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दुनिया मेरे आगे: रिश्तों की संवेदना

उफनते जुनून के बीच शब्दों और रिश्तों का सौम्य साहचर्य क्या होता है, आज के दौर में इसे देखना हैरान करता है, लेकिन यह सुखद अहसास की तरह है।

Author June 6, 2018 4:07 AM
अगर किसी पक्ष के भीतर इस बात का शक भी बैठ जाए तो दोनों पक्षों का संबंध सहज नहीं रह जाता।

प्रतिभा राय

उफनते जुनून के बीच शब्दों और रिश्तों का सौम्य साहचर्य क्या होता है, आज के दौर में इसे देखना हैरान करता है, लेकिन यह सुखद अहसास की तरह है। पति-पत्नी के बीच तनाव, मनमुटाव या तलाक भी आम बात होती जा रही है। जिस समाज में हम जीते-रहते हैं, उसमें विवाहित स्त्री-पुरुष के संबंध में विवाहेतर पहलू को सबसे संवेदनशील पक्ष माना जाता है। अगर किसी पक्ष के भीतर इस बात का शक भी बैठ जाए तो दोनों पक्षों का संबंध सहज नहीं रह जाता। और जब सचमुच ही विवाह से बाहर कोई संबंध हो तो इस मसले पर पति और पत्नी का संबंध टूट तक जाता है। कई बार हिंसा की स्थिति और बेहद दुखद नतीजे भी सामने आते हैं।

लेकिन हाल ही में कानपुर में एक पति ने जो किया, उसे एक पुरुष के सामाजिक अहं या वर्चस्व के मनोविज्ञान पर संवेदना और मानवीयता की विजय के तौर पर देखा जा सकता है। उसकी शादी जिस लड़की से हुई थी, वह पहले से किसी और से प्रेम करती थी। कुछ दिनों बाद पति को जब पता चला तो दुखी या गुस्सा होने के बजाय शांत मन से उसने पत्नी से बात की। पत्नी ने इस बीच आत्महत्या की कोशिश भी की। फिर पति ने घर के बाकी लोगों से बात की और उसकी शादी उसके प्रेमी से करा दी। विवाह के आयोजन में वह खूब नाचा और उसी दौरान एक मौके पर फूट-फूट कर रोया भी। इस घटना में पति ने पत्नी के प्रेम संबंध के बारे में पता चलने पर धीरज के साथ स्थितियों को समझा, फिर संवेदनशीलता और हिम्मत के साथ जो फैसला किया, उससे न सिर्फ दो लोगों की जिंदगी तबाह होने से बच गई, बल्कि आपस में एक दूसरे को पसंद करने वाले एक साथ रहने भी लगे।

जिस पति ने यह कदम उठाया, उसके जैसे लोग हमारे समाज में बहुत कम हैं। शादी के बाद पत्नी को अपनी जागीर, अपना सामान या यों कहें कि उस पर अपना मालिकाना हक समझते हैं और ऐसे मामले सामने आने पर होश खो बैठते हैं। जबकि अधिकतर पत्नियां अपने पति के बारे में ऐसी ही स्थिति सामने आने के बावजूद समाज और मान प्रतिष्ठा के नाम पर दुखी होकर या लड़-झगड़ कर चुप रह जाती हैं, उसे भाग्य मान कर समझौता कर लेती हैं। एक बड़ी कंपनी में काम करने वाली एक विवाहित लड़की ने मुझे बताया था कि उसके पति से कई स्तरों पर संबंध अच्छे नहीं थे। इसी बीच उसकी मुलाकात और दोस्ती अपने साथ काम करने वाले एक पुरुष मित्र से हुई। दोस्ती कब नजदीकी में बदली, उसे पता ही नहीं चला। जब इसके बारे में उसके पति को पता चला, तो लड़ाई-झगड़े के बाद उसे नौकरी के साथ शहर भी छोड़ना पड़ा। इस तरह के कई मामले सामने नहीं आते, क्योंकि इसे प्रतिष्ठा से जोड़ कर देखा जाता है।

भगोने में पके चावल की जांच करने के लिए हम चावल का एक दाना छू कर पता लगाते हैं कि पूरे भगोने का चावल पक गया है। इसी तर्ज पर ऐसे संबंधों के बारे में कहा जा सकता है कि पति और पत्नी एक दूसरे के साथ सहज नहीं है, नाम भर के लिए दोनों के बीच रिश्ता है, लेकिन कानपुर के उस युवक की तरह किसी पति के पास दरिया जैसा दिल नहीं है। जबकि रिश्तों में अगर तनाव गहराने लगे तो कई बार वह नासूर बन जाता है और समूची जिंदगी को बुरी तरह बिखेर देता है। इंसान वक्त पर रिश्तों की संवेदना और उसकी हकीकत को समझ नहीं पाता और जब होश आता है, तब तक जिंदगी निकल चुकी होती है। जबकि संवेदना के स्तर पर परिपक्व इंसान भावनात्मक उथल-पुथल और तकाजों का खयाल रख कर फैसला लेता है, ताकि कम से कम भविष्य बेहतर हो सके।

चार्ल्स डिकेन्स के एक उपन्यास का एक पात्र प्रश्न करता है कि बुद्धिमान किसे कहा जाए, तो जवाब मिलता है- ‘उसे जो सामान्य से सामान्य बात पर भी ध्यान दे और उससे जुड़ाव महसूस करे।’ बदलते सामाजिक परिवेश और संबंधों के आयाम के बीच जीवन जटिल होता जा रहा है, बिखराव बढ़ रहा है, भरोसा टूट रहा है। जबकि जीवन को नन्ही बूंदों की तरह समेटने की जरूरत है। माना जाए तो जीवन बारिश की नन्ही बूंदों की तरह है, जिनमें विशाल समुद्र की रचना होती है। ये रेत के उन छोटे कणों की तरह है, जिनसे खूबसूरत धरती का निर्माण होता है। फिर क्यों न हम भी छोटी-छोटी बातों से ही महानता का सफर शुरू करें। कानपुर के उस पति ने जो किया, उसे गंवाने से ज्यादा हासिल करने के तौर पर देखा जाना चाहिए। इतना तय है कि ऐसे मामले आम नहीं हो सकते, लेकिन उसने जो किया, वह संवेदनाओं या भावनाओं के साथ जीवन की कद्र करना है। अगर वह पति की पारंपरिक हैसियत को बनाए रखने की जिद पर उतर आता तो शायद कुछ भी अच्छा नहीं होता, बिगड़ जरूर जाता। जिंदगी एक ही बार मिलती है, इसे बर्बाद कर दिया जाए या आबाद, यह रिश्तों की संवेदना की हमारी समझ पर निर्भर है।

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