ताज़ा खबर
 

दूर के राही

सुनील मिश्र पिछले महीने विख्यात पार्श्वगायक दिवंगत किशोर कुमार की पुण्यतिथि तेरह अक्तूबर को सरकारी ड्यूटी के हिसाब से एक दिन पहले खंडवा आ गया था। गीतकार समीर का राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान से अलंकरण उसी दिन होना था। इस सम्मान समारोह को भोपाल से खंडवा आए कई वर्ष हो चुके हैं। श्याम बेनेगल, जावेद […]

Author November 24, 2014 9:51 AM

सुनील मिश्र

पिछले महीने विख्यात पार्श्वगायक दिवंगत किशोर कुमार की पुण्यतिथि तेरह अक्तूबर को सरकारी ड्यूटी के हिसाब से एक दिन पहले खंडवा आ गया था। गीतकार समीर का राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान से अलंकरण उसी दिन होना था। इस सम्मान समारोह को भोपाल से खंडवा आए कई वर्ष हो चुके हैं। श्याम बेनेगल, जावेद अख्तर, शत्रुघ्न सिन्हा, मनोज कुमार, सलीम खान आदि ने यहीं आकर यह सम्मान प्राप्त किया है। स्मृतियों में जाता हूं तो अपनी ही धुन याद आती है। शायद 1996-97 में किशोर कुमार की समाधि के पत्थर चोरी चले जाने का समाचार अखबारों की सुर्खियां बना था। उस समय एक बड़ी पहल की पृष्ठभूमि में अपनी भूमिका को याद किया। परिणाम यह हुआ कि तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राजेश खन्ना, लीना और अमित कुमार की उपस्थिति में खंडवा में राष्ट्रीय किशोर कुमार सम्मान की घोषणा की थी। तब हमने एक स्मारिका भी प्रकाशित की थी, जिसमें विनोद तिवारी, कैलाश सेंगर, श्रीराम ताम्रकर, मनमोहन सरल आदि के लेख थे। विनोद तिवारी ने खासतौर पर एक टिप्पणी लिखी थी। किशोर कुमार का अंतिम साक्षात्कार करने वाले वे अकेले संपादक थे।

अब पंद्रह-सोलह वर्ष बाद समाधि का कायाकल्प देखने को मिलता है। जन्मदिन चार अगस्त और पुण्यतिथि तेरह अक्तूबर यहां पूरे दिन किशोर कुमार के गाने मुरीदों और कलाकारों के कंठ से झरते हैं। लोग आते-जाते रहते हैं। पुण्यतिथि के दिन सम्मानित होने और गाने आने वाले कलाकारों की समाधि स्थल पर व्यग्रता से प्रतीक्षा होती है। किशोर कुमार अब दूर के राही हो चुके हैं। लेकिन छवियों में उनके साथ साक्षी होने और किशोर कुमार को याद करने का अवसर सबके लिए अनमोल होता है।

खैर, समाधि-स्थल पर उस दिन भीड़ थी, मेला-रेला सजा था और एक हरफनमौला को याद किया जा रहा था। इस बार पुण्यतिथि के कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार में किशोर कुमार के उपयोग में लाए गए अनेक छायाचित्रों के बीच एक चित्र बहुत सम्मोहित कर रहा था। उसमें किशोर कुमार हाथ में बांसुरी लिए खड़े हैं सफेद धोती-कमीज पहने। उनका चेहरा जैसे अनंत आकाश का बिंब रच रहा है। गहरे उद्वेलन की रेखाएं चेहरे पर नजर आती हैं। ध्यान आता है कि किशोर कुमार के व्यक्तित्व और उनके अपने बनाए सिनेमा में ‘दूर’ शब्द का अनेक बार इस्तेमाल हुआ है। मसलन, ‘दूर गगन की छांव में’, ‘दूर का राही’, ‘दूर वादियों में कहीं’! जरूर इस ‘दूर’ का अर्थ किशोर कुमार के जीवनकोष में बड़े मायनों के साथ छिपा होगा। उनके व्यक्तित्व पर लिखने वाले ज्यादातर लेखकों और विश्लेषकों की पक्षधरता उनके खिलंदड़े स्वभाव और उन बातों पर ठहर जाती है। क्या वही शख्स उस तस्वीर में कहीं पूरे अकेलेपन में खड़ा है बांसुरी लिए, जिसके चारों ओर हवा भी मौन थी है? समझना आसान नहीं है।

खंडवा रेलवे स्टेशन के सामने ही बॉम्बे बाजार है। सैकड़ों दुकानें, सड़क पर खासी चहल-पहल, छोटी-बड़ी गाड़ियों की आवाजाही। यहीं पर आसपास पच्चीस से ज्यादा दुकानों से घिरा कुंजीलाल गांगुली का घर है। सामने दरवाजे पर चिपके एक कागज पर लिखा है- ‘प्रतिबंधित क्षेत्र, प्रवेश वर्जित’। किशोर कुमार का यहीं जन्म हुआ था। इस घर को पहले कई बार पूरा देखने का मौका मिला है। लेकिन हर बार उसके धीरे-धीरे क्षरण का साक्षी भी हुआ हूं। आते-जाते लोग आज ज्यादा ठिठकते हैं। यह सूचना शायद इस बार ही दिखी। साल के इन्हीं दो दिनों में इस घर को किशोर कुमार के नाम का स्मारक या स्मृति केंद्र बनाने की मांग उठती है। यह काम असंभव-सा ही है। पुश्तैनी बंटवारे में यह घर किशोर कुमार के मंझले भाई अनूप कुमार के हिस्से में आया था। अनूप कुमार का भी कई वर्ष पहले निधन हो चुका है। उनके बेटे अर्जुन के पास इस घर का मालिकाना हक है। वे मुंबई में रहते हैं। कुछ समय पहले वे खंडवा आए थे। उनका इरादा इस घर का सौदा कर देने का है। निकट भविष्य में शायद ऐसा हो भी जाए। इस घर में किशोर कुमार की यादें सुरक्षित रहें, ऐसा अब लगता नहीं। खंडवा शहर की ख्वाहिशें भावुकता से भरी हैं। लेकिन यथार्थ निर्मम है। यों भी आसपास की कई दुकानों में पूरी तरह छिप और गुम हो चले इस घर के कुछ हिस्से को देख कर ऐसा लगता है कि स्मृतियों का सूर्यास्त दूर नहीं है। फिल्म ‘झुमरू’ में मजरूह सुल्तानपुरी के लिखे गीत की दो लाइनें याद आती हैं- ‘ऐ नजारों न हंसो, मिल न सकूंगा तुमसे, वो मेरे हो न सके, मैं भी तुम्हारा न रहा..’!

 

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- https://www.facebook.com/Jansatta

ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- https://twitter.com/Jansatta

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App