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दुनिया मेरे आगे

परिधान के प्रतिनिधि

विष्णु नागर कोई क्या पहनता है, क्या नहीं, यह उसका व्यक्तिगत मामला है। नैतिकता के ठेकेदारों को हमेशा ठेंगा दिखाते रहना जरूरी है, जिनमें...

मेरी कमाई

राजकिशोर जब से मैंने सांस्थानिक नौकरियां छोड़ीं या कुछ छूट गर्इं, तब से मेरी कमाई मुख्यत: पत्र-पत्रिकाओं और पुस्तकों से ही होती रही है।...

भाषा के सेतु

गिरिराज किशोर डॉक्टर प्रजापति प्रसाद साह आइआइटी, कानपुर में अंगरेजी के प्रोफेसर थे। हाल ही में जब उनका निधन हुआ तो उस वक्त वहां...

जिंदगी की किताब

प्रतिभा कटियार विद्यालय यानी इंसानियत के पाठ पढ़ने, व्यक्तित्व के खुलने और खिलने की जगह… शरारतों की आजादी, पढ़ने-लिखने के प्रति प्रेम पनपने की...

विकास की परिधि

अजय के. झा सतत विकास लक्ष्यों के लिए वित्त पर बात करने के लिए तेरह से सोलह जुलाई तक इथियोपिया की राजधानी आदिस अबाबा...

जोड़े दिलों को

कुछ समय पहले ‘जिंदगी’ टीवी चैनल पर एक धारावाहिक देखते हुए कई बार ‘बुनियाद’ की याद ताजा हुई। 1980 के दशक के मध्य में...

सम्मानों की बौछार

कुछ समय पहले एक खबर आई थी कि लंदन की एक तथाकथित ‘प्रतिष्ठित’ संस्था इंटरनेशनल बायोग्राफिकल सेंटर ने इलाहाबाद शहर के अमर बंधुओं को...

कुर्सी की कसौटी

कुर्सी पा लेना जितना आसान है, उस पर कुशलता से बैठ पाना उतना ही कठिन। पद सभी चाहते हैं, लेकिन पद पर रहने का...

नाटक का नेपथ्य

मनोज कुमार नाटक को कला रूपों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसे रचते, संवाद बोलते, रंगमंच पर आंगिक और शारीरिक अभिनय करते हुए न...

बहुत काम है

अगर कार्यालयों के परिप्रेक्ष्य में इस वाक्य पर गौर किया जाए कि ‘बहुत काम है’, तो इसके साथ ही फाइलों का अंबार सामने आ...

गुड़ियों का संसार

किसी देश के बारे में जानकारियां जुटाने के कई तरीके हो सकते हैं। वहां के लोग, उनकी किताबें, बाजार, सिनेमा, संगीत। दिल्ली के ‘डॉल...

येलेना का स्टूडियो

यह नोवी साद है। सर्बिया का दूसरा बड़ा शहर। शहर के मुख्य चौक पर स्थित गैलरी पोदरम में मेरे कागज, कैनवस और कपड़े के...

कमलेश का न रहना

के. विक्रम राव कैसा इत्तिफाक है कि इन्हीं दिनों, चार दशक पहले कमलेश और मुझमें आत्मीयता प्रगाढ़ हुई थी। परिचय जॉर्ज फर्नांडीज की पत्रिका...

गांव का ठौर

सुधा मिश्र अपनी किशोरावस्था में एक कहावत अक्सर सुनती थी कि बच्चों को पढ़ाएं तो पढ़ाएं, नहीं तो शहर दिखाएं। अब इतने सालों के...

छूटना

राजकिशोर मानव जीवन में जितनी घटनाएं होती हैं, उनमें छूटना सबसे ज्यादा पीड़ादायक है। धार्मिक लोग बताते हैं कि एक दिन सभी कुछ छूटना...

कॉमरेड

अजेय कुमार मुझे मालूम था कि उन्हें कैंसर है। लेकिन मेरी इस जानकारी के बारे में उन्हें पता नहीं था। शायद इसीलिए अपने जीवन...

स्वच्छता और पवित्रता

विष्णु नागर मोदीजी के स्वच्छता अभियान के नतीजे पूरी तरह हमारे सामने आ चुके हैं। स्थिति वही की वही है। यों इस अभियान की...

पहचान खोते शहर

सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी पहले हर शहर की अपनी संस्कृति थी, पहचान थी; रिवाज था। हर चीज के मिलने का स्थान तय था। कपड़े, अनाज, गहने,...