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दुनिया मेरे आगे

गांव में घर

सन 1974 में मैं उच्च शिक्षा के लिए अपने गांव से मुजफ्फरपुर के लिए निकला था। हाथ में टीन का बक्सा और कंधे पर...

सिकुड़ता संवाद

चिड़ियों के चहचहाने को ‘ट्विटर’ कहा जाता है और इसी से बना है ‘ट्वीट’। यानी चिड़िया तो ट्वीट करती ही है, अब इंसान भी...

सरोकार की संवेदना

पलायन की मार उत्तराखंड के गांवों में इस कदर पड़ी है कि नया राज्य बनने के बाद भी पलायन का क्रम रुका नहीं और...

बिन बरसे बदरा

बरसात लगभग चली गई। लेकिन इस बार बदरा पहले की तरह नहीं घिरे, न गरजे और न ही घुमड़ कर बरसे। अलौतियां भी ठीक...

सट्टा बाजार के बीच

न कभी सोचा, न ही कभी जेहन में था कि मैं शेयर बाजार में नौकरी करूंगा। नौकरी से पहले मुझे इतना भी पता नहीं...

शिक्षक के बिना शिक्षा

कुछ दिन पहले दिल्ली के बदरपुर में मैं एक बस में सवार हुआ। थोड़ी ही दूर आगे चलने के बाद ड्राइवर ने जैतपुर मोड़...

काम का समाज

अनीता हमारे परिचित के घर बचपन से काम कर रही है। वह हमारे घर भी काम करती है। उसे पीलिया हो गया था, जिसकी...

काश किताब खो जाती

मन के किसी कोने में आस थी कि शायद किताब मिल जाए। यह याद था कि प्रेम ने आईएनएस पर नींबू की चाय पीते...

काश किताब खो जाती

मन के किसी कोने में आस थी कि शायद किताब मिल जाए। यह याद था कि प्रेम ने आईएनएस पर नींबू की चाय पीते...

रिश्तों के पैमाने

बात थोड़ी पुरानी हो चली, मगर प्रसंग रोचक है, भारत में रह रही बासठ वर्षीय जेनिफर की सौतेली बहन इक्यासी वर्षीय रोएसाई से बीजिंग...

संवेदना के शहर

महानगरों की बात अब पुरानी हो गई। अब तो बाकी शहरों के बारे में भी इस तरह मिथक कायम हो गए हैं कि वहां...

बालहठ के नए तराने

उसे देख कर मुझे गुरु रवींद्रनाथ की कहानी ‘होमकमिंग’ की पंक्ति याद आई, जो चौदह वर्षीय बच्चे के विषय में कही गई है। वह...

वे पांच दिन

कुछ समय पहले दिल्ली के दो प्रमुख विश्वविद्यालयों और पश्चिम बंगाल के जाधवपुर विश्वविद्यालय में एक आंदोलन चला- ‘पैड्स अगेंस्ट सेक्सिज्म’। उद्देश्य था महिलाओं..

अहा जिंदगी

एक छोटे शहर से विस्थापित होकर इस महानगर दिल्ली में आ गया हूं। इन बहुमंजिला इमारतों के बीच एक फ्लैट में मेरी दुनिया सिमट...

छवि के बरक्स बनारस

यों ही नहीं कहते कि बनारस में रस घुला है। मस्ती, अल्फाजों में ‘गुरु’ और ‘राजा’ का संबोधन, तारीफ भी गालियों से करना, चाय...

लोकार्पण की माया

पुस्तक लोकार्पण की परंपरा की शुरुआत इस देश में कब हुई, इसके बारे में मुझे अभी तक कुछ विशेष जानकारी नहीं है। लेकिन संभवत:...

समाख्या की साथिनें

हमारी मुलाकात ट्रेन में हुई थी। पहली बार जब मैं उससे मिली तो वह बेहद डरी और जिंदगी से हारी हुई दिख रही थी।...

अश्लीलता के आयाम

हाल ही में राजग सरकार ने इंटरनेट पर अश्लीलता को काबू में करने के लिए गुपचुप तरीके से इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को आठ सौ...