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दुनिया मेरे आगे

किताबों का सिकुड़ता कोना

बीस बरस पहले जब मैं देश की राजधानी में आया था, तब दक्षिणी दिल्ली के वसंत लोक स्थित प्रिया सिनेमा हॉल के इर्द-गिर्द खूब...

बन्नो के बहाने

मुंबई उन दिनों बड़ी समृद्ध, बड़ी बख्तावर थी। उर्दू के कई लेखकों से सजी और हिंदी के कई दिग्गजों से पगी। यों लगता था,...

गायब होते गीत

उस दिन रसोई में काम करते हुए अचानक मेरे कानों में एक गीत की आवाज आई- ‘लल्ला लल्ला लोरी, दारू की कटोरी…!’ मैं ये...

कलक्टर की फाइल

तकरीबन बीस-बाईस साल पहले की बात है। स्थानीय पत्रकारिता में इतना दखल था कि शक्ल और नाम से लोग जानते थे। एक दिन तीन...

असहमति की जगह

अजीब-सी बात है। समाज हो या साहित्य, कहीं भी किसी से असहमत होना दिक्कतदेह हो सकता है। असहमत होने का मतलब है कि हुक्का-पानी...

मिट्टी के मोल

हाल में मध्यप्रदेश माटी कला बोर्ड द्वारा आयोजित मिट्टी की कलाकृतियों, बर्तनों की प्रदर्शनी में जाने का मौका मिला। इसी बहाने मिट्टी की याद...

अंधेरे कोने

अफगानिस्तान से पहली मुलाकात मां के जेहन में बसे किस्सों के जरिए हुई थी। बंटवारे के बाद पाकिस्तान की जमीन को दुखी मन से...

लोकतंत्र के आईने में

निवेदिता सिंह काफी जद्दोजहद के बाद हाल ही में आखिर मुझे भी मौका मिला अपने देश के लोकतंत्र के मंदिर को देखने का। उस...

सांध्यवेला में कुछ लिखना

अरुणेंद्र नाथ वर्मा नई पीढ़ी के उन विलक्षण प्रतिभासंपन्न बच्चों की खबरें, जिन्हें चार वर्ष की आयु में ही पूरी गीता कंठस्थ है या...

सरोकार के सामने

अमित चमड़िया पहले भी अक्सर नजर जाती थी, हाल ही में एक दिन फिर दीवार पर चिपके इस परचे पर नजर पड़ी- ‘किसी भी...

संसार के पार संसार

अलका कौशिक कुल्लू कभी ‘कुलूत’ था, यानी सभ्यता का अंतिम पड़ाव और मान लिया गया था कि उसके आगे संसार खत्म होता है। और...

सफर में स्त्री

सौम्या गुलिया यों मेरा घर राष्ट्रीय राजधानी से ज्यादा दूर नहीं है। लेकिन मेरे घर और दिल्ली के बीच चलने वाली लोकल ट्रेन के...

कुछ दिन नोवी साद में

यहां गंदगी नजर नहीं आती। सड़क पर कार और अन्य वाहन भी लोग बड़े सलीके से खड़ा करते हैं। किसी और को कोई भी...

विकास का सपना

हाल ही में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ इथियोपिया की राजधानी आदिस अबाबा में सिविल सोसाइटी संगठनों के एक बैनर के तहत आयोजित सम्मेलन...

अंधेरी राह

छह साल बाद गांव गया था। इतने दिनों में काफी कुछ बदल गया है। सीतामढ़ी का छोटा-सा रेलवे स्टेशन अब बड़ा बन गया है।...

गांधी का नाम

मौसमी बुखार को ‘वायरल’ भी कहते हैं। यानी ऐसा बुखार, जिसके एक से दूसरे व्यक्ति में फैलने का डर रहता है। मगर अब भाषण...

कांटों के बीच

एक रात सपने में देखा कि मेरी अचानक मौत का समाचार सुन कर मेरे बच्चे अपने-अपने काम से थोड़ी मोहलत लेकर मेरे गांव के...

परिधान के प्रतिनिधि

विष्णु नागर कोई क्या पहनता है, क्या नहीं, यह उसका व्यक्तिगत मामला है। नैतिकता के ठेकेदारों को हमेशा ठेंगा दिखाते रहना जरूरी है, जिनमें...