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दुनिया मेरे आगे- सऊदी अरब में योग

झारखंड में योग सिखाने वाली राफिया नाज को जान से मारने की धमकी मिलती है। उनके खिलाफ मौखिक फतवा जारी होता है और उनके घर पर पथराव भी किया जाता है।

Author November 23, 2017 04:51 am
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर हुआ है।

सुधीर कुमार

नोफ मारवाई और राफिया नाज मुसलिम योग प्रशिक्षिकाएं है। एक का संबंध सऊदी अरब से है, वहीं दूसरी का भारत से। इन दोनों में अंतर बस इतना है कि नोफ मारवाई के प्रयास से योग को उसके देश में ‘खेल’ के तौर पर आधिकारिक मान्यता मिल जाती है। वहीं, झारखंड में योग सिखाने वाली राफिया नाज को जान से मारने की धमकी मिलती है। उनके खिलाफ मौखिक फतवा जारी होता है और उनके घर पर पथराव भी किया जाता है। स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि राज्य के मुख्यमंत्री को राफिया की सुरक्षा के लिए दो अंगरक्षक देने पड़ते हैं। राफिया को सोशल साइट और मोबाइल पर कट्टरपंथी लगातार धमकियां दे रहे हैं। राफिया की घटना अगर किसी इस्लामिक देश में घटित होती तो कतई आश्चर्य नहीं होता, लेकिन योग की जननी और इसे लेकर दुनिया का नेतृत्व करने वाले भारत में राफिया की घटना बताती है कि अब भी योग के प्रति कुछ कट्टरपंथियों का नजरिया नहीं बदला है। हालांकि योग का किसी धर्म विशेष से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। योग शरीर और मन को साधने की एक कला है। आज जबकि योग की वजह से तमाम असाध्य रोगों का निशुल्क इलाज संभव हो पा रहा है तब भी योग को धार्मिक चश्मे से देखना क्या उचित होगा? सैंतीस वर्षीय नोफ मारवाई सऊदी अरब में ‘योगा फाउंडेशन’ की स्थापना कर लोगों को प्रशिक्षण दे रही हैं। वे इसके माध्यम से अपनी रोजी-रोटी भी कमा रही हैं। वे एक प्रगतिशील महिला हैं और मानती हैं कि योग और धर्म के बीच किसी तरह का कोई संघर्ष नहीं है। अब उन्हें सऊदी अरब की पहली योग प्रशिक्षिका की मान्यता भी मिल गई है।

यह सब एक ऐसे देश में हो रहा है, जो एक सख्त इस्लामिक देश है। कुछ समय पहले, सऊदी अरब भी योग को इस्लाम के विरुद्ध ही मानता था। 27 सितंबर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत द्वारा रखे गए 21 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ मनाने के प्रस्ताव को सऊदी अरब सहित आठ देशों ने अपनी सहमति नहीं दी थी। लेकिन अब सऊदी अरब का योग को ‘खेल गतिविधि’ का दर्जा देना महत्त्वपूर्ण है।  अपनी कट्टरवादी सोच बदलकर सऊदी अरब ने उन लोगों को नसीहत भी दी है जो समय के साथ बदलना नहीं चाहते। आखिर कुछ लोग अपनी मानसिकता बदलना क्यों नहीं चाहते? ज्यादा दिन नहीं हुए जब एक साथ तीन तलाक को सुप्रीम कोर्ट ने अवैध घोषित किया था। इसके बावजूद, अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने चंद दिनों पहले अपनी पत्नी को वाट्सएप के जरिए तलाकनामा भेजकर यह साबित करने का प्रयास किया कि व्यवस्थापिका और न्यायपालिका चाहे अनेक प्रयास कर लें, उनकी सोच बदलने वाली नहीं है।

कभी नए परिवर्तनों को अंगीकार करने में शिथिल रवैया अपनाने वाले सऊदी अरब में इन दिनों बदलाव की बयार चल रही है। दरअसल, वहां के युवराज मोहम्मद बिन सुल्तान के ‘विजन-2030’ लक्ष्य के तहत सऊदी अरब कई अहम बदलावों से गुजर रहा है। युवराज कट्टर इस्लाम के बजाय उदारवादी इस्लाम के रास्ते देश को आधुनिक और प्रगतिशील बनाना चाहते हैं। इसी क्रम में, सदियों से सख्त पाबंदियों के बीच जीवन व्यतीत कर रही वहां की महिलाओं की आजादी के लिए हाल में कई फैसले सामने आए हैं। वहां की महिलाओं ने पहली बार 2012 के ओलंपिक खेल में हिस्सा लिया। 2015 में पहली बार वहां महिलाओं को वोट देने और चुनावों में प्रत्याशी बनने का मौका मिला था। इसी वर्ष के सितंबर में महिलाओं को ड्राइविंग करने का अधिकार भी मिला। इसकी भी घोषणा हो चुकी है कि 2018 से महिलाएं स्टेडियम में मैच और सिनेमाहॉल में जा कर फिल्में भी देख सकेंगी।

महिलाओं को हमेशा सीमित अधिकार देने के पक्षधर रहे देश में महिलाओं के हित में लिए गए ये निर्णय उनके आत्मविश्वास और सशक्तीकरण की दृष्टि से काफी महत्त्वपूर्ण साबित होंगे। सऊदी अरब में भ्रष्टाचार की शिकायत आने पर बड़ी कार्रवाई देखने को मिली, जब कई ताकतवर राजकुमारों, सैन्य अधिकारियों, प्रभावशाली कारोबारियों और मंत्रियों को भ्रष्टाचार के आरोपों में गिरफ्तार कर लिया गया। निश्चय ही, ये कदम सऊदी अरब में परिवर्तन और विकास की नवगाथा लिखने में मील के पत्थर साबित होंगे। बहरहाल, योग को सऊदी अरब में मान्यता मिलने से पूरी दुनिया को एक सकारात्मक संदेश मिला है। इसके बाद संभव है कि जो दूसरे इस्लामिक देश योग के हमेशा खिलाफ रहे हैं, वे अपने यहां योग की महत्ता को स्वीकार करें और उसे राजकीय प्रश्रय देकर आम जन के मध्य उसे प्रसारित करें।योग तन और मन को शुद्ध करने की विशिष्ट विधियों का समुच्चय है। योग को किसी मजहब से जोड़ कर उसे एक खास दायरे में बांधने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। ओउम् बोलने और सूर्य नमस्कार की कुछ विधियों को लेकर इस्लामिक मतावलंबियों में योग के प्रति अरुचि हो सकती है लेकिन योग की वे विधियां जिसके नियमित अभ्यास से शरीर को ताकत, मन को शांति और बीमारियों से मुक्ति मिलती है, इसे अपनाने में झिझक कैसी!

 

 

 

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