ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे

दुनिया मेरे आगे: डर के आगे

असफलता का डर, लोगों के हंसने का डर, दूसरों की नजरों में बेहतर साबित न हो पाना आदि ऐसे आम डर हैं जिनसे हम...

दुनिया मेरे आगे: तर्क का हिसाब

कुछ समय पहले एक स्कूल में मैं शिक्षकों से ही बातचीत कर रही थी। काफी देर बात होने के बाद उन्होंने कहा कि कुछ...

दुनिया मेरे आगे: छवियों के संबंध

माजशास्त्री मकाइवर और चार्ल्स पेज ने समाज को संबंधों के संजाल के रूप में परिभाषित किया है। समूचा जीवन ही संबंधों के दायरे में...

दुनिया मेरे आगे: तर्कशीलता की दुनिया

समाजीकरण की प्रकिया से अलग रहने और तर्क की कसौटी पर कसने वाले कौशलों का अभाव होने के कारण इन बच्चों को परीक्षाओं की...

दुनिया मेरे आगे: बचपन की गलियां

गरमी की छुट्टियों में नानी के घर जाने का मौका साल-भर इंतजार के बाद आता था। स्कूल बंद होते ही हम मां और पिताजी...

दुनिया मेरे आगे : प्रेम का समाज

देश के कुछ हिस्सों और सामाजिक तबकों के बीच विवाह के लिए स्वतंत्र तरीके से साथी के चुनाव की परंपरा है। लेकिन जनजातीय समुदायों...

दुनिया मेरे आगे : पूर्वग्रहों का घेरा

दरअसल, समाज में मौजूद अनेक विषमताओं और उनसे जनित अन्यायों को सहज-स्वीकार्य बना कर लोगों के जीवन का हिस्सा बनाने में ऐसी ही कई...

दुनिया मेरे आगे: बदलते परिदृश्य में बच्चे

बच्चों को लोरियां सुनाने, रिझाने और भुलावे में रखकर उनकी जिज्ञासाओं को शांत करने का समय बीत गया है। उनकी सोच और चंचलता का...

दुनिया मेरे आगेः पहाड़ में पानी

पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश के लोकप्रिय पर्यटन स्थल शिमला में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ था। सरकार ने कुछ दिनों के लिए स्कूल...

दुनिया मेरे आगे: मन की परतें

कुछ समय पहले आई एक खबर में बताया गया था कि रेलवे के आरक्षित डिब्बों में यात्रा करने वाले कुछ यात्री अपने साथ कंबल,...

दुनिया मेरे आगे: संवेदनहीन व्यवस्था

अनुशासन होना चाहिए। लेकिन अनुशासन के नाम पर यह नहीं होना चाहिए कि विद्यार्थियों का भविष्य ही खराब हो जाए।

दुनिया मेरे आगे : किसान का दुख

बाजार को चलाने वाले आमतौर पर किसानों को उनका पूरा मेहनताना और लागत मूल्य तक नहीं देना चाहते। ऐसे लोगों या पक्षों से आज...

दुनिया मेरे आगे : विश्वास बनाम विज्ञान

जब बारिश नहीं होती थी तो किसी पंडित या पुजारी के कहने पर किसी प्रतिष्ठित मंदिर में शिव का दूध से अर्घ भरा जाता...

दुनिया मेरे आगे: महत्त्वाकांक्षा की मार

दिल्ली से बाहर रहने के कारण अभिभावक-शिक्षक मीटिंग में मेरी शिरकत पहले कम ही रही है। पत्नी ने इस दायित्व को निभाया है। लेकिन...

दुनिया मेरे आगे: अपने पराए

कहने को हम समाज, समुदाय और देश को एक सूत्र में पिरोने के उपदेशों के बीच पले-बढ़े होते हैं। लेकिन आमतौर पर सामान्य ज्ञान...

दुनिया मेरे आगे: सभ्यता की राह

आज हम तकनीक की दौड़ में शामिल हैं। मशीन ही जीवन बनता जा रहा है और भावनाएं कोने में सिमटती जा रही हैं। रिश्ते-नाते,...

दुनिया मेरे आगे: खतरे की थैली

यह एक आम हकीकत है कि हमारे यहां जो प्रतिबंधित कर दिया जाता है उसका उल्लंघन करने में हमें आनंद मिलता है। विडंबना यह...

दुनिया मेरे आगे : बच्चे की भाषा

कभी किसी शिशु को करीब से देखने का अवसर मिले, तो अवश्य देखिए। उसकी हरकतें, जबान, खास अवसरों पर की जाने वाली चेष्टाएं मिल...