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दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगे: सुनने की संवेदना

कई साल हो गए स्कूल छोड़े। जब पीछे मुड़ कर देखती हूं तो आज भी स्कूल का वह पहला दिन याद हो आता है...

दुनिया मेरे आगेः संस्कृति की राह

शोरशराबे, चकाचौंध, दंभ और पाखंड ने धर्म की अवधारणा को बिगाड़ कर रख दिया है। यह समझना मुश्किल है कि जो लोग जिस तरह...

दुनिया मेरे आगेः कहने की कला

यहां जब हम कहानी की बात कर रहे हैं तो वह एक अकादमिक कथाकार और उपन्यासकार की कहानी से हट कर अन्य कहानियों की...

दुनिया मेरे आगे: रुचियों का पाठ

स्कूल या कक्षा में जब तक पहला हक शिक्षक का होगा, तब तक बच्चे स्कूल आने को एक बोझ की तरह ही निभाएंगे। जब...

दुनिया मेरे आगे: शहर का दूसरा छोर

जिंदगी के मायने, आम धारणाएं, समाज, मान्यताएं, लोग, गली, चबूतरे, बवाल, पड़ोसी, थकान, रिश्ते, विवशताएं, प्यार, संबंध, जुड़ाव, स्त्री-पुरुष, बेटा-बेटी, पति-पत्नी, रोजमर्रा के...

दुनिया मेरे आगेः ठहरा हुआ अतीत

राजस्थान के सबसे आखरी छोर पर स्थित बांसवाड़ा में काम करने के दौरान मैंने सुबह-सुबह शहर और गांव के बच्चों को छोटी-छोटी टोलियों में...

दुनिया मेरे आगेः कितनी परतें

एक मां का महत्त्व इसीलिए ज्यादा समझा जाता है, उसके प्रति अपनी भावनाएं प्रकट की जाती हैं कि अपने बच्चों और परिवार के लिए...

दुनिया मेरे आगे: फूल और कांटे

एक स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए हमें प्रेम जैसे विषयों पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है। सिर्फ कविता और कहानियों में नहीं,...

दुनिया मेरे आगे: बदलता परिवेश

आज की पीढ़ी के सामने सबसे बड़ा संकट उस प्रकाश स्तंभ की अनुपस्थिति है, जिसमें ऊर्जा देने की क्षमता हो। परिवार, परिवेश, समाज, राजनीतिक...

दुनिया मेरे आगे: गुणवत्ता का पाठ

शिक्षकों के साथ समय-समय पर बैठकें आयोजित करना एक अच्छा विचार है। इन बैठकों के दौरान स्कूली स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों...

दुनिया मेरे आगे: मौत के सीवर

ये कानून और आदेश न केवल हाथ से मैला साफ करने वालों की मुक्ति की बात करते हैं, बल्कि दूसरे कार्यों में रोजगार मुहैया...

दुनिया मेरे आगेः बचे हुए लोग

जब हम किसी शहर से लौट चुके होते हैं और बाद में कभी उस शहर को याद करते हैं तो सबसे पहले याद आते...

दुनिया मेरे आगेः समझ के पैमाने

हाल ही में एक रिश्तेदार द्वारा भेजे गए शादी के कार्ड पर मेरी नजर पड़ी। उस पर कार्यक्रम की जानकारी के साथ यह लिखा...

दुनिया मेरे आगे: बाजार के पांव

विवाह में दूसरी महत्त्वपूर्ण वस्तु है वस्त्र, जो खूब शौक से ढूंढ़ कर खरीदे जाते हैं, मगर विवाह संपन्न होते ही संभाल कर रख...

दुनिया मेरे आगे: हिंदी का जीवन

Hindi Diwas 2018: हिंदी की विपन्नावस्था को लेकर रोना रोया जा रहा है, लेकिन उसे रोजगार और पेट की भाषा बनाने पर कोई तवज्जो...

दुनिया मेरे आगे: विपदा के बाद

केरल के उजड़े घर फिर बसेंगे। जिनको किसी भी तरह की क्षति पहुंची है, वे उबरेंगे। हां, ऐसा होगा। पर समय तो लगेगा। और...

दुनिया मेरे आगेः धारणाओं का सिरा

जब भी टीवी के पर्दे पर किसी मदरसे का चित्रण आता है तो उसमें यह दिखाया जाता है कि बच्चे सिर पर टोपी पहने...

दुनिया मेरे आगे: बुजुर्गों की जगह

घुटनों में दर्द से परेशान व्यक्ति से डॉक्टर ने उसकी उम्र पूछी थी। व्यक्ति ने अपनी उम्र बताई। डॉक्टर ने कहा, इस उम्र में...