दुनिया मेरे आगे

Human
सुविधा की संवेदनाएं

विद्यार्थियों को पढ़ाना सदैव सुखद अहसास देता है। खासतौर पर कॉलेज में पढ़ाते हुए हम युवाओं की सोच से भी अवगत रहते हैं।

kala
निरंतरता का प्रवाह

अतीत का जीवित अंश उसे वर्तमान से जोड़ता है और जब वर्तमान अतीत हो जाता है तो उस अतीत का जीवित अंश उसे भविष्य...

Evening
हरी-हरी दूब पर

गर्मी ने अपनी आहट दे दी है। कुछ दिनों बाद लोग इससे बचने के नुस्खों पर अमल करना शुरू कर देंगे।

Festival of Colours
राग-रंग

फागुन में और विशेषकर होली में राग और रंग दोनों शिखर पर होते हैं। यही हमें रंगों की सुध दिलाता है। फागुन की...

Dunia mere aage, Holi, Mathura
रंगों से अनुराग

बचपन में रंगों में डूब कर होली मनाने का आनंद ही कुछ और था। अब हम बड़े हो गए हैं, इसलिए वह लड़कपन नहीं...

Boy
गम, गुड़िया और साथी

कितने सारे खिलौने थे। एक खिलौने में एक ढोल बजाता बंदर था, तो दूसरे में पहियों के सहारे चलने वाला घोड़ा। तीसरे को छुक-छुक...

dunia mere aage
इंद्रधनुषी सौंदर्य

रंगों की सुंदरता तो उसके नैसर्गिक रूप में ही है। इनके बीच वैमनस्य पैदा कर प्रतिस्पर्धा कराने का हक हमें नहीं हो सकता, क्योंकि...

Genious
नेपथ्य में छिपी प्रतिभाएं

पिछले दिनों ग्रामीण क्षेत्र की एक सरकारी स्कूल के वार्षिकोत्सव में भागीदारी का मौका मिला।

house hold
भविष्य की फिक्र में

कभी-कभार अपनी कई पुरानी चीजों को निकाल कर देखती हूं तो मन प्रफुल्लित हो उठता है।

मामूली गलतियों का हासिल

विवाह के बाद पहले दिन वधु ने वर को दूध से भरा गिलास दिया। वर ने ज्यों ही दूध हलक में डाला, उसकी सांसें...

Neglection, disrespect
उपेक्षा का दंश

हमारे मोहल्ले के एक काका बुजुर्ग हुए तो कब परिजनों ने उन्हें वृद्धाश्रम में भेज दिया, हमें पता ही नहीं चला। एक दिन उनके...

pupet
हाशिये से बाहर

चौराहों पर लाल बत्ती होने पर वह छोटा लड़का सड़क पर कलाबाजियां खाता है। एक छोटे-से लोहे के छल्ले से अपना शरीर निकाल लेता...

peason
विविधता का जीवन

सुबह-सुबह जब जाकर बाहर आया तो कबूतर मेरे कमरे के रोशनदान पर चहलकदमी कर रहा था।

Literature
चिठिया हो तो…

वक्त के साथ कैसे सब कुछ इतना बदल जाता है कि एक दौर में सबके लिए सबसे जरूरी चीजें बेमानी हो जाती हैं।

crime against
मृत संवेदनाओं के ढांचे

कई बार यथार्थ पर विश्वास नहीं करने का मन करता है। कई बार यथार्थ घटनाएं किसी काल्पनिक सिनेमा के दृश्य की तरह आंखों के...

Road
वक्त का हिसाब

टीवी धारावाहिक महाभारत के सूत्रधार की गंभीर आवाज में कहे गए शब्द ‘मैं समय हूं’ को कौन भूल सकता है।

culture, society, women life
दायरे में प्रगतिशीलता

हर क्षेत्र में अपना डंका मनवाने वाली स्त्री के लिए क्या जरूरी है कि वह बताए कि वह किसकी पत्नी है? एक सफल पुरुष...

samaj
बचपन के नाम

कुछ दिन पहले शाम को घूमते हुए मुझे किसी ने आवाज दी- ‘मैयू’। मैं आश्चर्य में पड़ गया। यह मेरे बचपन का नाम है।

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