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दुनिया मेरे आगे

गांव में पुस्तकालय

राजेंद्र उपाध्याय जनसत्ता 26 सितंबर, 2014: गांव में एक पुस्तकालय था, पर कुछ लोगों के लिए उसके वहां होने का कोई अर्थ नहीं था।...

बालों का क्या

सूरज प्रकाश जनसत्ता 25 सितंबर, 2014: तब राजीव गांधी जिंदा थे और प्रधानमंत्री थे। उन्हीं दिनों बाजार में अनूप तेल आया था, सिर पर...

आमंत्रण का सम्मान

मृदुला सिन्हा जनसत्ता 24 सितंबर, 2014: हर व्यक्ति जीवन में कभी अभ्यागत तो कभी अतिथि की भूमिका में आता रहता है। आमंत्रण भेजने वाले...

सन्नाटा बुनती हवाएं

सुधीर विद्यार्थी जनसत्ता 23 सितंबर, 2014: लखनऊ के निशातगंज कब्रिस्तान में अपनी मां और बहन सफिया के बीच सोए मजाज़ से बातें करने के...

एक अघोषित हत्याकांड

राजकिशोर जनसत्ता 22 सितंबर, 2014: भारत की गायों ने नरेंद्र मोदी को वोट नहीं दिया है। न ही भैंसों और सूअरों ने। बकरों और...

जिंदगी की सांझ

दीपक मशाल जनसत्ता 19 सितंबर, 2014: स्वीडन में माल्मो शहर से कुछ दूरी पर ब्रिटेन के स्टोनहेंज की तरह का, लेकिन उसकी तुलना में...

मिट्टी से रचते हुए

सीरज सक्सेना जनसत्ता 18 सितंबर, 2014: बेजिंग से लगभग दो घंटे की हवाई यात्रा कर चांगचुन पहुंचा। दिल्ली हवाई अड्डे पर जम्मू के शिल्पकार...