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दुनिया मेरे आगे

भागीदारी के बजाय

जनतंत्र सरकार की एक पद्धति, शासन का एक प्रकार और एक सामाजिक व्यवस्था के इतर भी बहुत कुछ है। लोकतांत्रिक व्यवस्था की अधिकतम सफलता...

बाकी शुभकामनाएं

जिस शहर में मैं रहता हूं, वहां आजकल बाकी लोगों की बात तो दूर, कुछ माफियाओं ने भी नए साल की शुभकामना वाले होर्डिंग...

छवि के पैमाने

किसी व्यक्ति को देखने के हमारे पैमाने क्या होते हैं? उसके बारे में हमारी धारणा कैसे तय होती है और इस राय पर उसका...

कद और पद

आइएएस होने या न होने के बीच एक बड़ी सामाजिक प्रतिष्ठा की खाई है। इसमें इस और उस पार के बीच वही अंतर हो...

कौशल बनाम जीवन

कौशल और जीवन के बीच जो संबंध हैं, उसके कई आयाम हो सकते हैं। किसी में दोनों का सीधा संबंध दिखाई पड़ता है तो...

हाशिये पर हंसी

इन दिनों लगता है, हंसी को हाशिये पर धकेला जा रहा है। अब यह जानबूझ कर हो रहा है या सहज भाव से हमारे...

रोब की भाषा

अन्य देशों में जो वैज्ञानिक क्रांति आई, वह वहां के मजदूरों और कारीगरों द्वारा लाई गई। उन्होंने काम करते समय अपनी जरूरतों के अनुसार...

प्रकृति के साए में

आज जरूरत है कि हम अपनी संवेदना को बचाए रखें। अपनी जिंदगी में इतने व्यस्त न हो जाएं कि हमारे बीच से प्रकृति के...

सिमटता सिनेमा

पिछले कुछ वर्षों में ‘मॉल-संस्कृति’ ने शहरों-महानगरों में जबर्दस्त धावा बोला है। मॉल के भीतर पांच-छह स्क्रीन वाले महंगे सिनेमा हॉल खोल दिए गए।...

पहाड़-सा दुख

दुख हर इंसान की शिराओं में बहता है, रग-रेशे में सुलगता रहता है। पर इसकी आंखों में झांकने से भी डर लगता है। जितना...

बढ़ती उम्र का अहसास

बढ़ती उम्र का असर सभी पर होता है। फर्क इतना होता है कि किसी पर कम, किसी पर कुछ ज्यादा और किसी पर कुछ...

नदी का जीवन

कुछ समय पहले दिल्ली के यमुना पर बने एक पुल से गुजरते हुए जब पानी का रंग लगभग काला-सा दिखा तो लगा कि शायद...

खाली वक्त के मारे

आज बढ़ती आबादी के बीच जीवन जीने और कुछ करने की चुनौती जैसे-जैसे बढ़ी है, वैसे-वैसे रोजगार के मौके भी कम होते गए हैं।...

सुर्खियों के बरक्स

खबरें सुर्खियों में है कि अयोध्या में राजस्थान से पत्थरों की खेप नए शिविर में पहुंच गई है। फिलहाल इस पर मंदिर निर्माण समिति...

टूटती बेड़ियां

सऊदी अरब में राजशाही है और वहां के सख्त नियम-कायदों के बीच महिलाओं का चुनाव जीतना एक बड़ी कामयाबी है। इसलिए निश्चित रूप से...

नारों के नाम पर

जब किसी भी सत्ता के खिलाफ जनता आवाज उठाती है या दो पक्षों को अपने बीच में चुनावी फैसला करना-कराना होता है तो नारे...

दोहरी जिम्मेदारी का वक्त

समाज सामुदायिक भावनाओं की वह इकाई है, जिसके व्यापकता ग्रहण करने पर राष्ट्रीय स्वरूप सामने आता है। सामाजिक संदर्भों में समाज की रचना एक...

परंपरा का जीवन

काफी पहले ग्रामीण भारत में मेलों के दौरान अक्सर स्त्री-पुरुष अपने हाथों पर नाम या विभिन्न आकृतियां गुदवाते थे जो शायद खो जाने की...