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दुनिया मेरे आगे

बेरहम है यह सड़क

पिछले दिनों सड़क पर खूब राजनीति हुई, खूब बहसें हुर्इं। मगर मैं उस सड़क पर आपको नहीं ले जा रही।

दिखावे के महल

हाल ही में साढ़े सात सौ करोड़ का बंगला मीडिया की सुर्खियां बना। इसके पहले हमने साढ़े चार सौ करोड़ के बंगले की सुर्खियां...

संवाद की जुबान

हिंदी में ‘चलो’ कैसे बोलेंगे, वे लगातार इसका अभ्यास कर रहे थे। पहली बार में उनकी जुबान से कुछ अलग ध्वनि निकली तो गाइड...

पढ़ाई के पैमाने

आजकल की युवा पीढ़ी पढ़ने-लिखने में पिछड़ रही है, यानी भारत एक बेहतर राष्ट्र होने से पिछड़ रहा है।

सफर के साथी

कई लोगों से यह सुना-जाना है कि अमुक बस या ट्रेन के सफर में किसी परिवार या व्यक्ति से परिचय हुआ और वह परिचय...

परदेसी जुबान का प्यार

नाम उनका गोतो सान है। यहां के लिहाज से गोतो जी। जापान में किसी को उपनाम से बुलाने पर उसमें सान जोड़ते हैं, जैसे...

क्षमा और सहिष्णुता

क्षमा और सहिष्णुता के बीच जो अंतर्संबंध हैं, उनकी पहचान कठिन है और सुगम भी। पर उनको निजी व्यवहार में उतार लेना दुष्कर कार्य...

शब्दों का सफर

पैट्रिक फ्रेंच की किताब ‘लिबर्टी और डेथ’ के हिंदी अनुवाद की सूचना कुछ साल पहले ट्विटर पर आई थी। किताब का नाम बताया गया...

दर्जी का दुख

कुछ समय पहले मैंने उदयपुर से कमीज के लिए कपड़ा खरीदा था। सोचा कि अपनी मर्जी से सिलवा कर पहनूंगा।

मासूमित के दुश्मन

हमारा समाज इतना विकृत और रुग्ण हो गया है कि कोई बहुत जघन्य घटना भी हमें सिर्फ कुछ दिनों तक विचलित करती है।

गांव में घर

सन 1974 में मैं उच्च शिक्षा के लिए अपने गांव से मुजफ्फरपुर के लिए निकला था। हाथ में टीन का बक्सा और कंधे पर...

सिकुड़ता संवाद

चिड़ियों के चहचहाने को ‘ट्विटर’ कहा जाता है और इसी से बना है ‘ट्वीट’। यानी चिड़िया तो ट्वीट करती ही है, अब इंसान भी...

सरोकार की संवेदना

पलायन की मार उत्तराखंड के गांवों में इस कदर पड़ी है कि नया राज्य बनने के बाद भी पलायन का क्रम रुका नहीं और...

बिन बरसे बदरा

बरसात लगभग चली गई। लेकिन इस बार बदरा पहले की तरह नहीं घिरे, न गरजे और न ही घुमड़ कर बरसे। अलौतियां भी ठीक...

सट्टा बाजार के बीच

न कभी सोचा, न ही कभी जेहन में था कि मैं शेयर बाजार में नौकरी करूंगा। नौकरी से पहले मुझे इतना भी पता नहीं...

शिक्षक के बिना शिक्षा

कुछ दिन पहले दिल्ली के बदरपुर में मैं एक बस में सवार हुआ। थोड़ी ही दूर आगे चलने के बाद ड्राइवर ने जैतपुर मोड़...

काम का समाज

अनीता हमारे परिचित के घर बचपन से काम कर रही है। वह हमारे घर भी काम करती है। उसे पीलिया हो गया था, जिसकी...

काश किताब खो जाती

मन के किसी कोने में आस थी कि शायद किताब मिल जाए। यह याद था कि प्रेम ने आईएनएस पर नींबू की चाय पीते...