दुनिया मेरे आगे Archives - Page 60 of 63 - Jansatta
ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे

दिखना और होना

सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी आमतौर पर जो दिखता है, वह होता नहीं और जो होता है, वह दिखता नहीं। शायद इसीलिए कहा जाता रहा है कि...

परदे के पार

सुजाता तेवतिया टीवी के अन्य कार्यक्रमों की तरह ही विज्ञापन भी एक स्वतंत्र कार्यक्रम का दर्जा पा चुके हैं। वे अब सिर्फ रिक्त स्थान...

अज्ञान का अहंकार

विष्णु नागर कुछ समय पहले की बात है। हवाईयात्रा पूरी हो चुकी थी और गंतव्य तक पहुंचने के बाद यात्री बाहर आ रहे थे।...

कैसा नया

सुमेरचंद जितनी देर में पृथ्वी अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा करती है, उतने समय को एक दिन कहा जाता है। इसी प्रकार, जितने...

बृहत्तर परिवार

राजकिशोर वे नहीं रहीं। वे कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं। क्या बूढ़ा होना बीमार होना है? बिलकुल नहीं। लेकिन बुढ़ापा आदमी को...

वह अविस्मरणीय रात

अरविंद कुमार मुझे याद है छब्बीस-सत्ताईस दिसंबर 1973 को ‘समांतर कोश’ के विचार की वह न भुला सकने वाली रात। ‘माधुरी’ व्यावसायिक फिल्म पत्रिका...

स्तरीयता बनाम लोकप्रियता

देवेंद्र आर्य स्तरीयता बनाम लोकप्रियता की गांठ हिंदी साहित्य के लिए ऐसी है, जिसे लगभग सभी बड़े साहित्यकारों ने खोलने की कोशिश की है।...

कहां है हमारा हिस्सा

विपिन चौधरी बरसों पहले जब सुनीता की शादी हुई थी, तब उसके पिता ने गांव में सबसे ज्यादा दान-दहेज देकर उसे ससुराल विदा किया...

धर्म परिवर्तन के लाभ

राजकिशोर आज जब भारत एक महान परिवर्तन से गुजर रहा है, यह देख कर आश्चर्य होता है कि कुछ लोग परिवर्तन का विरोध कर...

गरीब की ईमानदारी

विष्णु नागर ऐसी खबरें पहले भी छपती रही हैं, आगे भी छपेंगी। खबर यह है कि भिवंडी (महाराष्ट्र) के झोपड़पट्टी इलाके अंबिकानगर के दो...

हाशिये पर किताबें

प्रेमपाल शर्मा दिसंबर का पहला सप्ताह, शाम के छह बजे सर्दी की आहट भर थी। फुटपाथ पर अखबार, पत्रिकाएं बेचने वाले जिस स्टॉल पर...

स्कूल में सांप

जाबिर हुसेन बजाहिर यह खबर इतनी ‘छोटी’ थी कि पढ़े-लिखों का ध्यान अपनी ओर नहीं खींच पाई। बीते सप्ताह मध्य बिहार की एक ‘जागरूक’...

मौत और मान्यताएं

बीनू पिताजी की मामी को हम दादी कह कर बुलाते थे। कुछ समय पहले उनका निधन हो गया। महीने भर की बीमारी के दौरान...

बेटी का समाज

अलका कौशिक टिंबा ने मेरे शहरी दर्प को उस रोज चकनाचूर कर दिया था। नगालैंड के आदिवासी समाज की नुमाइंदगी करने वाला टिंबा अपनी...

दिखावे का रोग

अंजलि सिन्हा अपनी जिंदगी के कोई पल यादगार बन पाएं, इसके लिए कुछ लोग न जाने क्या-क्या जतन करने लगते हैं। कोई खतरों से...

नाम की भूल

शरद तिवारी बात बहुत पुरानी नहीं हुई है। कुछ समय पहले दूरदर्शन की एक अस्थायी समाचार वाचिका ने जब चीन के राष्ट्रपति का नाम...

धर्मांतरण के पहलू

उमाशंकर सिंह धर्मांतरण पर मचे शोरगुल के बीच सत्तारूढ़ भाजपा जोर देकर कह रही है कि वह धर्मांतरण रोकने लिए कानून बनाने के पक्ष...

चेहरे और रंग

निखिल आनंद गिरि संपादन या एडिटिंग एक कमाल का कौशल है। ऐसा कह सकते हैं कि संपादन कला के माध्यम से अखबारी लेखन हो...