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येलेना का स्टूडियो

यह नोवी साद है। सर्बिया का दूसरा बड़ा शहर। शहर के मुख्य चौक पर स्थित गैलरी पोदरम में मेरे कागज, कैनवस और कपड़े के चित्रों की एकल प्रदर्शनी होनी है। गैलरी के मुखिया शेशा खुद एक चित्रकार हैं। वे पूरे शहर में अपनी साइकिल से ही घूमते हैं। उनके साथ दुनव नदी के किनारे, शहर […]

Author July 14, 2015 17:56 pm

यह नोवी साद है। सर्बिया का दूसरा बड़ा शहर। शहर के मुख्य चौक पर स्थित गैलरी पोदरम में मेरे कागज, कैनवस और कपड़े के चित्रों की एकल प्रदर्शनी होनी है। गैलरी के मुखिया शेशा खुद एक चित्रकार हैं। वे पूरे शहर में अपनी साइकिल से ही घूमते हैं। उनके साथ दुनव नदी के किनारे, शहर के कुछ खास हिस्सों, पास के जंगल फृषकागोरा के पहाड़ी ऊंचे-नीचे रास्तों पर खूब साइकिल चलाई।

वे एक जिंदादिल सरल और सहज व्यक्ति हैं। एक कलाकार के साथ उसके शहर को देखना महत्त्वपूर्ण अनुभव है। वे अंगरेजी बहुत कम बोल पाते हैं, पर कुछ नया दिखाना चाहते हैं और मैं कुछ रोचक देखना। लेकिन बातचीत की गुंजाइश साइकिल चलाते हुए कम ही होती है।

येलेना यहां की एक युवा छापा कलाकार हैं। वे अपनी साइकिल से ही घर, स्टूडियो, मित्रों आदि तक पहुंचती हैं। एक शाम मेरी मित्र कलाकार यास्मीना के साथ उनके स्टूडियो जाना हुआ। वे अच्छी अंगरेजी बोल लेती हैं। उनका स्टूडियो पोदबरा इलाके की एक रिहाइश कॉलोनी में है। इमारत के बेसमेंट में खासा बड़ा स्टूडियो है। छपाई का प्रेस एक कोने में है।

दीवारों पर येलेना और उनके कलाकार मित्रों के चित्र और एचिंग प्रिंट भी हैं। स्टूडियो के एक ओर बड़ी खिड़की के पास येलेना के विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए स्टील लाइफ, लैंडस्केप, पोर्ट्रेट, कोलाज, वाटर कलर आदि सलीके से लगे हैं। एक ड्राइंग बोर्ड पर लगा एक अधूरा स्टील लाइफ इस स्टूडियो को पूर्णता दे रहा है। कला शिक्षा येलेना अपने जीवनयापन के लिए करती हैं। आर्थिक तंगी का समय है। कलाकारों के लिए यह बेहद कठिन दौर है।

यास्मीना और येलेना के स्टूडियो में एक समय बीस विद्यार्थी आते थे, वहीं आज तीन या चार ही हैं। कुछ कलाकार कला वीथिका में काम करते हैं तो कुछ डिजाइनिंग का काम करते हैं। येलेना की साइकिल भी स्टूडियो का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। उनकी एक छात्रा ने इस साइकिल को लीनो कट-प्रिंट में उकेरा है। सर्बिया के पर्यटन विभाग ने भी येलेना के कुछ प्रिंट खरीदे हैं, पर उसके बाद उनका कोई प्रिंट नहीं बिका। कलाकारी के दम पर स्वतंत्र रूप से सिर्फ कलाकर्म करते हुए रहना यहां असंभव है।

येलेना अपना काम बड़ी मेहनत से करती हैं। उन्हें काम करते हुए देख मेरा एचिंग प्रिंट करने का मन हुआ। अविलंब और अति उत्साह से येलेना ने एक छोटी जिंक प्लेट मेरे हाथों में थमा दी। प्लेट की पूरी सतह को ब्लैक जापान से काला किया और फिर नुकीली सुइयों, कटर और अन्य औजारों से रेखांकन करते हुए मुझे अपनी सिरेमिक मिट्टी याद आ रही थी। मिट्टी पर भी मैं इन्हीं औजारों से आकार रेखाएं उकेरता हूं। टेबल पर सिर झुकाए काली छोटी सतह पर रेखाएं बह निकलीं।

एक अमूर्त आकार बना, जिसमें अनेक लिपिनुमा रेखाओं का घनत्व है। यह मेरा नोवी साद है। नीचे एक छोर से दूसरे छोर को जाती दुनव नदी बही। यहां के स्वच्छ नीले आकाश को छोटे-छोटे बिंदुओं से जोड़ा। यास्मीन और येलेना इस रेखांकन को देख चौंक गए। उन्हें यकीन नहीं हुआ कि यह मेरा पहला प्रिंट होगा। कांच की शीशी में अम्ल और ट्रे लेकर अब स्टूडियो के बाहर बनी सीढ़ियों पर आए। ट्रे में जिंक प्लेट को पंद्रह मिनट रहने दिया। अम्ल का जिंक पर काम शुरू हुआ। प्लेट अब जैसे ग्राफिक कला के इस शास्त्रीय हुनर और प्रतिष्ठा की कोई परत छू रही हो। मुझसे उम्र में नौ दिन छोटी येलेना अब मेरी गुरु हैं। यह प्रिंट मेरी प्रदर्शनी में दिखाया गया। नोवी साद में सीखा यह हुनर अब दिल्ली में भी जारी रखना है। यहां चित्रकारों से छापा कलाकार अधिक प्रभावशाली हैं।

गैलरी से निकल कर इवाना और येलेना के साथ चौक से होते हुए शहर की एक कला वीथिका में पहुंचे। गैलरी की संचालक माया (यहां प्रचलित नाम)भी एक चित्रकार हैं। इवाना सबके लिए मेकिका लेकर आर्इं। यह एक लंबी तली हुई ब्रेड है। इसका स्वाद काफी कुछ भठूरे से मिलता है। पास ही एक छोटी-सी दुकान में एक रूसी महिला इसे बनाती हैं। तीन-चार बजे तक इनकी बनाई सभी ब्रेड बिक जाती है। दुनव के पार बसा सत्रहवीं शताब्दी का शहर है पेत्रोवरादीन। नोवी साद इसी शहर की नई बस्ती है।

स्थापत्य के कारण यह एक महत्त्वपूर्ण पर्यटक स्थल है। हर घर की छत से निकलती हुई चिमनी चौकोर मिट्टी के खप्रैल से सजी छतें एक अनूठा रोचक और रोमांचकारी दृश्य रचती हैं। फोतरेस यहां का महल है। महल के ऊपर बने रेस्तरां में दुनव का विराट पाट और पूरे नोवी साद नगर को देखा जा सकता है। यह अनुभव जैसे पुराने समय के शीर्ष से बिखरे समकालीन यथार्थ को देखने जैसा है। दुनव ने समय की दोनों रंगतों को बखूबी सींचा है।

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