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दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगे: जाल, पाल, चप्पू और नावें

मछुआरे इतने सवेरे ही अपने जाल, पाल, चप्पू और खाने का सामान नावों में लाद कर ‘सागर यात्रा’ पर जाने की तैयारी करने लगे...

दुनिया मेरे आगे: मूल्यों की शिक्षा

प्राचीन समय में हमारे देश में शिक्षा के लिए गुरुकुल या आश्रम होते थे और वहां विद्यार्थी दैनिक जीवनचर्या में बुनियादी मानवीय मूल्यों की...

दुनिया मेरे आगे: वंचित बचपन

उस दिन से सोच रही हूं कि ये बच्चे जीवन के उतार-चढ़ावों को कैसे झेल पाएंगे जो इतनी छोटी उम्र में ही खुद को...

दुनिया मेरे आगे: स्त्री का घर

समाज ने अपने ढांचे में औरत को सबसे निरीह बना रखा है और उसकी इसी निरीहता को उसकी महानता के रूप में पेश करता...

दुनिया मेरे आगे: रिश्तों के धागे

विडंबना यह है कि ऐसी खबरों को पढ़ कर शायद अब हमारे रोंगटे भी नहीं खड़े होते, क्योंकि अब यह रोजमर्रा की बात हो...

दुनिया मेरे आगे: मकड़जाल में जीवन

पिछले कुछ महीनों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह चिंता घनीभूत हुई है कि स्मार्टफोन का अतिशय प्रयोग जहां एक तरफ हमारी गर्दन,...

दुनिया मेरे आगेः सुधार की राह

मनुष्य की प्रवृत्ति होती है बहाव के साथ चलना। ऐसे लोगों से किसी नए काम की आशा नहीं की जा सकती है। लेकिन जो...

दुनिया मेरे आगेः अपनेपन की जमीन

देश के अलग-अलग हिस्सों में कई वजहों से लोग अपनी जन्मभूमि छोड़ रहे हैं। कहीं गरीबी से तंग आकर, कहीं बढ़ती आपराधिक घटनाओं से...

दुनिया मेरे आगेः सीखने का जश्न

सफलता के सही अर्थों में जाएं तो यह वह अनुभूति है जो किसी व्यक्ति के लक्ष्यों के परिणाम के तौर पर है और उस...

दुनिया मेरे आगेः उजड़ते आशियाने

खरगोश मुलायम-सा अहसास देने और प्राकृतिक परिवेश में रहने वाला जीव है। कुछ साल पहले कुल्लू की वादियों में एक खरगोश सफारी में बहुत...

दुनिया मेरे आगे: सड़क पर पन्ने

बेहद अपनी-सी लगती है यह सड़क, पर यह बुनता हुआ खयाल एकदम से टूट जाता है। जैसे ही यह भान होता है कि इस...

दुनिया मेरे आगे: कित्ता कित्ता पानी

कुछ देश तो इस विषय में काफी आगे बढ़ गए हैं। इस संदर्भ में इजराइल का नाम लिया जाता है। वहां समुद्र के जल...

दुनिया मेरे आगेः मशविरा उस्ताद

कुछ लोग हैं जो समझते हैं कि वे हर चीज के बारे में दूसरों से अधिक और बेहतर जानते हैं। ऐसे लोगों को क्या...

दुनिया मेरे आगे: सफर में आजादी

दुखद है कि एक संप्रभु देश में आजादी के छिहत्तर साल बाद भी भावी पीढ़ी के एक बड़े हिस्से के लिए आजादी का जश्न...

दुनिया मेरे आगेः संज्ञान सुरभि

संज्ञान शब्द की ताकत का मुझे अंदाजा नहीं था। जब हुआ तो हैरान रह गया। यानी एक बड़ी दुर्घटना, जो सहज ही भुला दी...

दुनिया मेरे आगेः झांसेबाजों की दुनिया

किसी को झांसा देने के पहले अपनी आत्मा को झूठ की चादर से ढंक देना होता है। आत्मा कुलबुलाती है, क्योंकि उसे हमेशा सच...

दुनिया मेरे आगे: अंधविश्वास की गिरफ्त

यह एक सहज और स्वाभाविक बात है कि ज्यादातार लोगों को किसी न किसी तरह का दुख-तकलीफ रहता ही है। शायद ही कोई...

दुनिया मेरे आगे: ‘मैं’ की बुनावट

मैं को अक्सर अहंकार का पर्याय भी माना जाता है। यह चतुर होता है और सूक्ष्म भी। इसकी तुलना अक्सर तिलचट्टे के साथ की...