दुनिया मेरे आगे

सद्भाव का समाज

एक समय था जब हम लड़ाई-झगड़ों को पहले आपस में मिलजुल कर हल कर लिया करते थे या किसी की बात को इतनी गंभीरता...

पढ़ाई के पैमाने

मेरे सामने अक्सर यह सवाल एक उलझन के रूप में सामने आता है कि शिक्षकों के अध्ययन का दायरा क्या हो! पाठ्यक्रम को अगर...

रोशन दिवाली उदास दिया

एक बार नोबेल पुरस्कार विजेता वीएस नायपाल बता रहे थे कि वे भारत में पहली बार 1961 में दिवाली की रात मुंबई पहुंचे। हवाई...

पाग की परंपरा

तीन करोड़ मैथिल या मैथिलीभाषियों की जनसंख्या बचपन से सुन रहा था। लेकिन पिछले करीब दो दशकों से यह आबादी चार करोड़ बताई जा...

शिकायत की भाषा

दिल्ली वाले यों तो हर काम में अन्य शहर वालों से दो कदम आगे चलते हैं, लेकिन एक चीज में दिल्ली अंग्रेजों के जमाने...

अपना मोक्ष

अभी थोड़े दिनों पहले मैंने अपने जीवन के पचास वर्ष पूरे किए हैं। मुझे लगता है कि अपनी योग्यता और सामर्थ्य के अनुरूप इन...

श्रम का सौंदर्य

हर रोज जब उसे यों ही लिफ्ट में बैठा हुआ देखता हूं तो मन विचलित हो जाता है कि आखिर कोई व्यक्ति कैसे इतना...

एक मर्मांतक चिट्ठी

हिला देने वाली यह खबर अकेली नहीं है, ऐसी और भी होंगी। महाराष्ट्र के लातूर में सूखा पीड़ित इलाके के एक किसान की सोलह...

किसके सपने

हाल ही में मुझे प्राथमिक शिक्षा से जुड़े एक सर्वेक्षण के दौरान राजस्थान के राजसमंद जिले के एक स्कूल में पांचवीं और छठी कक्षा...

नाम की पढ़ाई

जब गांव याद आता है, तब बचपन और गांव-जवार के लोगों से मिले संस्कार भी याद आ जाते हैं। तब इस बात का अहसास...

छोटी-छोटी खुशियां

अपने आसपास के ‘बेरुखे माहौल’ को देख कर अक्सर यह सवाल मेरे जेहन में कुलबुलाने लगता है कि क्या खुशियों ने हमसे दूरी बना...

वक्त-वक्त की बात

आमतौर पर अब चुनावी सभाओं और रैलियों में कुछ नया सुनने को नहीं मिलता। वही आरोप-प्रत्यारोप और झूठे सपने दिखाने का कारोबार। इसलिए इन...

तकनीक की सीमा

दोस्त झुंझलाता-सा दफ्तर में दाखिल हुआ और हताशा से फट पड़ा- ‘यह बैंक है या आफत! पिछले तीन घंटे में तीसरी बार बैंक का...

दिखावे का दंश

टीवी पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों के बीच थोड़ी-थोड़ी देर पर होते ‘ब्रेक’ यानी मध्यांतर पर कौन ध्यान देता है!

फर्क रंग धूल का

हर राज्य हर शहर का अपना इतिहास है जो उसकी पहचान होती है, जिससे उसे चिह्नित किया जाता है। हाल में हमारे नेताओं ने...

स्वच्छता के चरण

पिछले कुछ समय से जिस तरह पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ‘स्वच्छता अभियान’ और ‘वृक्षारोपण’ का दौर चला है, लोग इस बारे में सोचने...

अपने हिस्से का आसमान

बिहार में मतदान के लिए लंबी कतारों में लगी महिलाओं को देख कर यह कौन कह सकता है कि ताजा हवाओं ने उनकी जिंदगी...

विज्ञापन की विकृत छवियां

हर व्यक्ति या कहें उपभोक्ता तक कंपनी के उत्पादों की खूबियों को इस तरह से पहुंचाना कि वह उस सामान को खरीदने के लिए...