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जब बुराई करें किसी की

कई बार गलतफहमियों की वजह से भी हमें किसी व्यक्ति के व्यवहार का बुरा अनुभव होता है।

अरुणा कपूर

आमतौर पर लोग बुराई उसी की करते पाए जाते हैं, जो व्यक्ति उनके अनुरूप नहीं होता या जिसने उनको किसी न किसी तरह से नुकसान पहुंचाया होता है। ऐसे व्यक्ति की आप बेशक बुराई ही करेंगे, लेकिन हकीकत यह भी है कि ज्यादातर मामलों में किसी की बुराई करने से कुछ भी हासिल नहीं होता। हर व्यक्ति किसी के लिए अपनी राय बनाने से पहले यह सोचता है कि उक्त व्यक्ति, जिसे बुरा बताया गया है, उसका हमारे साथ कैसा व्यवहार है।

मेरे लिए जो व्यक्ति बुरा है, वह अन्य लोगों के साथ भी कैसे बुरा हो सकता है? मान लीजिए कि किसी व्यक्ति को लेकर आपको किसी क्षेत्र में बहुत बुरा अनुभव हुआ। फिर आपने अपने किसी मित्र से उस अनुभव को साझा किया और कहा कि अमुक व्यक्ति तो बहुत बुरा है। उसकी किसी बात पर विश्वास मत करना। वह एक नंबर का झूठा और फरेबी है।

यह सब सुन कर आपका मित्र क्या करेगा? पहले तो आपके कहने पर भरोसा करते हुए कहेगा कि वह सही में बुरा होगा। मगर फिर होगा यही कि जिसको आपने बुरा बताया, बेशक वह अब तक चाहे आपके मित्र के संपर्क में ज्यादा आया भी न हो, वह उसे सिर्फ नाम से जानता हो। वह बुरा है या नहीं इसे जांचने-परखने के लिए वह उससे नजदीकियां बढ़ाएगा। यह मनोवैज्ञानिक तथ्य है।

अगर उसे उसके अपने अनुभव से महसूस हुआ कि वास्तव में वह व्यक्ति स्वार्थी, लालची या गलत आदतों वाला है, तो वह उसे बुरा मानेगा और आप सही साबित होंगे। मगर वही व्यक्ति अगर आपके मित्र के लिए मददगार साबित हुआ, उसे कारोबार या किसी अन्य क्षेत्र में फायदा पहुंचाने वाला साबित हुआ, तो वह उसे बुरा कैसे कहेगा? वह उसे अच्छा ही कहेगा और उसे बुरा बताने वाले आप ही गलत साबित होंगे। तो आपको उस व्यक्ति की बुराई करके क्या मिला?

वैसे कई बार गलतफहमियों की वजह से भी हमें किसी व्यक्ति के व्यवहार का बुरा अनुभव होता है। मसलन, आपका कोई मित्र आपके घर आता है, तो आप उसका बहुत अच्छे से स्वागत करते हैं। उसे बढ़िया नाश्ता खिलाते हैं। अगर वह आपके घर कुछ दिन रहने आया हो, तो आप उसके लिए रहने का बहुत अच्छा इंतजाम करते हैं। भोजन और अन्य सुविधाओं का भी बहुत अच्छे से ध्यान रखते हैं।

अगर वह दूसरे शहर से आया है, तो आप उसे अपने शहर की सैर भी करवाते हैं। आप उसे अपनी कार में घुमाते हैं और कुछ बढ़िया-सा उपहार भी खरीद कर देते हैं। यह सब आप इसलिए भी करते हैं कि आपके पास उसे देने के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। मगर यह सब करते हुए आपका अंतर्मन यही चाहता है कि आप भी, जब भी उसके घर जाएं तो आप के लिए भी वह वही सब कुछ करे, जो आपने उसके लिए किया है।

मगर कई बार ऐसा होता नहीं है। जब आप उसके घर जाते हैं, तो वह आपके सामने साधारण-सा नाश्ता परोसता है, आपके रहने का इंतजाम भी इतना बढ़िया नहीं करता, आपको वह कहीं घुमाने भी नहीं ले जाता और साधारण-सा उपहार देकर आपको विदा करता है। तो क्या होता है? यही कि आप उसे कंजूस, मक्खीचूस कहते हैं। स्वार्थी भी कहते हैं। भलाई का जमाना नहीं रहा। कैसे-कैसे मतलबी लोग सीधे-सादे लोगों का मुफ्त में लाभ उठाने आते हैं, वगैरह कहते हैं। इतना ही नहीं, अपने अन्य परिचितों को भी उसके बारे में यही सब बताते हैं, यानी कि उसकी बुराई करते हैं।

मगर क्या ठंडे दिमाग से आप सोचते हैं कि उसने ऐसा क्यों किया? गहराई में उतर कर सोचेंगे तो आपको पता चलेगा कि उसकी आय आपसे आधी भी नहीं है। उसका परिवार आपसे बड़ा है। परिवार में कमाने वाला वही एक, आपका मित्र, है। उसका रिहाइशी मकान छोटा है। उसके पास कार भी नहीं है, जो आपको घुमाने-फिराने ले जा सके। ऐसे में जाहिर है कि वह आपको उपहार भी अपनी कमाई के अनुरूप साधारण-सा ही देगा। यह सब देखते हुए क्या उसकी बुराई करना आपके लिए उचित है? आपने उसके लिए जो कुछ किया, वह आपने अपनी सुविधा और आय के अनुरूप ही किया। उसने तो आपसे कुछ करने के लिए कहा नहीं था।

हां, बुरे लोग भी होते हैं। आपसे मोटी रकम झूठी मनगढ़ंत कहानी सुना कर उधार ले लेते हैं। घर में कोई बीमार है या बच्चे से संबंधित झूठ आपके सामने रख कर,मगरमच्छ के आंसू भी बहाते हैं। बाद में उनका जब भेद खुल जाता है तो आपसे दूरी बना लेते हैं और उधार ली हुई रकम वापस नहीं करते। ऐसे लोगों का सच उजागर करने में कोई बुराई नहीं है। निर्णय आपको करना है कि किसकी और किन हालात में बुराई करनी है।

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