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दुनिया मेरे आगेः जीवन एक उत्सव

देखा जाए तो हमारा जीवन किसी ऐसी फिल्म की तरह है, जिसकी अवधि के बारे में हमें कुछ मालूम नहीं।
Author December 7, 2017 02:50 am
प्रतीकात्मक तस्वीर

एकता कानूनगो बक्षी

देखा जाए तो हमारा जीवन किसी ऐसी फिल्म की तरह है, जिसकी अवधि के बारे में हमें कुछ मालूम नहीं। यह किस पल समाप्त हो जाए, कह नहीं सकते। इसलिए मेरा मानना है कि हर दिन, हर पल में एक छोटी-सी जिंदगी मौजूद होती है। उसे पूरी जिंदगी मान कर जीने में ही समझदारी है।
ऐसे ही कुछ समझदार लोग अपने जीवन को किसी उत्सव की तरह जीते हैं। उनकी उपस्थिति वातावरण में सकारात्मकता की अदृश्य महक लिए होती है। उनके आभामंडल से सारा माहौल जैसे दिवाली के दीपों-सा जगमग करता अनुभूत होता है। मुख मंडल से जादू बिखेरती मुस्कराहट फैलती रहती है और समूची देह में उम्मीदों, हौसले और धैर्य के फूलों की कोमलता मन को शांत कर देती है। ऐसे लोग जब हमेशा के लिए हमें छोड़ कर चले जाते हैं तो उनके अभाव की पूर्ति उनकी स्मृति, उनका आवास, उनकी वस्तुएं, उनके काम और विचार करते हैं। ऐसे लोग दुनिया से जरूर विदा हो जाते हैं, मगर शायद ये लोग हमेशा हमारे साथ किसी न किसी रूप में बने रहते हैं।

हम जैसे आम लोग ताउम्र मोह-माया और बाहरी आडंबरों के चक्कर में अपने आप को अति व्यस्त रखते हैं। लेकिन अचानक हुई किसी खास की मौत या फिर अपने प्रिय की विदाई हमें रुक कर सोचने पर मजबूर कर देती है। हमारे हाथ-पैर कुछ समय के लिए निष्क्रिय-से हो जाते हैं, दिल कहीं गहरे उतर जाता है। अपने भीतर अंतर्मन की ओर डुबकी लगाते हैं, जहां सब कुछ खाली-खाली लगता है। वर्षों से अर्जित सारी शानो-शौकत के बीच हम अपने आपको अकेला महसूस करने लगते हैं। सुख-सुविधाओं से संपन्न, भरे-पूरे परिवार के बीच भी किसी खास के न रहने पर किसी वीरानी में अपने आपको गुम होता महसूस करने लगते हैं।
दुनिया से विदा होने के पहले वे सभी चीजें जो लगातार बिना किसी की परवाह किए हमने इकट्ठा की थीं, वे सब हमारे जाने के बाद भी लंबे समय तक मौजूद रहती हैं। मकान, कार, सारी भौतिक सुख-सुविधाएं यहीं छूट जाती हैं। बहुत जतन से संभाला गया यह शरीर मृत्यु के बाद कुछ समय तक ज्यों का त्यों बना रहता है और फिर धीरे-धीरे वह भी प्रकृति के तत्त्वों में विलीन हो जाता है। हमेशा के लिए जो चीज बची रहती है, वह केवल हमारे किए गए काम, विचार, स्वभाव और आचरण की खुशबू ही होती हैं। असल में यही सबसे बड़ी जमा पूंजी है, जिसका आप जीवन भर संचय करते रहिए। इसे न कोई चोर चुरा सकता है और न ही इसके लिए जोड़-घटाव की किसी हिसाब वाली डायरी रखने की जरूरत रहती है। शायद जीवन में सुख-चैन और आनंद की असरदार दवा भी यही है कि हम हमेशा खुश रहें और सबको खुशियां लुटाते रहें।

जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई यही है कि हम सबके पास गिनती की सांसें होती हैं। सभी का अंत भी निश्चित है। प्रकृति हमें बार-बार इशारों में यह बात रोज याद दिलाती है। सुबह का उजाला शाम को अंधेरा बन कर दृश्य में विलीन हो जाता है। हरेक मौसम बदलता है। ऋतुएं आती-जाती हैं। सृष्टि में सब कुछ निरंतर गतिशील है। हमारे शरीर की झुर्रियां बताती रहती हैं कि हमने जीवन का कितना रास्ता तय कर लिया है।
तो क्या बिछोह इस जीवन का वाकई इतना गंभीर मुद्दा है! शायद नहीं। जीवन एक उत्सव है। जीवन जीना वाकई एक कला है। पिछले दिनों जब हमारी दादी की अस्सी साल की उम्र में मृत्यु हुई तो उनकी अंतिम विदाई बैंड-बाजे के साथ की गई। मुझे लगा जैसे एक बहुत बड़े महान कलाकार का निधन हुआ हो। मेरा दुखी मन उनके लिए गर्व से भर गया कि उन्होंने जीवन की अपनी सारी भूमिका बखूबी निभाई।

उसके बाद स्मृतियों में जो रह गया है, वह प्रेरित कर रहा है कि जीवन में सबके साथ मिल कर ठहाके लगाइए… सबको खूब प्यार कीजिए। अपने काम में तल्लीन हो जाइए, संसार को निहारिए, एक पर्यटक की तरह जीवन के विभिन्न स्वाद, रंग और सुगंधों का लुत्फ उठाइए। किसी भी विपरीत परिस्थिति को लेकर बहुत परेशान न हों। जब आप या हम ही यहां अस्थायी हैं, फिर वे तो मात्र कुछ समय के लिए हमें नए अनुभव और रोमांच देने के लिए आई हैं। निर्भीक होकर उनका सामना करें।
अब यह पूरी तरह हम पर निर्भर करता है कि हम अपने किरदार को किस तरह निभाते हैं। हमारी मुलाकात जीवन रूपी फिल्म के अन्य किरदारों से भी होती रहेंगी, जो हमारी फिल्म को और भी दिलचस्प बनाते जाते हैं। लेकिन हमारे लिए अपनी भूमिका पर केंद्रित रहना जरूरी है। नहीं तो कहानी दिशाहीन हो सकती है, जीवन विचलित हो सकता है।

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