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दुनिया मेरे आगे

संवेदना का पक्ष

उस रात दो-ढाई बज गए थे। विभागीय मित्र, रंगकर्मी और आकल्पक राहुल रस्तोगी और एक रंगकर्मी मित्र अनूप जोशी बंटी सहित हम कुछ लोग...

सपने के बरक्स

रिम्मी संसद के भीतर प्रवेश करने से पहले कुछ नेताओं को नतमस्तक होते या मत्था टेकते देखती थी तो सोचती थी कि लोग ऐसा...

नौकर का बाथरूम

विष्णु नागर हमारा बेटा केरल में जिस फ्लैट में रहता है, उसके मालिक उसे अब बेचना चाहते हैं। मगर अभी तक इस कोशिश में...

पुस्तक संस्कृति

शैलेंद्र पिछले साल दिसंबर का आखिरी हफ्ता था। उस दिन सुबह के लगभग नौ बजने को थे। कोहरे की चादर अब भी पसरी हुई...

खरा बेला की थाली

बिंदु चौहान नई कहानी के दौर में सुदूर इलाहाबाद में बैठ कर किस्से-कहानियां गढ़ने वाले रचनाकार अमरकांत ने हिंदी कथा-साहित्य को नायाब कहानियां दीं।...

बादशाह का सूट

रागिनी नायक पहली बार जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपने ही नाम की पट्टी के साथ ‘मेड इन यूके’ वाले कई लाख के सूट...

शहर की शक्ल

पुरातन जीवन मूल्यों, पौराणिक-धार्मिक विश्वासों और इतिहास की गति को वापस ले जाने की कोशिश में लगी एक पार्टी के नेता के तौर पर...

चुनौती एक अवसर

अजय के. झा जहां पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर पर जलवायु संकट के प्रभावों से निपटने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिसंबर...

किताब की जगह

विष्णु नागर हम हमेशा पुराने होते रहते हैं और दुनिया हमारे चाहे-अनचाहे नई होती रहती है। इतनी ज्यादा नई कि उसे हर समय नए...

दुर्लभ सामान्य बोध

सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी विदिशा के कैलाश सत्यार्थी को शांति का नोबेल पुरस्कार मिला तो मध्यप्रदेश के कुछ मंत्रियों और विधायकों से पत्रकारों ने प्रतिक्रिया पूछी...

बर्फ में जिंदगी

निरंजन देव शर्मा बचपन कुल्लू में बीता। उन दिनों ठीक-ठाक बर्फ गिरती थी। उसके बाद पिछले सोलह वर्षों से कुल्लू में रह रहा हूं,...

रंगभेद की जड़ें

दीपक मशाल बात थी तो पुरानी, लेकिन लौट-लौट कर जेहन में आती और तकलीफ बढ़ा जाती थी। उस समय मैं दिल्ली के एक विज्ञान...

न चाकर को चाकरी

जब देश आजाद हुआ था तो पढ़े-लिखे लोगों की संख्या ज्यादा नहीं थी। इसलिए थोड़ा शिक्षित लोग भी सरकारी नौकरी पा जाते थे और...

सांध्य वेला में

शिव कुमार शर्मा न्यायमूर्ति एमसी छागला ने अपनी आत्मकथा का शीर्षक ‘रोजेज इन दिसंबर’ इस चिंतन के बाद दिया है कि दिसंबर वर्ष का...

भटके हुए राही

अजेय कुमार बेटे ने जब अपनी विदेशी मुसलिम मित्र से शादी करने का प्रस्ताव रखा तो मुझे शक था कि मेरे सगे-संबंधियों में इसका...

जनतंत्र की राह

संदीप जोशी आज दलीय राजनीति अपनी विचारधारा यानी ‘बेस’ को संवारने में लगी है और अपने चेहरे बदलने के लिए मजबूर हुई है। मूंगफली...

होनी अनहोनी

वे हमारे मित्र थे और उम्र में मुझसे काफी बडेÞ थे। कुछ समय पहले नब्बे साल की उम्र में उनका निधन हो गया। शोक...

प्यार की बोली

अरुणेंद्र नाथ वर्मा किसी टेलीफोन वार्तालाप के अंत में प्यार उड़ेलते हुए ‘लव यू, लव यू टू’ जैसे शब्द सबसे पहले अंगरेजी चलचित्रों में...