दुनिया मेरे आगे

अपने हिस्से का आसमान

बिहार में मतदान के लिए लंबी कतारों में लगी महिलाओं को देख कर यह कौन कह सकता है कि ताजा हवाओं ने उनकी जिंदगी...

विज्ञापन की विकृत छवियां

हर व्यक्ति या कहें उपभोक्ता तक कंपनी के उत्पादों की खूबियों को इस तरह से पहुंचाना कि वह उस सामान को खरीदने के लिए...

जीवन की लय

आजकल के जीवन को समझने के लिए हमें अपने आसपास की दुनिया तो देखनी ही होती है। वह सब कुछ देखना होता है, जिसके...

फुर्सत के पल

एक दोस्त ने पूछा- ‘इस हफ्ते के अंत में तुम कहां जा रहे हो?’ दूसरे ने कहा- ‘पता नहीं, लेकिन कहीं निकल जाऊंगा यों...

संवेदनाओं के कंटीले रास्ते

बात छह जनवरी 1984 की है। दिल्ली विश्वविद्यालय में अमृता प्रीतम आमंत्रित थीं। सभा के बाद वे मेरी मित्र उषा पुरी के घर आर्इं।...

समरसता की राह में

दादरी के बिसाहड़ा गांव में हादसा हुआ या षड्यंत्र, इसमें अपन नहीं पड़ेंगे।

आभासी सहायता का संसार

एक दिन सुबह उठने पर मैंने जब एक दोस्त से बात करने के लिए फोन लगाया तब अचानक पता चला कि मेरे मोबाइल में...

किताब बिना विद्यार्थी

यह हम अक्सर दोहराते रहते हैं कि आज का युवा कल का भविष्य है। लेकिन आज के युवा की दशा और दिशा देखने के...

शिक्षक बनने से पहले

कई बार लोग अध्यापन कार्य को हलके रूप में ले लेते हैं। जैसे ही पढ़ाई खत्म होती है, हर कोई कहने लगता है कि...

संबोधन के शब्द

दस-पंद्रह साल पहले दिल्ली जैसे महानगरों में सार्वजनिक स्थानों पर बहनजी, माताजी, दीदी या ज्यादा से ज्यादा आंटी जैसे शब्द दिन में आसानी से...

ओसारे की सूपाबेनी

सुबह-सुबह गांव का ओसारा यानी बरामदा क्यों याद आ गया, कुछ समझ में नहीं आया!

नियम बनाम अमल

हमारे देश में नियम-कायदे तो बहुत हैं, पर कानून का पालन बहुत कम मामलों में हो पाता है।

यह बच्चा किसका है?

बाजार से लौटते हुए कूड़ेदान के पास से रिक्शा गुजरा तो तेज बदबू आई। इस कूड़ेदान के पास वाली सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं।...

बकरे की अम्मा

जब तक बुरे दिन चले, करुण स्वर में मिमियाती हुई वह अपनी जान बख्श देने की फरियाद करती रही। पर तब किसी के कान...

बेरहम है यह सड़क

पिछले दिनों सड़क पर खूब राजनीति हुई, खूब बहसें हुर्इं। मगर मैं उस सड़क पर आपको नहीं ले जा रही।

दिखावे के महल

हाल ही में साढ़े सात सौ करोड़ का बंगला मीडिया की सुर्खियां बना। इसके पहले हमने साढ़े चार सौ करोड़ के बंगले की सुर्खियां...

संवाद की जुबान

हिंदी में ‘चलो’ कैसे बोलेंगे, वे लगातार इसका अभ्यास कर रहे थे। पहली बार में उनकी जुबान से कुछ अलग ध्वनि निकली तो गाइड...

पढ़ाई के पैमाने

आजकल की युवा पीढ़ी पढ़ने-लिखने में पिछड़ रही है, यानी भारत एक बेहतर राष्ट्र होने से पिछड़ रहा है।

ये पढ़ा क्या...
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