दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगेः कामयाबी की कसौटी

थोड़ी गहराई से नजर डालें तो इस विमर्श में सफलता का मूल अर्थ कभी बदला ही नहीं, बल्कि उसे थोड़ी दूर ले जाकर रख...

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दुनिया मेरे आगेः संवेदना की जगह

मुझे जाने क्यों लगता है, एक लोक हितकारी शासन-प्रशासन के लिए आम कायदा है आम जनता के अच्छे सुझावों का आमंत्रण। मगर आज के...

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दुनिया मेरे आगेः परदे और पन्ने का फर्क

दक्षिण भारत के बीरबल तेनालीराम से परिचय ‘चंदामामा’ ने ही कराया था। उसमें सचित्र छपी विक्रम और बेताल की अनूठी कहानियां अपने पौत्र-पौत्रियों को...

दुनिया मेरे आगे: अच्छा बनाम बुरा

अच्छाई अपने आप में हम सबके जीवन का साध्य है। बुराई के साधन से अच्छाई को हासिल करने की पहल करना यानी अपनी जीवनी...

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दुनिया मेरे आगे: विभाजित सपने

आमतौर पर एक सुदृढ़ देश में साठ साल के बाद व्यक्ति को पेंशन आधारित जीवन जीने का हक होना चाहिए। विडंबना यह है कि...

दुनिया मेरे आगे: घरेलू हिंसा के बीज

घरेलू हिंसा इंसान को भीतर तक घायल कर देती है, मानसिक तौर पर बीमार बना देती है, जिसका अहसास पीड़ित व्यक्ति को काफी समय...

दुनिया मेरे आगे: कहने का सलीका

न कहने के अपने तर्क हो सकते हैं। पर देखने की बात यह है कि न कैसे और क्यों कहा गया। इसके लिए स्थान...

दुनिया मेरे आगे: खुदकुशी की कड़ियां

हमारे यहां संयुक्त परिवार थे। एक-दूसरे से गुंथे-उलझे घर के सदस्य! सुख-दुख में एक साथ! गमी-कमी में एक साथ! सुख-सुविधाओं के अभाव में भी...

दुनिया मेरे आगेः पढ़ाई के पैमाने

दरअसल, ‘होम स्कूलिंग’ का अर्थ है बच्चों को स्कूल के अलावा घर पर या दूसरी अनौपचारिक जगहों पर माता-पिता या निजी स्तर पर किसी...

दुनिया मेरे आगे: क्या चल रहा है

सृष्टि का सारा वजूद चलने की प्रक्रिया के कारण कायम है। प्रकृति का संतुलन सौरमंडल की चाल पर निर्भर है। दिनमान, ऋतुचक्र और इंसान-...

दुनिया मेरे आगे: पितृसत्ता की परतें

जब तक हम ऐसी सोच और मानसिकता नहीं बदलेंगे यह समाज भी नहीं बदलेगा। बलात्कारी का विवाह तक रचा दिया जाता है, जिसके साक्षी...

दुनिया मेरे आगे: सुरक्षा का सफर

यातायात नियम एकाएक नहीं सिखा सकते। इसकी शुरुआत पाठशाला स्तर से होनी चाहिए। कोमल मन पर अच्छे और बुरे की पहचान जल्दी छपती है।...

दुनिया मेरे आगे: सपनों की जमीन

सवाल है कि क्या आजादी के दिन राष्ट्रध्वज फहरा लेने, गांधी, सुभाष, नेहरू और पटेल आदि स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों के चित्रों पर माल्यार्पण...

दुनिया मेरे आगेः सभ्यता के विरुद्ध

हाल ही में हिरोशिमा और नागासाकी में परमाणु बम गिराने की घटना को पचहत्तर साल बीते। द्वितीय विश्व युद्ध के इस मंजर को जिसने...

दुनिया मेरे आगेः दोस्ती का दायरा

कुछ दशकों पहले पुरुष की मित्रता पुरुष के साथ और स्त्री की मित्रता स्त्री के साथ ही होती थी! एक पुरुष और एक स्त्री...

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दुनिया मेरे आगे: बोझ का हासिल

सही है कि हरेक माता-पिता यह चाहते हैं कि उनके बच्चों का भविष्य स्वर्णिम हो और उनके बच्चे ऐसा मुकाम हासिल करें जो उनके...

दुनिया मेरे आगे: मधुर गूंज की याद

कोयल का कूकना और आम का मौसम, ये एक महज संयोग हैं। यों कोयल का भोजन आम नहीं है। हालांकि अंतर्संबंध की तलाश मानवीय...

दुनिया मेरे आगे: स्वार्थ का समाज

इसमें कोई दो राय नहीं कि समय के साथ सामाजिक व्यवस्था और परंपराएं भी बदली हैं। ऐसे में लोगों की मानसिकता में भी अगर...

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