दुनिया मेरे आगे

घरौंदे का तिनका

असीमा भट्ट एक सुखद संयोग है कि मैं मुंबई में जहां रहती हूं, वहां की बालकनी से बाहर देखने पर बंगाल में होने का...

सोच और शौचालय

पम्मी सिंह दीवारों पर लिखी कुछ सूचनाएं या वाक्य बरबस हमारे दिमाग पर चोट करते हैं। लेकिन हम आगे बढ़ जाते हैं, कभी नजरअंदाज...

कला के ठिकाने

सीरज सक्सेना करीब चार साल बाद कन्हारपुरी में अपनी ससुराल जाना हुआ। छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव अब कन्हारपुरी को भी अपनी सीमा में ले चुका...

किस्सा अड्डे का

गोपेश्वर सिंह अथश्री अड्डा पुराण। आने को फेसबुक पर आ तो गया हूं, लेकिन मेरे मन का संशय अब भी मिटा नहीं है। मुझे...

हमारा किताबघर

प्रमोद द्विवेदी बीते पंद्रह अगस्त को हमें (रामप्रस्थ ग्रींस, वैशाली में) एक छोटा-सा पुस्तकालय मिल गया। इसे बनवाने में भास्कर गांधी ने जो योगदान...

गरीब पर शक

विष्णु नागर दिल्ली के जोहरीपुर इलाके के एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार के सत्रह वर्षीय लड़के अनुपम गुप्ता ने कुछ दिन पहले साइकिल चोरी का...

आचार्य के शहर में

ध्रुव शुक्ल रायबरेली पहली बार जाना हुआ। राजनीति की दुनिया में यह स्थान इंदिरा-स्मृति से जुड़ा हुआ है और अब उसकी प्रतिनिधि सोनिया गांधी...

भाईचारे की इमारत

महेंद्र राजा जैन बर्लिन में पिछले कुछ वर्षों से जगह-जगह आकाश छूती इमारतों के निर्माण कार्य के दौरान क्रेनों की कानफोड़ू आवाज से वहां...

आत्म बगैर कथा

संदीप जोशी आत्मकथा लिखने का एक समय होता है। जीवनी लिखने की भी एक उम्र होती है। आत्मकथा या जीवनी लिखना जीवन में मिली...

स्वच्छता का परदा

विनोद कुमार पिछले कुछ समय से स्वच्छता और सफाई को लेकर अजीब तमाशा हो रहा है। मोदीजी ने आह्वान किया और लोग निकल पड़े...

दूर के राही

सुनील मिश्र पिछले महीने विख्यात पार्श्वगायक दिवंगत किशोर कुमार की पुण्यतिथि तेरह अक्तूबर को सरकारी ड्यूटी के हिसाब से एक दिन पहले खंडवा आ...

तुम अकेली नहीं होगी

सदफ़ नाज़ प्यारी रेहाना जब्बारी! तुम्हारी मां ‘शोलेह’ के नाम तुम्हारा खत पढ़ा। तुम्हारी फांसी और उसके बाद इस खत से अब पूरी दुनिया...

तहजीब के तराने

सूर्यप्रकाश चतुर्वेदी बात सत्तर के दशक की है। तब दिल लखनवी बड़े लोकप्रिय थे। ऊंची आवाज और बुलंद तरन्नुम में गजल पढ़ते थे और...

नफरत के नासूर

निवेदिता पच्चीस साल पहले भागलपुर जख्मों से भर गया था। एक बार फिर उसके जख्म हरे हो गए। स्मृति भी किस अंधेरे में अपना...

उलटी बयार

विश्वंभर शिक्षा में बदलाव के प्रति राज्य सरकारों के सरोकारों और गंभीरता को उनके फैसलों के संदर्भ में देखा-समझा जाना चाहिए। राजस्थान के शिक्षामंत्री...

खोई हुई दिशाएं

मधु कांकरिया वह पिछले सप्ताह ही एम्स्टर्डम से मुंबई आई थी, तीन महीने के लिए। पर मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि वह...

हाइटेक ठगी

अजेय कुमार जनसत्ता 17 नवंबर, 2014: बेटे को तरक्की पर जब उसकी कंपनी ने एक महंगा मोबाइल फोन दिया तो मुझे डर लगा रहता...

अंतहीन बाजार

संदीप जोशी जनसत्ता 15 नवंबर, 2014: बाजार को हर मौके पर मुनाफा कमाने की चाहत रहती है। वहीं उपभोक्ता को बाजार में होड़ से...

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