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दुनिया मेरे आगे

सफर का समाज

हम अपने दैनिक जीवन में घटने वाली कई घटनाओं या वाकयों को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि वे एक बड़ा संदेश अपने साथ लिए...

मौत के बाद देह

मौत के जिक्र से ही रीढ़ में दहशत रेंगती है। इसके बारे में किसी तरह की चर्चा को भी हमने रोजमर्रा की जिंदगी से...

बदलाव की बयार

धीरे-धीरे ही सही, लेकिन बदलाव की बयार महाराष्ट्र के गांवों में बह रही है। ठाणे के देहना और आसपास के कुछ गांवों में दिवाली...

आभाषी दुनिया की भाषा

अपने कॉलेज में विद्यार्थियों की अंग्रेजी में लिखी उत्तर पुस्तिका जांचते हुए कई दिलचस्प बातें सामने आर्इं।

अभिव्यक्ति के आभाषी मंच

अभिव्यक्ति और उसकी हड़बड़ी पर किसी और का नियंत्रण नहीं होता।

बदलती छवि का पर्दा

समाज के दो किरदारों के तौर पर किसी स्त्री और पुरुष की कहानी जब भी सामने आती है तो उसमें नायक आमतौर पर पुरुष...

दिखावे के समारोह

बीते दिनों राजधानी में दो शाही शादियों की दावत दी गई। पहली क्रिकेट खिलाड़ी हरभजन सिंह की अपनी मित्र गीता के साथ शादी की...

जीवन के लिए जद्दोजहद

सड़क किनारे उस छोटी-सी इमारत के एक कमरे के बाहर दीवार पर लिखा था- ‘लोहार की दुकान’। वह छोटा कमरा र्इंट से कमजोर तरीके...

तारों की दुनिया में

हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक नया वीनस या शुक्र ग्रह खोजा है। यह हमारी धरती से उनतालीस प्रकाश वर्ष दूर है। विज्ञान की...

शिक्षा का समाज

पिछले दिनों गांव जाना हुआ तब पता चला कि शहरी सभ्यता का जामा ओढे़ बहुत सारे लोग कुछ मायने में ग्रामीण इलाकों में रह...

अभाव का जीवन

अमूमन सभी शहरों-महानगरों में हाथ फैलाए खड़े कई बच्चों पर लोगों की नजर लगभग हर रोज जाती है। सेल्फियों के जरिए लोगों द्वारा उनकी...

जीवन के मूल्य

किसी भी इंसान के जीवन में मूल्यों का अहम योगदान रहता है क्योंकि इन्हीं के आधार पर अच्छा-बुरा या सही-गलत की परख की जाती...

तेजाब का दंश

कुछ ही दिन पहले बनारस में रूस की एक महिला पर एक युवक ने तेजाब फेंक दिया, क्योंकि वह उसकी मर्जी के खिलाफ अपने...

दिखावे का रोग

हमारा भारत फिलहाल एक विकासशील देश है, लेकिन तेजी से आगे बढ़ता हुआ भी। लेकिन सच यह है कि आज भी हमारे देश में...

दरारों का क्या काम

ठीक ही यह माना जाता है कि यह दायित्व माता-पिता का ही है कि वे अपनी संतान में ‘साझा’ करने का संस्कार डालें। अगर...

विवेक की जगह

भागती-सी जिंदगी में आज इंसान और उसके बदलते परिवेश में सब चीजें तेजी से बदल रही हैं। सामाजिक मेल-मिलाप अब सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर...

मिठास के मायने

कार्तिक महीने की सिहराती हुई उस सुबह उठ कर बालकनी में जाकर अखबार उठा कर सामने देखा, नजर पड़ी धूसर धुएं में खड़ी किसी...

पर्व और पर्यावरण

आजादी से पहले हममें से ज्यादातर लोग अनपढ़ थे, लेकिन समाज और देशहित के बारे में भली-भांति जानते और मानते थे। कोई भी काम...