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‘दुनिया मेरे आगे’ कॉलम में महेंद्र राजा जैन का लेख : डाक के रास्ते

ई-मेल और इंटरनेट के साथ ही कुरियर और आॅन लाइन खरीदारी वाले वेबसाइट फ्लिप कार्ट या अमेजन आदि के इस युग में पोस्ट आॅफिस के माध्यम से छोटे-मोटे पार्सल आदि भेजने का चलन अब बहुत कम हो गया है।
Author नई दिल्ली | July 18, 2016 00:10 am
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ई-मेल और इंटरनेट के साथ ही कुरियर और आॅन लाइन खरीदारी वाले वेबसाइट फ्लिप कार्ट या अमेजन आदि के इस युग में पोस्ट आॅफिस के माध्यम से छोटे-मोटे पार्सल आदि भेजने का चलन अब बहुत कम हो गया है। दरअसल, अब तो ऐसा लगने लगा है कि यह कोई पिछली सदी की बात हो गई है। फिर भी कभी-कभी पोस्ट आॅफिस जाने की जरूरत पड़ ही जाती है। फिलहाल मैं लंदन से करीब पच्चीस मील दूर एक गांव में रह रहा हूं। इस गांव को भारत के लिहाज से कोई शहर ही कहना ठीक होगा, क्योंकि यहां शहरों जैसी सभी प्रकार की सुविधाएं हैं। एक दिन वहां के पोस्ट आॅफिस में किसी काम से पहुंचा तो एक ताखे पर लोगों के लिए निशुल्क वितरण के लिए पोस्ट आॅफिस की तरफ से तैयार की गई अलग-अलग विषयों की अनेक बुकलेट रखी हुई थीं। बड़े ही कलात्मक ढंग से छपी आठ पृष्ठों की एक बुकलेट में बताया गया था कि पोस्ट सुविधा का उपयोग क्या-क्या भेजने के लिए किया जा सकता है और क्या भेजने के लिए नहीं। उसे देख कर लगा कि मैं फिर से अपनी छात्रावस्था में पहुंच गया हूं जब गाइड बुक में ‘टिक’ के निशान द्वारा बताया जाता था कि कौन-सा उत्तर ठीक है और ‘क्रॉस’ के निशान द्वारा गलत उत्तर होने की बात बताई जाती थी। वह बुकलेट देख कर एक उत्सुक परीक्षार्थी की तरह मैंने जानना चाहा कि मैं उसमें से कितने सही उत्तर दे सकता हूं।

अभी तक मुझे यह पता नहीं था कि डाक से जला हुआ यानी उपयोग किया हुआ मोबिल तेल (इंजन आॅयल) नहीं भेजा जा सकता। लेकिन इससे भी अधिक रहस्य की बात तो यह है कि कोई उपयोग किया हुआ मोबिल आॅयल क्यों भेजना चाहेगा? इसी तरह, किसी भी किस्म की ‘हेयर डाई’ यानी बालों को रंगने वाले तत्त्व भी नहीं भेजे जा सकते। नाखून में लगाने या किसी प्रकार का तरल रसायन भी नहीं भेजा जा सकता। क्या जमाए हुए पानी जैसे किसी पदार्थ से भी किसी प्रकार का खतरा हो सकता है, यह तो पोस्ट आॅफिस ही बता सकता है। संभव है कि कोई किसी अरब देश में रह रहे अपने बेटे को भेजना चाहता हो तो नहीं भेज सकता।

बाथरूम में रखे जाने वाले किसी भी प्रकार के एरोसोल, बॉडी स्प्रे, बाल साफ करने की क्रीम और कीड़े-मकोड़े भगाने के स्प्रे आदि भेजने पर भी प्रतिबंध है। यानी मैं जहां रहता हूं, अगर वहां कीड़े-मकोड़े भगाने का स्प्रे नहीं मिलता है तो मैं मच्छरों को अपना खून चूसने दूं और रात भर करवटें बदलता रहूं। किसी भी प्रकार का इत्र यानी परफ्यूम, प्रसाधन सामग्री, कॉस्मेटिक्स आदि भेजने की तो बात ही नहीं सोची जा सकती। शायद पार्सल पर ‘अत्यावश्यक’ या ‘सावधानी बरतें’ जैसे शब्द लिख देने से पार्सल भेजा जा सकता हो। लेकिन किसी भी प्रकार की नशीली, जहरीली वस्तु, विषजन्य तरल पदार्थ के साथ ही ऐसी कोई भी चीज, जिसके छूने से किसी भी प्रकार की चोट पहुंचने या मृत्यु होने की आशंका हो, निषिद्ध वस्तुओं की श्रेणी में हैं।

बहरहाल, आगे और कुछ पढ़ने की अपेक्षा मैंने काउंटर पर बैठी महिला क्लर्क से बड़ी ही नम्रता से पूछा कि क्या कोई ये सब या इस प्रकार की चीजें भेजता भी है या भेज सकता है, तो उसने बड़ी ही मासूमियत से जवाब दिया- ‘हां।’ उसने आगे बताया कि एक बार डाक में एक पैकेट आया, जिसमें से अजीब किस्म की गंध आ रही थी। जहां से वह पैकेट भेजा गया था, वहीं उसकी जांच कर ली जानी चाहिए थी, लेकिन वहां शायद कुछ चूक हो गई। जब उसे खोल कर देखा गया तो उसमें एक ग्रीटिंग कार्ड के साथ ही दुर्गंधयुक्त एक छोटा-सा ढेला भी था। इसलिए पुलिस को सूचित किया गया, जिसने पार्सल पाने वाले को बुला कर उससे पूछताछ की, लेकिन उसने उस संबंध में कुछ करने या किसी भी प्रकार की जानकारी होने से इनकार कर दिया।

यह सब जान-समझ कर ऐसा अवसादजनक लगा कि आगे और कुछ पढ़ने की इच्छा नहीं हुई। पर फिर सोचा कि अपनी जान-पहचान से लेकर सभी भारतीयों को अचानक खड़ी होने वाली किसी उलझन या ‘विपत्ति’ से बचाने के लिए यह बताना आवश्यक है। भले ही भारतीय डाक-व्यवस्था ये सब चीजें भेजने में आपत्ति न करे, पर पार्सल यहां पहुंचाने पर या तो वापस भेज दिया जाएगा या यहां पार्सल पाने वाले से इस प्रकार पूछताछ की जाएगी कि वह परेशान हो जाएगा। भारत में तो ज्यादातर लोग यही सोचते हैं कि डाक विभाग के जरिए लिफाफे में अगर चिट्ठियां भेजी जा सकती हैं तो पार्सल के जरिए कोई सामान भी कहीं भेजा सकता है।

(महेंद्र राजा जैन)

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