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समर्थ बनाम शक्तिमान

शब्दों की अपनी सत्ता होती है और उसकी महत्ता। एक शब्द जहां आपकी सुंदर दुनिया की रचना करते हैं तो एक दूसरा शब्द विनाश का द्योतक होता है।

सांकेतिक फोटो।

शब्दों की अपनी सत्ता होती है और उसकी महत्ता। एक शब्द जहां आपकी सुंदर दुनिया की रचना करते हैं तो एक दूसरा शब्द विनाश का द्योतक होता है। इन शब्दों में कई शब्द ऐसे होते हैं जो एकबारगी आपको एक अर्थ वाले दिखाई देते हैं, लेकिन जब इन शब्दों की मीमांसा की जाती है तो ज्ञात होता है कि दोनों एक होते हुए भी दो अलग-अलग किनारे पर बैठे हैं। विवेकानंद के सूक्तिवाक्य पढ़ते हुए ही ऐसे दो शब्दों से परिचय हुआ। वे कहते हैं कि मनुष्य जैसा सोचता है, वैसा बन जाता है।

वह सोचता है कि वह निर्बल है तो निर्बल बन जाता है और वह सोचता है कि वह समर्थ है तो समर्थ बन जाता है। यहां उन्होंने समर्थ शब्द का उपयोग किया और शक्ति शब्द से परहेज किया। फौरी तौर पर समर्थ और शक्ति में कोई बड़ा अंतर नहीं दिखता है, लेकिन व्यवहार में देखें तो दोनों में जमीन और आसमान का अंतर दिखाई देता है। समर्थ से आशय उस व्यक्ति से है जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का भला सोचता है। समर्थ यानी कल्याण के प्रति सोच। समर्थ यानी सकरात्मक सोच का व्यक्ति। लेकिन जब हम शक्ति की बात करते हैं तो इसका सीधा अर्थ निकलता है खुद के प्रति सोचने वाला। अपने कल्याण और खुद में आत्ममुग्ध रहने वाला। शक्ति शब्द में सकरात्मकता का भाव लगभग विलोपित होता है, जबकि समर्थ शब्द सकरात्मकता से परिपूर्ण होता है।

रामकथा को संदर्भ लें तो जब हम राम का उल्लेख करते हैं तो वे समर्थ दिखाई देते हैं। वे जनकल्याण के लिए अपनी सामर्थ्य का उपयोग करते हैं। उनके मन में कहीं भी इस बात का गर्व नहीं दिखता है कि वे समर्थ हैं, लेकिन उन्हीं के समक्ष एक अन्य पात्र रावण का उल्लेख आता है तो वह शक्तिमान के रूप में दिखता है। रावण को अपनी शक्ति पर गर्व है और घमंड भी। वह इस तरह गर्वोन्मत है कि दुनिया की सारी शक्तियां उनके सामने गौण हैं। शक्तिवान बन जाने के कारण रावण की अन्य योग्यता भी दरकिनार हो गई है।

रावण कई वेदों का ज्ञाता था और प्रकांड पंडित के रूप में भी उसका स्मरण किया जाता है, लेकिन शक्तिवान बन जाने के कारण वह खलनायक के रूप में हमारे सामने उपस्थित है। यही कारण है कि घर-घर में बच्चों के नाम राम पर तो रखे जाते हैं लेकिन रावण रखने की कल्पना भी नहीं की गई। समाज शुचिता चाहता है और चाहता है कि उसकी पीढ़ी हमेशा नैतिक और सत्य के मार्ग पर चलने वाली हो। वह अपने बच्चों को समर्थ बनाना चाहता है, न कि शक्तिवान।

आधुनिक संसार में भी समर्थ और शक्तिवान व्यक्तित्व से हमारा परिचय होता रहा है। दूसरे विश्वयुद्ध के दौर का उद्धरण ले सकते हैं। हालांकि अमेरिका मित्र देशों के समूह में था और वह हिटलर के बरक्स खड़े देशों के साथ लड़ रहा था। उसके पास शक्ति भी थी। लेकिन अस्त्र-शस्त्र से लैस अमेरिका ने हिरोशिमा में जो कुछ किया, वह उसके शक्तिमान होने की नकारात्मकता के लिए याद किया जाता है। हिरोशिमा मिट कर भी दुनिया की स्मृतियों में आबाद हो गया। जापान के हिटलर के खेमे में होने के बावजूद मानववता में विश्वास करने वाला कोई भी व्यक्ति हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराए जाने का समर्थन नहीं कर सकता और इसके लिए अमेरिका को सराह नहीं सकता।

इसके समांतर दूसरे विश्वयुद्ध के पहले और दौरान जर्मनी में हिटलर ने जो किया, उसी को संदर्भ रखें तो वह अपनी नकरात्मकता के लिए इतिहास के पन्नों में समा गया। यहीं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हुए। उनके पास अस्त्र-शस्त्र नहीं था। मगर वे विचारों और आत्मबल से इतने समर्थ थे कि लगभग डेढ़ सौ वर्ष बाद भी उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह गांधीजी का सामर्थ्य था कि वे बिना हथियार लोगों का मन बदल देते थे।

यह गांधीजी का ही करिश्मा था कि उन्होंने कभी शक्तिवान बनना नहीं चाहा, बल्कि शक्तिवान को वे समर्थ के रूप में देखना चाहते थे। यह हमारे समय में किसी चमत्कार से कम नहीं कि एक धोती और एक लाठी के बल पर चलने वाले हाड़-मांस के मामूली से दिखने वाले गांधीजी ने पूरी दुनिया का मन बदल दिया। समर्थ हो जाने का उदाहरण आदिकाल में राम हैं तो आधुनिक संसार में महात्मा गांधी इतिहास के पन्नों पर अनेक महान व्यक्तित्व हुए हैं और सबने समर्थ होने की बात कही है। समर्थ बन कर दुनिया को रास्ता दिखाने का उपक्रम किया है।

समर्थ और शक्ति की परिभाषा हमेशा से दी जाती रही है। सवा सौ साल पहले शिकागो में स्वामी विवेकानंद को सुनने के लिए लाखों लोग एकत्रित होते हैं तो यह उनका सामर्थ्य था। समर्थ व्यक्ति हमेशा इतिहास लिखता है। युवाओं को उनके भीतर की शक्ति से परिचय कराया जाना और उस शक्ति को सकरात्मक दिशा में उपयोग करने के लिए प्रेरित करने का जो रास्ता बताया जाना जरूरी है। युवाओं की शक्ति दिशा से भ्रमित होने पर बहुत कुछ बर्बाद कर सकती है तो सही दिशा मिलने पर बहुत कुछ बना भी सकती है।

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