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दुनिया मेरे आगेः ठगी के चेहरे

करीब दो महीने पहले की बात है। दोपहर का समय था। मैं पति के साथ बैठी थी। उनके पास एक फोन आया, जिसमें उधर से कहा गया- ‘मैं शर्मा बोल रहा हूं।

Author January 12, 2018 3:26 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

करीब दो महीने पहले की बात है। दोपहर का समय था। मैं पति के साथ बैठी थी। उनके पास एक फोन आया, जिसमें उधर से कहा गया- ‘मैं शर्मा बोल रहा हूं।’ पति ने कहा- ‘कौन से शर्माजी?’ जवाब में जब नहीं पहचानने पर हैरानी जताई गई तो पति ने अंदाज से कहा कि क्या आप स्कूल वाले डॉक्टर शर्मा हैं। तब उधर से कहा गया- ‘हां, अब आपने ठीक पहचाना। बात यह है भाई साहब कि मैं यहां मथुरा आया था। जेब कट गई। अब आपसे मदद की जरूरत है। हो सके तो पांच हजार रुपए भेज दें।’ लेकिन इसके बाद जब पति ने पूछा कि मथुरा में आप कहां ठहरे हैं, मैं अपने किसी मित्र से कह देता हूं, वे आपकी मदद कर देंगे, तब उधर से उस व्यक्ति ने कहा कि नहीं जी, पता नहीं वे कब तक आएं! आप पैसे भेज दीजिए, मैं वहां वापस आते ही दे दूंगा। इसके बाद पति के सामने कोई चारा नहीं बचा तब उन्होंने कहा कि आप खाता संख्या भेज दीजिए, मैं यहां से पैसे आपके खाते में भेज देता हूं। मगर खाता संख्या भी उन्हें याद नहीं थी। इसके बाद उस व्यक्ति ने कहा कि आप एयरटेल स्टोर में जाकर मेरी बात करा दें, वे लोग मेरे खाते में पैसा डाल देंगे। बगल में बैठी मैं भी पूरी बात सुन रही थी।

दरअसल, जिन शर्माजी की बात हो रही है, वे उस स्कूल के प्रधानाध्यापक रहे हैं, जहां मेरे बच्चे पढ़ते थे। उनकी मेरे पति से बातचीत के बाद मैंने सोचा कि मैं खुद फोन करती हूं। मैंने जब पूछताछ शुरू की और उधर से जो आवाज आ रही थी, वह मुझे अनजान-सी लगी। मैंने पूछा- ‘शर्माजी, आपकी आवाज को क्या हुआ!’ उन्होंने कहा कि मैंने सवेरे से कुछ खाया नहीं, इसलिए आपको मेरी ऐसी आवाज सुनाई दे रही है। इसके बाद वे बड़े फूहड़ ढंग से हंसे।

यह सही है कि वे हमारे बहुत पुराने मित्र हैं, मगर इस तरह की हंसी-ठिठोली जैसी बातचीत हमारे बीच कभी नहीं हुई थी। खैर, मुझे तो ठीक नहीं लगा, लेकिन पति महोदय ने उन्हें फिर से फोन पर कहा कि आप चिंता न करें, हम अभी पैसे भिजवा देते हैं। उनका कहना था कि वे हमारे पुराने जानने वाले हैं। वे अगर किसी मुसीबत में हैं तो उन्हें मना कैसे किया जाए। इसके बावजूद मेरे दिमाग में ऐसे खयाल आ रहे थे कि आखिर उन्होंने पैसे मांगने के लिए हमें ही क्यों फोन किया! उनके तो बहुत-से रिश्तेदार और जान-पहचान के करीबी लोग हैं! कई और बातों के आधार पर मेरे मन में थोड़ा शक उभरा। इस बीच फिर से उसी नंबर से फोन आया। उधर से आवाज आई कि क्या आपने पैसे भेज दिए या नहीं! फिर बार-बार जल्दी पैसे भेजने का आग्रह किया जाने लगा।

शक के बावजूद मुझे लगा कि अगर मेरा शक गलत निकला तो उनके प्रति अन्याय हो जाएगा। इसलिए मैं दस हजार रुपए लेकर बैंक की ओर निकली। रास्ते में वही स्कूल था, जिसमें डॉ शर्मा काम करते हैं। अचानक मुझे लगा कि स्कूल में पता करती हूं। मैंने स्वागत कक्ष में बैठी एक लड़की को सारी बात बता कर नंबर दिखाया। उसने कहा- ‘यह शर्माजी का का नंबर नहीं है और वे तो थोड़ी देर पहले तक यहीं थे। अभी निकले हैं। घर भी नहीं पहुंचे होंगे।’

अब जाकर मेरी आशंका सही साबित हो रही थी। मैंने फोन करके पति को सारी बात बताई। फिर मैं एयरटेल के दफ्तर पहुंची और उस नंबर को दिखा कर पूछा कि क्या वे बता सकते हैं कि यह किसका नंबर है और कहां का है! उन्हें भी सारी बात बताई, मगर उन्होंने सूचना देने में असमर्थता जताई। घर लौटी तो पता चला कि उस आदमी का फोन फिर आया था और पति ने कहा कि आप बताएं कि कहां ठहरे हैं। मेरे लोग आकर आपको पैसे भी देंगे और सेवा भी करेंगे। उसके बाद उस आदमी फोन नहीं आया। वह नंबर अब भी मेरे पास है। गनीमत यह थी कि स्कूल पास था और मैंने वहां जाकर जानकारी ली। वरना मेरे दस हजार रुपए तो चले ही जाते।

इस प्रकार न जाने कितने लोग धोखा खाते, लुटते होंगे और अपराधी कभी पकड़े भी नहीं जाते होंगे। फोन कंपनियों से कोई मदद भी नहीं मिलती होगी। आजकल तो खासतौर पर ऐसे अनेक मामले सामने आ रहे हैं कि कोई व्यक्ति अपने बैंक से होने का दावा करके आधार नंबर मांगते हैं और कई लोगों के खाते से पैसे गायब हो जाते हैं। ये दिखने में इक्के-दुक्के और साधारण मामले लगते हैं, लेकिन अगर इस तरह की प्रवृत्ति पर कानूनी महकमों की ओर से सख्ती नहीं बरती गई तो आने वाले दिनों में यह समस्या बड़ा जटिल रुख अख्तियार कर सकती है। इसमें भोले-भाले लोग ही लुटेंगे।

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