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दुनिया मेरे आगेः भूलते भागते क्षण

रात भर सफर के बाद बस ढाबे पर आकर रुकी तो कानों में रेडियो की आवाज गूंजने लगी- ‘ये आकाशवाणी है। अब आप (लवलीन निगम)… से समाचार सुनिए।’ एक लंबे अरसे के बाद यह आवाज कानों में सुनाई दी। चाय पीते हुए मैं ध्यान लगा कर समाचार सुनने लगा। मैं समाचार सुनने में मगन था […]

मैच के दौरान लोग रेडियो से इस तरह जुड़ जाते थे कि उनके हावभाव से ही पता चल जाता था कि मैच में क्या चल रहा है!

रात भर सफर के बाद बस ढाबे पर आकर रुकी तो कानों में रेडियो की आवाज गूंजने लगी- ‘ये आकाशवाणी है। अब आप (लवलीन निगम)… से समाचार सुनिए।’ एक लंबे अरसे के बाद यह आवाज कानों में सुनाई दी। चाय पीते हुए मैं ध्यान लगा कर समाचार सुनने लगा। मैं समाचार सुनने में मगन था कि बस कंडक्टर ने जोर से आवाज लगाते हुए कहा- ‘भाई साहब चलो, बस चलने वाली है।’ कंडक्टर की आवाज सुन जल्दी से चाय वाले का बिल चुकता कर मैं बस में सवार हो गया। लेकिन बस में भी रेडियो पर चलने वाले समाचार मेरे कानों में गूंज रहे थे और पता ही नहीं चला कि कब मैं बचपन की यादों में चला गया। दरअसल, उन दिनों रेडियो का बहुत महत्त्व था। मेरे घर में चाचाजी के पास एक छोटा रेडियो था और दादाजी के पास एक बड़ा। जब भी रेडियो पर किसी देश के साथ भारत के क्रिकेट मैच की कमेंट्री आती थी तो मेरे कान चाचाजी के रेडियो से चिपक जाते थे और समाचार सुनने के लिए मैं दादाजी के पास पहुंच जाता था। मेरे अलावा आस-पड़ोस के अन्य लोग भी चाचाजी और दादाजी के पास के रेडियो पर मैच की कमेंट्री और खबर सुनने के लिए आते रहते थे।

क्रिकेट मैच वाले दिन पूरे गांव का माहौल एकदम अलग हो जाता था। घर, मोहल्ला, बैठक और बाजार आदि जगहों से सिर्फ रेडियो कमेंट्री की आवाज सुनाई देती थी। मैच के दौरान लोग रेडियो से इस तरह जुड़ जाते थे कि उनके हावभाव से ही पता चल जाता था कि मैच में क्या चल रहा है! जैसे, अगर जोर-जोर से आवाजों के साथ तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई दे रही है तो इसका मतलब कि भारतीय टीम अच्छा खेल रही है, लेकिन अगर रेडियो के पास सन्नाटा पसरा रहता तो आसानी से समझ आ जाता कि भारत की स्थिति गंभीर है। मेरी दिनचर्या दादाजी के रेडियो के साथ जुड़ी हुई थी। दफ्तर जाने से पहले दादाजी आकाशवाणी से समाचार सुनते थे और मैं स्कूल जाने की तैयारी में व्यस्त रहता था। अगर किसी भूकम्प, सड़क दुर्घटना, युद्ध आदि किसी गंभीर घटना की खबर मिलती तो मैं दिन भर उस घटना के बारे में सोचता और साथ पढ़ने वाले बच्चों से उस पर चर्चा भी करता था। विद्यालय से आते ही सबसे पहले आकाशवाणी से दोपहर का समाचार सुनता था, ताकि उस घटना के बारे में विस्तार से जानकारी मिल सके।

मेरे लिए उन दिनों रात का समय सबसे महत्त्वपूर्ण होता था, क्योंकि तब नौ बजे रात को बीबीसी हिंदी का कार्यक्रम आता था। इस कार्यक्रम का मुझे बेसब्री से इंतजार रहता था, क्योंकि कार्यक्रम में विदेशी समाचारों के साथ महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं पर विस्तार से चर्चा की जाती थी। जैसे अमेरिका इराक पर हमला करने की योजना बना रहा है, भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर रूस का क्या रुख है, समुद्र में भारी तूफान की चेतावनी और आज ही के दिन बीस साल पहले क्या हुआ था… आदि। समाचार बुलेटिन खत्म होने के बाद मैं दादाजी के साथ खबरों पर विस्तार से चर्चा करता था, क्योंकि खबर सुन कर मेरे दिमाग में बहुत सारे प्रश्न आते थे। दादाजी अपनी समझ के अनुसार उत्तर देते थे। कभी-कभी उत्तर सुन कर मेरे दिमाग में और अधिक प्रश्न आते थे। इस तरह रेडियो पर आने वाली खबरों के माध्यम से हमारे बीच तमाम विषयों पर चर्चा होती थी और इससे मुझे घटनाओं पर समझ के साथ नई जानकारियां मिलती रहती थीं।

दसवीं कक्षा में दाखिला लेने के बाद मैंने अपनी बचत के पैसे से एक छोटा रेडियो खरीदा और फिर दोस्तों और परिवार के अन्य बच्चों के साथ मैच की कमेंट्री और खबरें सुनने लगा। कुछ समय बाद एफएम चैनलों की शुरुआत हुई और तब रेडियो पर गाने ज्यादा बजने लगे। इस तरह रेडियो मेरी दिनचर्या का एक अहम अंग था। लेकिन फिर समय के साथ बदलाव आया और घर में टीवी का आगमन हुआ। इसने बहुत जल्दी रेडियो की जगह ले ली और फिर धीरे-धीरे घर से रेडियो कहीं गुम हो गया। घर में सभी लोग एक साथ बैठ कर टीवी पर नाटक और फिल्में देखने लगे। इसके बाद मोबाइल आया, जिसने लोगों के हाथों में पूरी दुनिया सौंप दी। मोबाइल पर केवल एक क्लिक के जरिए फिल्म, नाटक, गाने और मौसम से लेकर बर्फ गिरने तक की जानकारी मिलने लगी। मोबाइल के साथ आए इस बदलाव से घर-परिवारों में भी बड़ा बदलाव आया। पहले सभी लोग एक साथ बैठ कर रेडियो-टीवी सुना और देखा करते थे, लेकिन अब सभी लोग एक साथ बैठ कर भी मोबाइल की दुनिया में अलग-अलग व्यस्त नजर आते हैं। समय के साथ आए इस बदलाव का प्रभाव गांव में रेडियो ठीक करने वाले मिस्त्री पर भी पड़ा, जिसने अब रेडियो ठीक करने का काम बंद कर दिया है और मोबाइल रिचार्ज की दुकान खोल ली है।

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