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दुनिया मेरे आगे

यायावरी का पाठ

कहते हैं कि ज्ञान बस किताबें मात्र नहीं होती हैं, यात्रा उससे हजार गुना बड़ा महाकाव्य है, जिसे हम बांचते हैं और उसमें शामिल...

बेटियों की जगह

बेटियों को आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना ही एकमात्र उद्देश्य होना चाहिए, न कि यह सोच कि उनके आत्मनिर्भर या स्वावलंबी बनने...

बितले चइतवा हो रामा

रामजन्म से उल्लसित चैता और प्रिय के सान्निध्य में हुलसती चैती, दोनों जल्दी ही खेत-खलिहान के निष्ठुर सत्य से जूझेंगे। धीरे-धीरे चैत्र की बयार...

तरु की छाया में

कई संस्थाओं ने समारोहों में स्वागत-सम्मान के अवसर पर भेंट दिए जाने वाले फूलों के गुच्छे की जगह पौधे उपहार में देने की सुंदर...

दुनिया मेरे आगे: अवसाद के पांव

ऐसे तमाम लोग हैं जिनकी जिंदगी में ऐसे पल आते हैं, जब वे अवसाद में चले जाते हैं या आत्महत्या जैसे खयाल मन में...

दुनिया मेरे आगे: खौफ की दुनिया

अपराध में डूबे ऐसे मनचलों की यौवन-वितृष्णा ने स्त्रियों का हमेशा ही शोषण कर उनकी जुबान पर ताला जड़ने का काम किया है। देवालयों...

दुनिया मेरे आगे: अंकों का बाजार

यह सच्चाई कड़वाहट से भरी हुई है, क्योंकि इसमें मानवीय मन-मस्तिष्क की उन तमाम संभावनाओं की अंतिम सीमा रेखा दिखाई देती है, जिससे...

दुनिया मेरे आगे: सफर में देश

1957 में शिमला की उस वृक्षों से आच्छादित मुख्य सड़क वाला एक दृश्य भुलाए नहीं भूलता जब मुझे देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल...

दुनिया मेरे आगे: उम्मीद का जीवन

तेजी से बदलते सामाजिक-आर्थिक परिवेश में विद्यालय और महाविद्यालयों में ऐसे पाठ आमतौर पर कम ही पढ़ाए जाते हैं, जहां वर्तमान और भविष्य के...

प्रतिभा की पहचान

विश्व में करीब आठ सौ करोड़ आबादी में किसी भी दो व्यक्ति के चरित्र और गुणसूत्र आपस में नहीं मिलते। यही कारण है कि...

दुनिया मेरे आगे: भूलते भागते क्षण

मोबाइल तकनीक और गैजेट्स के शौक ने बड़ों को ही नहीं, बच्चों को भी अपनी गिरफ्त में ले रखा है। बड़ों के सिर से...

दुनिया मेरे आगे: सितारों की चमक

आज बच्चे सौ में से सौ अंक ला रहे हैं और शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को इस पर विचार करना जरूरी नहीं लग...

दुनिया मेरे आगे: जीवन की राह

छोटी-छोटी गलतफहमियां हमारे जीवन को बाधित कर सकती हैं। इसलिए जीवन को नया आगाज देने के लिए यह जरूरी है कि हम इनसे दूर...

दुनिया मेरे आगे: सृजन का दायरा

संभवत: इसका एक कारण यह भी हो कि इंटरनेट की दुनिया में अभी सही मायने में समाजवाद नहीं आया है। बहरहाल, सोशल मीडिया और...

दुनिया मेरे आगे: परंपरा के विद्रूप

हमारे समाज में लड़कियों को यह अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। उन पर जाति को टूटने से बचाए रखने की जिम्मेदारी है। वह जाति...

संप्रेषण के तार

आज स्थिति यह है कि ट्रेन के कूपे में बैठा आदमी यात्रा समाप्त होने तक एक दूसरे से एक शब्द भी नहीं बोल पाता।...

दुनिया मेरे आगे: स्वार्थ के रिश्ते

अब अगर किसी भाई को तकलीफ होती है तो दूसरे भाई को याद कर लिया जाता है और बाद में भुला दिया जाता है।...

दुनिया मेरे आगे: सुंदरता के पैमाने

कुछ समय पहले आइआइटी में पढ़ने वाली एक लड़की के आत्महत्या करने की खबर आई। कारण था कि वह मोटी थी और इसके लिए...

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