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दुनिया मेरे आगेः मशीन की संवेदना

आजकल हम सभी के पास फोन है और हम दिन भर उस फोन में व्यस्त रहते हैं। उसे बार-बार देखते हैं कि कहीं कोई मैसेज तो नहीं आया!

Author April 5, 2018 3:21 AM
महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग हाल ही में दिवंगत हो गए। उनका कहना था कि अगर इन मशीनों को बनाया और बढ़ावा दिया गया तो ये मानव सभ्यता को खत्म कर देंगी।

तनिष्का वैध

आजकल हम सभी के पास फोन है और हम दिन भर उस फोन में व्यस्त रहते हैं। उसे बार-बार देखते हैं कि कहीं कोई मैसेज तो नहीं आया! फोन के जरिए हम दुनिया भर से तो जुड़े रहते हैं, लेकिन इसकी खबर हमें नहीं होती कि हमारे आसपास क्या हो रहा है। हम लोग फोन में इतने डूब जाते हैं कि पास ही मौजूद किसी व्यक्ति की भी तकलीफ महसूस होना तो दूर, दिखाई तक नहीं देती। वर्चुअल यानी आभासी दुनिया में कहीं न कहीं हम असल दुनिया को भूलते जा रहे हैं और इसके कारण हमारे भीतर की मनुष्यता खत्म होती जा रही है। सोफिया को अक्तूबर 2017 में सऊदी अरब की नागरिकता मिली। लेकिन सोफिया किसी लड़की या इंसान का नाम नहीं है, बल्कि वह पहली रोबोट है, जिसे किसी देश की नागरिकता मिली हो। सोफिया को हांगकांग की कंपनी ‘हंसों’ ने बनाया, जो अप्रैल 2015 में सक्रिय हुई थी। अब दुनिया भर के वैज्ञानिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर काम कर रहे हैं। साथ ही इस बात पर चर्चा भी तेज हो गई है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नफा-नुकसान क्या-क्या होंगे!

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दरअसल, कृत्रिम बुद्धिमत्ता ऐसी बुद्धिमत्ता है जो मशीनों के जरिए जाहिर की जाती है। यह बहुत हद तक प्राकृतिक बुद्धिमत्ता की तरह ही होती है, जो आमतौर पर इंसानों में होती है। इसकी अवधारणा सबसे पहले जॉन मक्कार्थी ने 1956 में डार्टमाउथ कॉन्फ्रेंस में पेश की थी। उन्होंने इसके लिए एक नई प्रोग्रामिंग भाषा भी बनाई, जिसे ‘लिस्प’ नाम दिया। आम धारणा यही है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को इंसानों की मदद करने के लिए बनाया जा रहा है। लेकिन न जाने क्यों, लोग इसके दूरगामी नकारात्मक प्रभावों को अनदेखा कर रहे हैं। जबकि कई वैज्ञानिकों ने इसके नकारात्मक प्रभावों के बारे में विस्तार से बताया है।

यह हमारे रोजमर्रा के कामों को तो आसान करता है, लेकिन यह भी सच है कि किसी भी मशीन में भावनाएं नहीं हो सकतीं। ये संयंत्र दिए गए लक्ष्य को पूरा करने के लिए भयानक और हिंसात्मक तरीके भी अपना सकते हैं। न उनमें मनुष्य की तरह की संवेदना होगी और न ही प्रेम। करुणा, परोपकार और ममता जैसे भाव की तो बात करना भी बेमानी है। रजनीकांत और ऐश्वर्या राय की फिल्म ‘रोबोट’ में इस समस्या को देखा जा सकता है। इस फिल्म में वशीकरण वैज्ञानिक है और वह ‘चींटी’ नामक एक रोबोट बनाता है। वशीकरण इससे देश की सेवा करवाना चाहता है। लेकिन उसे भावनाएं देने के बावजूद एक गलत इंसान के हाथों पड़ कर उसने अपने लक्ष्य पाने के लिए भयानक कदम उठाया और पूरे शहर में तबाही मचा दी थी।

महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग हाल ही में दिवंगत हो गए। उनका कहना था कि अगर इन मशीनों को बनाया और बढ़ावा दिया गया तो ये मानव सभ्यता को खत्म कर देंगी। जब एक बार मनुष्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता संयंत्र बना लेगा तो ये संयंत्र खुद ही अपनी तरह की प्रतिलिपियां बना लेंगे और एक दिन मनुष्य पर ही राज करने लग सकते हैं। इस प्रकार दुनिया में रोबोट राज आ जाएगा। जॉस वीडोन की हॉलीवुड फिल्म ‘अवेंजर: ऐज आॅफ अल्ट्रॉन’ में भी टोनी स्टार्क दुनिया में शांति लाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता संयंत्र ‘अल्ट्रॉन’ का निर्माण करता है। लेकिन यह संयंत्र ‘शांति’ का अर्थ ‘प्रलय’ समझ कर पूरी दुनिया को तबाह करने के लिए अपनी तरह के कई प्रतिरूप बनाता है और पूरी दुनिया को खत्म करने निकल पड़ता है। फिल्म के अंत में तो दुनिया को तबाह होने से बचा लिया जाता है, लेकिन यह महज एक फिल्म थी और असल जिंदगी में ऐसा करना बहुत मुश्किल काम है। लेकिन इसके कई अन्य पहलू हैं।
ऐसे संयंत्रों के बनने से न जाने कितने लोगों की नौकरियां चली जाएंगी।

हर जगह ऐसी मशीनें लोगों की जगह लेती जाएंगी और बेरोजगारी बेलगाम हो जाएगी। ज्यों-ज्यों मशीनीकरण बढ़ेगा, त्यों-त्यों काम करने के लिए इंसानों की जरूरत कम होती जाएगी। बढ़ता मशीनीकरण बेरोजगारी के साथ-साथ अपराध भी बढ़ाएगा। जब लोगों के पास करने को काम नहीं होगा तो वे रोजी-रोटी के लिए अपराध की दुनिया की ओर कदम बढ़ाएंगे। इससे दुनिया भर में भय का माहौल बनेगा और अपराध का ग्राफ भी बढ़ेगा, जिससे बहुत ही भयानक स्थिति पैदा हो सकती है। स्पेसएक्स और टेस्ला के सीईओ एलोन मस्क ने सितंबर 2017 में अपने ट्विटर पन्ने पर लिखा कि तृतीय विश्व युद्ध का मुख्य कारण यही कृत्रिम बुद्धिमत्ता या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस होगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जितनी कारगर है, लंबे समय में उतनी ही ज्यादा प्रलयंकारी भी होगी। अगर इसे सही तरह से इस्तेमाल नहीं किया गया तो यह पूरी दुनिया में तबाही मचा सकती है। ऐसे संयंत्र भले ही आज हमारी भलाई के नाम पर बनाए जा रहे हों, लेकिन कुछ वक्त बाद यही सबसे ज्यादा नुकसानदेह और खतरनाक साबित होने वाले हैं।

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