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दुनिया मेरे आगेः नींव के पत्थर

मनुष्य का कर्म-जीवन एक मकान की तरह है। यह मकान मजबूत हो, भव्य हो और सभी के लिए उपयोगी हो- इसके लिए आवश्यक है कि इस मकान की नींव पक्की हो।

Author July 23, 2018 3:50 AM
जीवन में एक निश्चित लक्ष्य और निश्चित दिशा का होना बहुत जरूरी है।

दीपक गिरकर

मनुष्य का कर्म-जीवन एक मकान की तरह है। यह मकान मजबूत हो, भव्य हो और सभी के लिए उपयोगी हो- इसके लिए आवश्यक है कि इस मकान की नींव पक्की हो। नींव पक्की होने के लिए नींव के पत्थर-चरित्र, महत्त्वाकांक्षा, परिश्रम, कर्तव्य पालन, रचनात्मक दृष्टिकोण, वफादारी, समझदारी, नैतिक बुद्धि, व्यावहारिक बुद्धि, नैतिक साहस, शराफत, आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास मजबूत होने चाहिए। मनुष्य का महत्त्वाकांक्षी होना एक स्वाभाविक गुण है। हर एक व्यक्ति जीवन में कुछ न कुछ खास हासिल करना चाहता है। जीवन में सफलता पाने के लिए व्यक्ति का महत्त्वाकांक्षी होना आवश्यक है। इसलिए जीवन में एक निश्चित लक्ष्य और निश्चित दिशा का होना बहुत जरूरी है।

महत्त्वाकांक्षा को साहसिक भावना से ओतप्रोत माना गया है। बौद्ध धर्म के अनुयायियों के अनुसार महत्त्वाकांक्षा मानव चरित्र का एक अवगुण है। कुछ लोग अपनी महत्त्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। इसके लिए कुछ लोग गलत रास्ते अपनाते हैं। उच्च महत्त्वाकांक्षा के कारण नैतिकता और दर्शन के सारे नियम एक तरफ धरे के धरे रह जाते हैं। उच्च महत्त्वाकांक्षा व्यक्ति को झूठा और बेईमान बना देती है। ऐसा व्यक्ति सारे बंधनों को तोड़ कर निजी स्वार्थ में लिप्त रहता है और महत्त्वाकांक्षा की प्राप्ति ही उसका मुख्य ध्येय होता है। ‘महाभारत’ की कथा के मुताबिक देखें तो वह युद्ध दुर्योधन की उच्च महत्त्वाकांक्षा का ही परिणाम था। सिकंदर, जूलियस सीजर, नेपोलियन बोनापार्ट जैसे शासकों में विश्व विजय की उच्च महत्त्वाकांक्षा थी।

अति महत्त्वाकांक्षा के कारण हम विनाश के कगार पर पहुंच चुके हैं। उच्च महत्त्वाकांक्षा के कारण एक व्यक्तिअपने माता-पिता, भाई-बहन, पुत्र-पुत्री, अन्य रिश्तेदारों, अपने मित्रों और अपने समाज को भूल कर सिर्फ अपने तय किए गए मकसद की प्राप्ति में ही लगा रहता हैं। और तो और, ऐसा व्यक्ति अपने जीवन साथी की उपेक्षा करके अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए गलत रास्ते पर भी चल पड़ता है। ऐसे लोग अपनी जिम्मेदारियों, नैतिकता और अपनी सभ्यता को भी भूल जाते हैं और सिर्फ अपना मनचाहा हासिल करने के लिए मौका पड़ने पर अपने रिश्तेदारों और मित्रों को भी दांव पर लगाने के लिए तैयार रहते हैं।

उच्च महत्त्वाकांक्षी लोगों के नींव के बाकी के पत्थर काफी कमजोर होते हैं। व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए परिवार, मित्र और समाज तीनों का महत्त्वपूर्ण स्थान है। उच्च महत्त्वाकांक्षा वाले व्यक्ति शोहरत और रुतबे के लिए भागते रहते हैं और उनके पास परिवार के सदस्यों, मित्रों और समाज के लोगों से बातचीत करने के लिए समय ही नहीं होता है। धीरे-धीरे ऐसे लोग अपने हित चाहने वाले सभी लोगों से काफी दूर हो जाते हैं। वे अपने बच्चों पर अपनी इच्छाएं और मनमर्जी जबरन थोप देते हैं। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि अकेलेपन में उच्च महत्त्वाकांक्षा वाले लोग संवादहीनता की स्थिति से नकारात्मक विचारों से घिर जाते है। इस वजह से वे कम उम्र में ही शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार हो जाते हैं। एकाग्रता में कमी होना और अपनी विफलताओं पर तुरंत ही निराश हो जाना इनके स्वाभाव में घुल जाता है। लोगों के साथ संवादहीनता की स्थिति से ऐसे लोगों के उत्साह में कमी आ जाती है, जिससे ये अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में भी सफल नहीं हो पाते हैं। इस स्थिति के लंबा खिंचने पर वे अवसाद से ग्रस्त हो जाते हैं। और यही स्थिति कभी-कभार आत्महत्या की भी वजह बन जाता है।

कहा भी गया है कि व्यक्ति में महत्त्वाकांक्षा उतनी ही होनी चाहिए, जितना कि भोजन में नमक। अगर नमक बहुत कम होगा तो भोजन में स्वाद और आनंद नहीं आएगा और बहुत ज्यादा होगा तो भोजन गले नहीं उतरेगा। सफल जीवन के लिए नींव के पत्थरों में संतुलन जरूरी हैं। महात्मा गांधी, भारत रत्न डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, अब्राहम लिंकन, थामस अल्वा एडीसन, अल्बर्ट आंइस्टीन, नेल्सन मंडेला, हेलेन केलर, एनआर नारायण मूर्ति, दशरथ मांझी आदि महापुरुषों के नींव के सभी पत्थर काफी मजबूत थे, जिसके कारण ये अपने जीवन में सकारात्मक कामों के जरिए अपने सपनों को साकार करने में सफल हुए। इन महापुरुषों ने कभी भी मुश्किलों से मुंह नहीं मोड़ा। उनका ईमानदारी से सामना किया और सकारात्मक नजरिया रखते हुए खुद पर पूरा विश्वास रखा।

ऐसे लोगों ने सिद्ध कर दिया कि अगर किसी व्यक्ति में ऊंचे सपने, दृढ़ संकल्प, अदम्य इच्छाशक्ति, कर्तव्य कर्म में ईमानदारी और निष्ठा और सच्ची लगन हो तो सुविधा और आवश्यकताओं का अभाव भी उसे लक्ष्य पाने से रोक नहीं सकते हैं। ये लोग भी अपने लक्ष्य को प्राप्त करने की राह में कई बार विफल हुए होंगे, लेकिन वे उससे अपनी राह की बाधा मान कर रुके नहीं। विफलताएं तो सफलता का रास्ता खोल देती हैं। यही वजह है कि दुनिया भर में मशहूर शख्सियतों के जीवन-संघर्ष आज भी नई पीढ़ी को प्रेरणा देते हैं। महत्त्वाकांक्षाएं पूरी करने के क्रम में बस यह नहीं हो कि मानवीय संवेदना और संबंधों का जीवन-तत्त्व छिन जाए।

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