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दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगेः बचपन का खेल

कट्टी...कट्टी...कट्टी! एक बच्चे ने दूसरे से कहा और उनकी दोस्ती खड़े-खड़े खत्म हो गई। अब दोस्ती हैरान है कि अचानक से यह क्या अबोला...

दुनिया मेरे आगे- पढ़ाई की लड़ाई

किसी भी राष्ट्र का पूर्ण विकास तभी संभव है जब उसकी पुरुष आबादी के साथ-साथ बाकी आधी आबादी यानी महिलाओं को भी उनके सभी...

दुनिया मेरे आगेः निराशा के भंवर में

इंदौर में एक बड़े कोचिंग इंस्टीट्यूट के साइनबोर्ड पर नजर ठिठक गई। यूपीएससी, पीएससी के मुकाबले ज्यादा मोटे हर्फों में पटवारी की परीक्षा की...

दुनिया मेरे आगेः इस निर्मम समय में

एक मित्र ने पिछले दिनों दुखी होकर बताया कि आजकल उनके पिता को रात को ठीक से नींद नहीं आती। वे अक्सर उदास रहने...

दुनिया मेरे आगे- सऊदी अरब में योग

झारखंड में योग सिखाने वाली राफिया नाज को जान से मारने की धमकी मिलती है। उनके खिलाफ मौखिक फतवा जारी होता है और उनके...

दुनिया मेरे आगे- छीजते अहसास

बढ़े खर्च पर वे कहते थे कि बाप की नहीं, जब खुद की कमाई से खर्चोगे तब समझ में आएगा कि पैसे कित्ती मेहनत...

दुनिया मेरे आगे- सड़क पर हक

कई दिन के बाद सब्जी वाला लड़का एक दूसरी सोसायटी के फुटपाथ पर दुबका-सा अपने ठेले के साथ मिला। ‘क्यों क्या हुआ, सब लोग...

दुनिया मेरे आगे- बाल साहित्य मेला

भरत-मिलाप से लेकर रामलीला और धनतेरस के कई मेले लगते थे। धीरे-धीरे हम ‘बड़े’ होते गए और हमारे जीवन में इन आनंद के मेलों...

दुनिया मेरे आगेः बाजार का शिकंजा

अभी दिल्ली में धुंध क्या छाई, तमाम कंपनियों के पौने बारह हो गए। वायु प्रशोधक उपकरणों (एअर प्योरीफायर) की कंपनियों के प्रचार संदेशों की...

दुनिया मेरे आगेः अपने आसपास

जिंदगी हम सिर्फ खुद के साथ नहीं जीते हैं, यह तो तय है। हमारे इर्द-गिर्द के लोग, परिवार-दोस्त के साथ साथ कई बातें-लम्हे-किताबें और...

गिरजाघर के भीतर इतिहास

अब सेंट मेरी गिरजाघर के चारों तरफ चहारदीवारी का निर्माण हो गया है। इससे गिरजाघर की मुख्य इमारत का सौंदर्य बाधित हो रहा है।...

श्रम के स्वर सुहावन

देर तक बिछावन पर बैठी नारियल की तिल्लियों से बनी झाड़ू से बुहारे जाते आंगन से एक विशेष लय में बनते स्वरों को सुनती।...

दुनिया मेरे आगे- दीन मीन बिन पंख के

देश की राजधानी दिल्ली का मौसम इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है। धुंध में लिपटी दिल्ली किसी को सुहा नहीं रही।

दुनिया मेरे आगे- किताब बनाम रिमोट

मेरे पड़ोसी के आठ और ग्यारह वर्ष के दो बेटे हैं। अकसर उनके पिटने और चीखने-चिल्लाने की आवाजें मेरे घर तक सुनाई देती...

दुनिया मेरे आगेः जो बात मेरे शहर में है

मेरे जीवन का लंबा समय पटना में ही बीता है। और लगता है जीवन के आखिरी दिन भी यहीं बीत जाएंगे। पापा नौकरी में...

दुनिया मेरे आगेः पंछियों का आकाश

हमारी पीढ़ी जो अब सत्तर-पचहत्तर के पार है, बचपन से ही आकाश में पंछियों को देखने की आदी रही है।

दुनिया मेरे आगे- गुरुओं का जमाना

मेरे दो मित्र मेरे साथ ही रहते हैं, वे चुपचाप थे। दोनों एक-दूसरे की मौजूदगी से अनजान इंटरनेट की आभासी दुनिया के रसास्वादन में...

दुनिया मेरे आगे- बेतुकी बहसें

सोशल मीडिया के खेल निराले हैं। यहां कब कौन-सा मुद्दा गेंद की तरह हवा में उछल कर वायरल हो जाए, कोई नहीं जानता। वायरल...