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दुनिया मेरे आगे: तकनीक का संजाल

इससे कौन असहमत होगा कि सोशल मीडिया का मायाजाल बढ़ता चला गया और लोगों के जीवन में यह अधिकाधिक घुसता चला गया। इसके बढ़ते महत्त्व ने जुड़ाव का अर्थ अधिक मित्र और फॉलोवर्स कर दिया और कुछ लिखने पर मिलने वाली प्रतिक्रियाओं को प्रभाव का सूचकांक बना दिया।

Author Published on: May 28, 2020 4:05 AM
वास्तविक दुनिया में सोशल मीडिया की दुनिया बस गई है।

कमलेश कमल
जुड़ने की इच्छा मनुष्य की मूलभूत इच्छाओं में से एक है। जब तक जीवन है, मनुष्य दूसरों से जुड़ना चाहता है। इसके विपरीत आचरण को देखें तो जब मनुष्य मानसिक तनाव या फिर अवसाद में होता है तो कहता है कि मुझे अकेला छोड़ दो। मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि जब किसी के दिमाग में आत्महत्या का विचार आता है, वह सबसे पहले एकदम अकेलापन ढूंढ़ता है। जब किसी में वैराग्य जन्मता है, वह एकांत ढूंढ़ता है। पर जैसे ही कुछ पा लेता है, फिर समाज में आता है और लोगों से जुड़ता है।

हाल के वर्षों में फेसबुक, ट्विटर, वाट्सऐप आदि सोशल मीडिया के विविध पटलों ने उन्नत तकनीक के माध्यम से मनुष्य को दूसरों से जुड़ने का एक वैकल्पिक द्वार खोल दिया। यह जुड़ाव भले ही अपने स्वरूप में भौतिक न होकर आभासी होता है, पर लोगों के जीवन में इसका महत्त्व प्रत्यक्ष जुड़ाव के समांतर ही बढ़ता चला गया है।

इससे कौन असहमत होगा कि सोशल मीडिया का मायाजाल बढ़ता चला गया और लोगों के जीवन में यह अधिकाधिक घुसता चला गया। इसके बढ़ते महत्त्व ने जुड़ाव का अर्थ अधिक मित्र और फॉलोवर्स कर दिया और कुछ लिखने पर मिलने वाली प्रतिक्रियाओं को प्रभाव का सूचकांक बना दिया। जनसाधारण ने इसका सीधा अर्थ यह निकालना शुरू किया कि अगर मेरे कुछ लिखे को ज्यादा पसंद किया जा रहा है, तो लोग मुझे ज्यादा पसंद कर रहे हैं और अगर किसी ने विरोध किया तो वह मेरा विरोध कर रहा है।

अध्ययन में कई किशोरों ने स्वीकार किया कि जब किसी लड़के या लड़की ने उनकी फेसबुक पोस्ट को लाइक करना कम कर दिया तो उन्हें यह लगा कि अब वे किसी और से प्यार करने लगा है। एकाकीपन झेल रहे लोगों या निश्चित आजीविका से विरत लोगों एवं गृहिणियों ने भी ऐसे ही विचार आने की बात स्वीकार की।

दरअसल, यह भ्रांत और अव्यावहरिक दृष्टिकोण है। आभासी दुनिया में लोग अपने लिए जाते हैं, दूसरों के लिए नहीं। कोई भी व्यक्ति हो, वह सबसे पहले अपने लिए महत्त्वपूर्ण होता है। सोशल मीडिया में जाकर वह अपने तरीके से लोगों से जुड़ना चाहता है, लोगों का प्यार, पहचान और प्रतिक्रिया पाना चाहता है। उसे उसके नजरिए से देखना चाहिए, न कि अपने नजरिए से। यह ध्यान रखना चाहिए कि कोई आॅनलाइन जैसी गतिविधि अपने लिए करता है, हमारे लिए नहीं। लेकिन यह समझ विकसित करना भी सबसे नहीं हो पाता। लोग इसके जाल में फंस ही जाते हैं और तार्किक होकर नहीं सोच पाते।

प्रतिक्रिया अर्जित की जाती है- इसे समझने की आवश्यकता है। हम अपने काम और काम से अर्जित नाम के आधार पर और व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर ही लोगों से कुछ अर्जित करते हैं- चाहे प्रेम हो, द्वेष, घृणा, वाहवाही हो या फिर प्रतिस्पर्धा। हम क्या हैं और कौन हैं, यह हमेशा हमारे साथ चिपका रहता है, बशर्ते हमारा नाम और अकाउंट फर्जी न हों। यहां ध्यान रहे कि अगर हम किसी छद्म नाम या पहचान के साथ हैं, तब भी हमेशा एक पहचान के संकट से जूझेंगे और जो नहीं हैं, वह दिखाने की जद्दोजहद में परेशान रहेंगे। लोग हमारे काम को देखेंगे, उसकी गुणवत्ता से हमें आंकेंगे। हम जो नहीं हैं, वह बनने और दिखाने की कोशिश करेंगे तो किसी न किसी दिन किसी के द्वारा पकड़े जाएंगे।

दिखावे की उम्र छोटी होती है और उधार के ज्ञान से गरिमा नहीं आती। इसी तरह नकली पहचान में भविष्य के अपमान का बीज छिपा होता है। ऐसे में क्या किया जाए? एक ही उपाय है कि हम जो हैं, वही रहें, वही दिखें! वास्तविक बनें और वास्तविक संबंध बनाने की कोशिश करें! जिसमें बात होती है, उसे ज्यादा प्रयास नहीं करना पड़ता और जिसमें कोई बात नहीं होती, वह कितना भी प्रयास कर ले, बात नहीं बनती।

सोशल मीडिया से व्यर्थ का तनाव न हो, इसके लिए यह भी आवश्यक है कि सबको सम्मान दें, पर कुछ अपेक्षा न रखें। यह एक अलग दुनिया है, जिसमें कोई आपसे छोटा नहीं है, बल्कि आपका मित्र है, चाहे आपका पुत्र हो या अधीनस्थ कर्मचारी। दो टूक बात है- आप सब को साध नहीं सकते, खुद को साधें और सबके साथ सहज मैत्री भाव से रहें। यहां कुछ लोगों को हमसे प्रतिद्वंद्विता होगी, जो हमें हरदम नापते रहेंगे। उन्हें गरिमापूर्ण ढंग से संभालना सीखें। अच्छा हो कि अपना कद इतना बढ़ाएं कि लोग नापना ही छोड़ दें। एक साइकिल वाला दूसरे साइकिल सवार को रास्ता दे या न दे, ट्रक को देखते ही एकदम किनारा पकड़ लेता है।

सबसे महत्त्वपूर्ण बात कि आभासी दुनिया में अति नहीं करना चाहिए। हमारे परिवार वाले ही असली लोग हैं और वास्तविक दुनिया में भी जिनसे मैत्री हो, वही हमारे लिए महत्त्वपूर्ण दोस्त हैं, उनकी उपेक्षा न करें। ध्यान रहे कि आभासी दुनिया की गतिविधियों से वास्तविक दुनिया को नुकसान न पहुंचे।

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