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दुनिया मेरे आगे: चुनौती का दम

हां, एक बात जरूर है कि जीवन में आने वाली परेशानियों, कठिनाइयों और समस्याओं का सामना व्यक्ति को खुद ही करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में खुद को मानसिक तौर पर इतना सुदृढ़ और सक्षम बनाना होगा कि ये सभी दुख का कारण नहीं बन सकें।

Author Published on: March 6, 2019 3:12 AM
जीवन में समस्याएं, परेशानियां, कठिनाइयां आना सामान्य बात है।

प्रदीप उपाध्याय

आज चारों ओर निराशापूर्ण वातावरण अधिक देखने में आ रहा है। व्यक्ति तनाव में रहता है और कई बार अवसाद की स्थिति में आत्महत्या तक कर लेता है। मुख्य वजह यही है कि वह समस्याओं का दृढ़ता से सामना नहीं कर पाता और अंदर ही अंदर खोखला होकर टूट-सा जाता है। पिछले कुछ समय से यह भी देखा गया है कि व्यक्ति में सामंजस्य स्थापित करने के गुणों का ह्रास होता जा रहा है। आपस में तालमेल स्थापित करने, मिलजुल कर रहने, धैर्यवान होने, त्याग और समर्पण की भावना का लोप होता जा रहा है। नतीजतन, वह खुद को समस्याओं से घिरा पाता है। छोटी बात भी उसे परेशान कर जाती है और ऐसे में वह जीवन के कई निर्णय भी ले लेता है। यों देखा जाए तो दुनिया में ऐसा कोई भी इंसान नहीं है जो समस्याग्रस्त नहीं हो या उसे किसी भी तरह की कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ रहा हो।

जीवन में सुख-दुख आते ही रहते हैं। मनुष्य सामाजिक प्राणी है। हरेक व्यक्ति किसी न किसी रूप में समस्याग्रस्त है। कई लोग ऐसे होते हैं जो खुद ही समस्याओं का पहाड़ खड़ा कर लेते हैं और फिर घबरा जाते हैं। इसके विपरीत कई लोग ऐसे भी होते हैं जो समस्या को चुनौती रूप में स्वीकार कर उसका डट कर सामना करते हैं। समस्याओं से घबराने वाले लोग अपनी समस्याओं, कठिनाइयों और परेशानियों के कारण खुद तो दुखी रहते ही हैं, दूसरों को भी दुखी कर देते हैं। ये लोग अपनी परेशानियों, कठिनाइयों, समस्याओं का रोना रोते रहते हैं। ऐसी स्थिति में समस्याएं कम नहीं हो जाती हैं। बल्कि देखा तो यह भी गया है कि समस्या और विकराल रूप धारण कर लेती है। एक परिवार में नवदंपति आपसी तालमेल और सामंजस्य स्थापित नहीं कर पा रहा था। छोटी-छोटी बात को लेकर उनमें झगड़े होते रहते थे। पति-पत्नी आपस में मिल-बैठ कर विवाद के मूल में न जाकर अपने परिवार के अन्य सदस्यों, परिचितों और रिश्तेदारों के सामने इसे गंभीर समस्या के रूप में बताने लगे। कुछ समझदार लोगों ने समझाने की कोशिश की, लेकिन ज्यादातर लोगों ने आग में घी डालने का काम किया। नतीजतन, उनमें तलाक की नौबत आ गई। अगर उन्होंने समझदारी का परिचय दिया होता तो इस स्थिति को टाला जा सकता था।

जीवन में समस्याएं, परेशानियां, कठिनाइयां आना सामान्य बात है। ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिलेगा जिसे जिंदगी की कठिन डगर में कभी किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा हो या इन समस्याओं के कारण उसे कभी कोई कठिनाई नहीं आई हो। लेकिन इनसे घबरा कर जीवन का आनंद ही नहीं ले पाएं, ऐसा नहीं हो सकता। अगर जीवन में दुख है तो सुख भी है। मानव जीवन में कभी कोई भाव स्थायी नहीं होता। अगर आज दुख है तो सुख के पल भी मौजूद हैं। ऐसा हो ही नहीं सकता कि मानव जीवन में दुख ही दुख हैं या सुख ही सुख हैं। दोनों साथ-साथ चलते हैं, कभी कम कभी ज्यादा।

कई लोग होते हैं जो सुख के सुनहले पलों में भी समस्याएं खड़ी कर लेते हैं और दुखों को आमंत्रित कर लेते हैं। समस्याएं भले ही बड़ी न हों या फिर वे समस्या हों ही नहीं, तब भी हम उन्हें समस्या मान कर चिंता में डूब जाते हैं। कुछ समस्याएं भी ऐसी होती हैं, जिन पर मनुष्य का कोई वश नहीं होता। ऐसे में जिन बातों के लिए इंसान खुद उत्तरदायी नहीं, तब उनके लिए क्यों परेशान हुआ जाए! अलबत्ता उन समस्याओं से निजात पाई जा सकती है, जिन्हें व्यक्ति खुद उपजा लेता है या कहा जाए कि उन समस्याओं को खड़ी कर लेता है। ऐसे मामलों में अगर समझदारी का परिचय दें तो कई समस्याएं आसानी से हल हो सकती हैं। ऐसा नहीं है कि समस्याओं के कोई हल नहीं हों या उनसे निपटने के कोई उपाय नहीं हों।

हां, एक बात जरूर है कि जीवन में आने वाली परेशानियों, कठिनाइयों और समस्याओं का सामना व्यक्ति को खुद ही करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में खुद को मानसिक तौर पर इतना सुदृढ़ और सक्षम बनाना होगा कि ये सभी दुख का कारण नहीं बन सकें। अगर हम अपने इन संकटों, विपत्तियों को हरेक शख्स के सामने उजागर करेंगे तो वे इनसे निजात पाने में सहायता तो नहीं करेंगे, बल्कि उलझनों को और ज्यादा बढ़ा देंगे। इसलिए बेहतर होगा कि अपनी समस्याओं, कठिनाइयों और परेशानियों से खुद निपटें और उनके हल निकालें। उनसे घबराएं नहीं, बल्कि जीवट के साथ सामना करें। यह अवश्य किया जा सकता है कि जो सचमुच हितैषी या शुभचिंतक हैं, उनसे अपनी परेशानियों के संबंध में चर्चा की या सलाह ली जा सकती है। लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना जरूरी है कि कौन सच्चा शुभचिंतक है। इसकी पहचान करने की जरूरत है। इसी में सार्थकता भी है कि हरेक समस्या, कठिनाई और परेशानी को चुनौती के रूप में लें।

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