और कब्रिस्तान का मुद्दा उठाया था। उसमें किसी भी समुदाय की परंपरा को खारिज करने जैसी बात नहीं थी, उसके बावजूद राजनीतिक हलकों में ऐसे सवाल उठे थे कि चुनावों के दौरान सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए ऐसे संवेदनशील बयान नहीं दिए जाने चाहिए। लेकिन साक्षी महाराज ने इससे आगे बढ़ कर एक खास समुदाय को निशाना बना कर दूसरे को खुश करने की कोशिश की।

सवाल है कि जिस दौर में बेहद मामूली बातों पर भी भिन्न धर्मों के लोग एक-दूसरे के खिलाफ तन जाते हैं, उसमें बतौर सांसद इस तरह के बयान देकर साक्षी महाराज क्या देश में सौहार्द की जमीन को कमजोर कर रहे हैं? हालांकि वे पहले भी सांप्रदायिक दीवार खड़ी करने वाले विवादित बोल की वजह से सुर्खियों में रहे हैं। इसलिए अगर उनकी ताजा टिप्पणी को न सिर्फ लोगों के बीच दूरी पैदा करने, बल्कि दो समुदायों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश के तौर पर भी देखा जाए, तो यह स्वाभाविक होगा। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अपने अंतिम चरण में है। अब तक के मतदान के दौरान कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई है। लेकिन साक्षी महाराज की टिप्पणियों की तरह अगर कुछ नेता ऐसे बयान देते हैं, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसका क्या असर हो सकता है? सवाल है कि दो भिन्न समुदायों के बीच ध्रुवीकरण के आधार पर अगर मतदान की स्थिति बनाई जाती है, तो उससे कैसा समाज बनेगा और देश कितना मजबूत होगा? केवल खबरों की सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसी बात करने से तमाम नेताओं को बचना चाहिए, जिससे विभाजित समाज की तस्वीर बने।

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