ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगेः दिखावे का शौक

जो है उसे दूसरों को दिखाने की प्रवृत्ति सभी लोगों में होती है। समारोह, उत्सव, मेले व भीड़-भरे हर माहौल में जहां बहुत-से लोग इकट्ठा होते हैं, लोग अपने अच्छे से अच्छे कपडे़ व आभूषण पहन कर जाते हैं ताकि लोग उन्हें देखें व सराहें।
Author March 30, 2018 03:59 am
प्रतीकात्मक तस्वीर

सूर्यप्रकाश द्विवेदी

जो है उसे दूसरों को दिखाने की प्रवृत्ति सभी लोगों में होती है। समारोह, उत्सव, मेले व भीड़-भरे हर माहौल में जहां बहुत-से लोग इकट्ठा होते हैं, लोग अपने अच्छे से अच्छे कपडे़ व आभूषण पहन कर जाते हैं ताकि लोग उन्हें देखें व सराहें। दिखावे का यह शौक पुरुषों में भी होता है, महिलाओं में भी। शहरों में भी होता है और आदिवासियों व ग्रामीणों में भी। झाबुआ के भगोरिया मेले में युवक और युवतियां खूब बन-संवर कर आते हैं। ईसाई लोग रविवार को जब चर्च जाते हैं तो अपने अच्छे परिधान पहनकर जाते हैं। बहुत-से लोग अपने एकमात्र कोट व टाई को बहुत संभाल कर रखते हैं ताकि ऐसे मौकों पर उन्हें पहन सकें।

दिखावे का यह शौक लोगों के सिर पर इस कदर चढ़ कर बोलता है कि यदि कोई उनकी साज-सज्जाको न सराहे तो वे किसी न किसी बहाने उसे दिखा कर तारीफ करवाने की कोशिश से भी बाज नहीं आते। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो दूसरों से मांग कर पहनने व तारीफ करवाने की कोशिश में हास्यास्पद स्थिति में फंस जाते हैं। क्यों साहब, यह घड़ी या अंगूठी आपको कैसी लगी जैसे सवाल तब भी पूछ बैठते हैं जबकि वह घड़ी या अंगूठी उनकी नहीं है। यही स्थिति खाना खाने के लिए बुलाए गए मेहमानों के सामने भी आ जाती है जब मेजबान अपने ही भोजन की तारीफों के पुल बांधे। एक मौके पर मैंने मेजबान को अपने मेहमानों के सामने अपने बनाए हुए भोजन की ही नहीं, तरह-तरह के सलाद व उसकी पौष्टिकता पर कसीदे पढ़ते हुए सुना। नाना प्रकार की सब्जियां, मिठाइयां व नमकीन बनाए ही इसलिए जाते हैं कि लोग उन्हें देखें, चखें व तारीफ करें। बल्कि अन्य समारोहों में की गई व्यवस्था से इनकी तुलना करें और इस इंतजाम को बेहतर बताएं।

एक साहब ने तो एक मिठाई खिला कर पूछा भी, कि खास लखनऊ से मंगवाई है, कहिए कैसी है? इसी तरह घड़ी को स्विट्जरलैंड की व कपड़ों को पेरिस या अमेरिका का बताया जाता है। जबकि सब जानते हैं कि अमेरिका में कपडेÞ ताइवान, चीन या कोरिया से आते हैं। पर शेखी बघारने वालों को वास्तविकता से क्या मतलब? उन्हें तो हर चीज को दूरस्थ स्थान का बताना है मानो दूर से आई चीज के उपयोग से उनकी प्रतिष्ठा बढ़ती हो। प्रदर्शन का शौक इंसान की फितरत है। जरूरी नहीं कि बाहर से आई चीजों का ही प्रदर्शन किया जाय। स्थानीय चीजों की भी बढ़-चढ़ कर तारीफ की जाती है। कुछ चीजें हर स्थान की खासियत होती हैं। जैसे बनारस का पान, आगरे का पेठा, जयपुर की जूतियां, इंदौर और मालवा का नमकीन व कचैड़ियां तथा हैदराबाद की बिरियानी। और इन स्थानों की इन विशेषताओं में भी भिन्नता होती है। अत: जब भी किसी को अपने यहां की चीजों की तारीफ करनी होती है, वह विभिन्न स्थानों पर बनी चीजों का तुलनात्मक विश्लेषण करता है। दिखावे का यह शौक ही लोगों को अधिक से अधिक पकवानों व पहनावों की ओर आकर्षित होने को प्रेरित करता है।

प्रदर्शन या दिखावे का शौक यहीं तक सीमित नहीं है। शादी, धार्मिक उत्सव, विवाह समारोह जैसे सामाजिक मौकों पर सज-धज कर व बाजे-गाजे के साथ वीडियोग्राफी करवाते हुए और इतराकर सेल्फी लेते हुए तथा फिर उसे इधर-उधर शेयर करते हुए जब युवावर्ग खुश होता है तो इसमें भी प्रदर्शन करने व लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने का भाव ही है। भले ही खुद के चार या छह लोग ही हों, सेल्फी लेकर शेयर तो की ही जाती है। ऐसे-ऐसे लोग पगड़ी पहने नजर आते हैं जिन्होंने कभी जिंदगी में टोपी भी नहीं पहनी और दस-पंद्रह मिनट में ही वे पगड़ी में असहज महसूस करके उसे उतार भी लेते हैं। इसी तरह वे लड़कियां और महिलाएं भी नाचने के नाम पर मटकती हैं जिन्होंने कभी ढोलक पर न तो गाया न ही नृत्य किया। सेल्फी की बीमारी जो न करवाये वह कम है।

बडे-बडेÞ मॉल या किसी अच्छी सजावट के सामने सेल्फी लेते हुए स्कूल व कॉलेज के लड़के मुझे बरबस उन ठाकुरों और राजा-महाराजाओं की याद दिलाते हैं जो मरे हुए शेर के पास खडेÞ होकर फोटो खिंचवाते तथा यह साबित करने की कोशिश करते थे कि लोग मानें कि इतने बडेÞ शेर का शिकार उन्होंने ही किया है। नोटों की माला पहनना, पुराने जमाने में महफिलों में नवाबों का किसी नर्तकी को खुश होकर सोने का हार उतार कर देने में उदारता तथा दरियादिली तो थी ही, दिखावे का शौक भी था। एक पैर पर खडेÞ रहने वाले व बड़ी-बड़ी जटा रखने वाले साधुओं और बाबाओं में भी साधना के बजाय प्रदर्शन का भाव ही अधिक है। दरअसल, औरों से अलहदा नजर आने की चाह में कई तरह की कोशिशें की जाती हैं। लगता है दिखावे का यह शौक बीमारी बनता जा रहा है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App