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गलती की कीमत

जीवन में गलती का मर्म इतना विरोधाभासी है कि आपको पता ही नहीं चलता कि आप कब गलती कर बैठते हैं।

Author December 6, 2016 3:56 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

कृष्ण कुमार रत्तू

कभी गलती मत करना, क्योंकि गलती हमेशा बुरी होती है। लेकिन क्या आप यह मान सकते हैं? दरअसल, कई बार आप अचानक कहते हैं। ऐसी गलती तो मैं बार-बार करना चाहता हूं। जीवन में गलती का मर्म इतना विरोधाभासी है कि आपको पता ही नहीं चलता कि आप कब गलती कर बैठते हैं। यह भी संभव है कि आप गलती को गलती ही न मानें। सच यह है कि गलती तो गलती है और वक्त के साथ उसकी कीमत भी आपको अदा करनी पड़ती है। दुनिया भर में गलतीबाजों के तमाम किस्से भरे पड़े हैं। हाल ही मैं गूगल पर अपने काम की कुछ बातों की खोज कर रहा था। वहीं एक जगह पढ़ा कि एक शोध के मुताबिक उन लोगों की गिनती लगातार बढ़ रही है जो गलती करते हैं, लेकिन उसमें अपनी गलती को मानते नहीं। शाब्दिक भाषा में इसे ‘सामाजिक बेहूदगी’ का नाम दिया गया है। हमारे हिंदी समाज में इसे ‘सीनाजोरी’ शब्द से भी ‘महिमामंडित’ किया गया है। कभी सोचा जाए कि गलती करने वाला गलती को मान ले और दूसरे से क्षमा याचना कर ले।

लेकिन कभी-कभी गलती इतनी भयानक हो जाती है कि उसके जिक्र को खबर की तरह देखा जाता है। इन दिनों कुछ लोग नोटबंदी को गलती मान रहे हैं। मगर उनको क्या कहें जो इस गलती को महिमामंडित करते हुए बधाई प्रेषित कर रहे हैं। अब इस गलती को किस कसौटी पर आंकेंगे? एक के लिए गलती है तो एक के लिए यह सुधार की व्यवस्था का उपाय है। चलिए यह फैसला आप पर छोड़ते हैं। यों दुनिया का इतिहास गलतियों से भरा पड़ा है और बार-बार यह भी कहा गया है कि अगर फलां राजा या राष्ट्रपति या फिर कोई हमारे जैसा व्यक्ति यह गलती नहीं करता तो बात कुछ और ही होती। यानी इतिहास ही बदल जाता है।  अब इसमें कितनी गलती है और कितना इतिहास का सच है, यह शोध का विषय है। इस वक्त इंटरनेट की दुनिया में भी गलतियों की बेहद भरमार है। बड़े सर्च इंजन भी गलतियों को नहीं सुधार पाते। शायद यही कारण है कि हम इंटरनेट की दुनिया के अधकचरे सच को भी सच नहीं मानते और फिर जो होता है, वह भी आपके सामने है।

पिछले दिनों दिल्ली के एक अस्पताल में डॉक्टर ने रवि राय नामक व्यक्ति के उस घुटने का आॅपरेशन कर दिया जो बिल्कुल ठीक था। इस तरह की पीड़ादायक गलती को बेवकूफी भरी गलती भी कहा जा सकता है। इसका जिक्र देश भर की खबरों में हुआ। कई बार यह भी होता है कि एक गलती के बाद आप दर्जनों गलतियों को दोहराते जाते हैं और आखिरकार उस गलती में ही सुखद भविष्य की तलाश करने लग जाते हैं। इन गलतियों को आप किस श्रेणी में रखेंगे!गलतियों की कीमत हमेशा अदा करनी होती है। ऐसा इसलिए होता है कि हर क्रिया की प्रतिक्रिया होना लाजिमी है। इन दिनों एक बड़ी गलती का जिक्र आपके साथ साझा करता हूं। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश अमेरिका में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप ट्रंप को राष्ट्रपति चुना गया है। वोट अनुपात भले ही कम रहा है। लेकिन जीत उसी की है जिसके पास ज्यादा नंबर होंगे। अब उनचास प्रतिशत लोग यह विरोध कर रहे है कि ट्रंप गलती से जीत गए। अब उस गलती को क्या कहेंगे जो कभी भी राजनीतिक न रहे व्यक्ति को अचानक राष्ट्रपति चुनवा दे! यह तय है कि इस गलती पर अगले कई वर्ष तक बहस होती रहनी है। मैं आपको भी कहता हूं कि आप भी अपनी गलतियों पर किसी के साथ नहीं तो कम से कम अपने साथ तो सच या फिर पश्चाताप साझा कर सकते हैं।

मानवीय स्वभाव में यह भी मनोवैज्ञानिक अनुभूति है कि संभव ही नहीं कि आपसे कोई गलती ही न हो और आपको कभी अपने गलत होने का अहसास न हो। चलिए छोड़िए! कहा जाता है कि गलती तो कभी-कभी भगवान भी करते हैं। जब आप भगवान को भी नहीं छोड़ते तो फिर आप कौन होते हैं गलती को परिभाषित करने वाले! इस बिंदु पर मैं सोच सकता हूं कि आदमी तो गलती का पुतला है और फिर गलती भगवान से भी होती है और आदमी एक भगवान का अंश ही है तो इस बहाने गलती की कीमत क्या होगी! चलिए आप गलतियां करते रहिए, गलती की कीमत भी आप सबको मुबारक। लेकिन ऐसी गलती मत कीजिएगा, जिसका आप पश्चाताप और कीमत नहीं अदा कर सकें।

 

 

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