ताज़ा खबर
 

यात्रा के पड़ाव

तीर्थयात्राओं का उद्देश्य अब भक्ति, तप या सांसारिक इच्छाओं का त्याग नहीं रह गया है। जिस उम्र के लोग पहले तीर्थयात्राओं में कोई रुचि नहीं लेते थे, वे भी अब तीर्थयात्राओं के बहाने सैर-सपाटे के लिए निकल पड़ते हैं।

Author नई दिल्ली | Published on: May 9, 2016 3:33 AM
travelling halt, travelling, halt, Travelचित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

यात्राओं का आकर्षण मानव मन में सदा से बना रहा है, पर पिछले कुछ दशकों में यात्राओं की प्रकृति में जो क्रांतिकारी परिवर्तन आए हैं, उन पर आसानी से गौर किया जा सकता है। यात्राएं हमारे यहां पहले बहुत कठिन होती थीं और उनके लिए यात्री को काफी कष्ट उठाना पड़ता था। किसी प्रकार की बाहरी अनिवार्यता या किसी उद्देश्य के लिए आवश्यक कष्ट उठाने की तैयारी ही तब व्यक्ति को यात्रा के लिए प्रेरित कर पाती थी। अनजानी जगहों पर सपरिवार यात्रा करना और कठिन होता था। दरअसल, अकेला आदमी तो विषम परिस्थितियों में भी जैसे-तैसे गुजर कर लेता है, पर पत्नी और बच्चों को लेकर वह तभी घर से निकलता है, जब उसे उन्हें कष्ट न होने का पूरा भरोसा हो। लंबी दूरी की यात्राओं के लिए तब भाप के इंजन से चलने वाली कई ट्रेनें बदलनी पड़ती थीं, जो कई दिनों के बाद यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचा पाती थीं।

लेकिन अब अगर जेब में पैसा और पैरों में ताकत हो तो व्यक्ति के लिए एक से एक आला दर्जे के तीव्रगति यानों में यात्रा करना संभव है। लोगों को वातानुकूलित दर्जे के आरामदेह शयनयानों के विकल्प उपलब्ध हैं। निजी कारों का उपयोग अब काफी बढ़ गया है, चार और छह लेन की सड़कों का जाल बिछ गया है और लंबी दूरी की यात्राओं के लिए अधिक हवाई सेवाएं भी बड़ी संख्या में शुरू हो गई हैं।

अधिक सुविधाजनक और आरामदेह हो जाने से यात्राओं की लिप्सा में वृद्धि हुई है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं, टीवी और स्मार्ट फोन पर नमूदार होने वाले यात्रा पैकेजों के विज्ञापनों ने भी इसे काफी हवा दी है। आज लोग न सिर्फ आसपास के स्थानों, बल्कि देश-विदेश की यात्रा के लिए लालायित दिखाई देते हैं। पहले जो लोग अन्य देशों के बारे में पढ़ कर ही संतुष्ट हो लेते थे, उनका जी अब टीवी और इंटरनेट पर उन्हें संपूर्ण चित्रात्मकता के साथ देख कर भी नहीं भरता। भारतीय पर्यटन स्थलों के साथ-साथ आसपास के कई देश अब लोगों की यात्रा के गंतव्य-स्थल बनते जा रहे हैं। ‘सैर कर दुनिया की गाफिल, जिंदगानी फिर कहां/ जिंदगानी भी रही तो यह जवानी फिर कहां- का असर मध्यवर्ग की इच्छाओं पर आज देखते ही बनता है!’

पहले हमारे यहां शैक्षणिक भ्रमण या तीर्थ जैसे बहाने यात्रा के लिए ज्यादा कारगर साबित होते हैं। पर अब शैक्षणिक भ्रमणों का हाल यह है कि कुछ समय पहले एक निजी स्कूल ने अपने विद्यार्थियों को हवाई यात्रा के अनुभव से परिचित करवाने का ‘बीड़ा उठाया’ तो बच्चों के माता-पिता सिर्फ इस मकसद से यात्रा पर भेजने को राजी हो गए। तीर्थयात्राओं का उद्देश्य अब भक्ति, तप या सांसारिक इच्छाओं का त्याग नहीं रह गया है। जिस उम्र के लोग पहले तीर्थयात्राओं में कोई रुचि नहीं लेते थे, वे भी अब तीर्थयात्राओं के बहाने सैर-सपाटे के लिए निकल पड़ते हैं।

उत्तरी चार-धाम यात्रा के लिए जाने वाले संपन्न लोगों की संख्या में वृद्धि और उनके द्वारा की जाने वाली सुख-सुविधा की मांगों ने इन तीर्थस्थलों के पर्यावरण को जिस खतरनाक तरीके से प्रभावित किया है, उसे हम अभी तक नहीं भूले हैं। मध्यवर्ग में सैर-सपाटों की इस वृद्धि का एक परिणाम यह भी हुआ है कि आवश्यक कामों से जो लोग पहले अपने हमखयाल दोस्तों के साथ अकेले दूर-दूर की यात्राएं कर लिया करते थे, उनके लिए उस तरह दोस्तों के साथ यात्राएं कर पाना अब उतना आसान नहीं रह गया है। पतियों पर ऐसे आरोप अब आम हैं कि वे खुद तो किसी न किसी बहाने सैर-सपाटे करना चाहते हैं, पर अपने बीवी-बच्चों को घर की चारदिवारी में ही कैद रखना चाहते हैं।

बहरहाल, यात्रा की दुनिया में आए इन परिवर्तनों को देखते हुए किसी साहित्यिक-सांस्कृतिक सम्मलेन के आयोजकों को अब अक्सर न केवल उनके द्वारा आमंत्रित अतिथियों के आतिथ्य की व्यवस्था करनी होती है, बल्कि उनके परिवार या उनकी पहचान के कुछ अन्य लोगों के लिए भी आवास-भोजन का प्रबंध करना होता है। इनमें से कइयों की आयोजनों में कोई गहरी रुचि नहीं होती, मगर जो अपना नाम किसी तरह संभागियों की सूची में दर्ज करवा लेते हैं। कई बार इस तरह की व्यवस्था का एक दुष्परिणाम यह भी होता है कि आमंत्रित विशिष्ट अतिथियों के ये परिजन इस कोशिश में रहते हैं कि ये विशिष्ट अतिथि भी अपने मुख्य काम से कुछ वक्त बचा कर उसे उनके साथ भ्रमण, शॉपिंग या मनोरंजन आदि में लगा सकें। इसीलिए सम्मेलनों के दौरान आजकल कई बार आयोजकों के लिए संभागियों की उपस्थिति दर्ज करना या परिसर से बाहर जाने पर रोक लगाना आवश्यक हो जाता है। इसे सैर-सपाटे के शौकीन लोग निश्चय ही आयोजकों की कृपणता और अनुदारता के रूप में लेते होंगे।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories