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संघर्ष का समय

मौजूदा दौर में एक तरह से जिंदगी की इबारत बदल रही है। शायद इसी को कालचक्र कहते हैं। निश्चित तौर पर अभी ऐसा कुछ हो रहा है, जिससे हम पहली बार रूबरू हो रहे हों या फिर जिसको लेकर सहज होना हमारे लिए बहुत मुश्किल हो रहा हो।

Indus vallyसांकेतिक फोटो।

कृष्ण कुमार रत्तू

मौजूदा दौर में एक तरह से जिंदगी की इबारत बदल रही है। शायद इसी को कालचक्र कहते हैं। निश्चित तौर पर अभी ऐसा कुछ हो रहा है, जिससे हम पहली बार रूबरू हो रहे हों या फिर जिसको लेकर सहज होना हमारे लिए बहुत मुश्किल हो रहा हो। कई बार हालात बेहद तकलीफदेह भी लगते हों। लेकिन यह समय भी बीत जाएगा। इतिहास में इस समय को मानव स्मृतियों के गहरे दुखांतमय समय के तौर पर देखा जाएगा, जब हम अपनी चारों तरफ जलती हुई चिताओं का मंजर देख रहे हैं।

मन को विचलित करने वाले दृश्य जिंदगी का कुरूप चेहरा दिखा रहे हैं। सच तो यह है कि इन दिनों जिस मरघट से हम गुजर रहे हैं, वह जिंदगी का बेहद स्याह पन्ना है। इन दिनों जब चारों तरफ महामारी की तबाही के कारण मृत्यु, लाचारी और बेचारगी का रुदन जारी है तो जिंदगी के जिंदादिली के अर्थों को कहां से ढूंढ़ लाएं, लेकिन जीवन की सच्चाई यही है कि न तो आदमी की नस्ल कभी खत्म होगी और न ही जिंदगी की रवानी। असल में जिंदगी जिन रंगों का कोलाज है, उन सबको महामारी की त्रासदी ने फीका कर दिया है, लेकिन जिंदगी है जो चल रही है और चलती रहेगी। चलना ही जिंदगी की गतिशीलता की निशानी है।

आखिर हम सब कभी किन्हीं वजहों से रुक जाते हैं और रुकना नहीं चाहते हैं तब भी शायद कुछ वक्त के लिए ही रुकते हैं। प्रकृति की गति निरंतर है और यह हमें ज्यादा देर तक रुकने नहीं देती। कुछ ही समय बाद हम अपने रुकने की जड़ता को तोड़ कर आगे बढ़ ही चलते हैं।

सत्य की पराकाष्ठा में जिंदगी नए आकार और नए भविष्य की नई तरंगों का एक खूबसूरत इंद्रधनुष है। आदिकाल से ही जिंदगी एक उत्सवमय त्योहार की तरह देखी जाती रही है। जिंदगी की यही परिभाषा जिंदा रहने का सबब और तरंगों की प्रक्रिया है। इस सच को इस तरह भी देखा जा सकता है जैसे कहा गया है कि उत्साह से उत्सव की दूरी सिर्फ संघर्ष ही नाप सकता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि जिंदगी को जीने का और जिंदा रखने का एकमात्र रास्ता आपकी कर्मठता और संघर्ष है, जो सिखाता है कि जिंदगी जीवट जीवंतता और जिंदा रहने के उत्साह का उत्सव समय है, जिसको मनाते रहना चाहिए, क्योंकि शोक में डूबा हुआ निजाम जिंदगी के रंगों को नहीं पहचान सकता। मनुष्य की दुनिया में संवेदना के स्थान ने इसे किसी अपने के जाने के बाद उसके लिए शोक का भाव भरा है। लेकिन दुनिया के चलते रहने के लिए किसी के चले जाने के बाद भी बचे हुए को चलते रहना जरूरी है। इसलिए इंसान के लिए शोक से उबरना और फिर नए सफर पर बढ़ चलना जरूरी होती है।

इस आपदा के समय में जब चारों ओर से बेचैनी और दुख की खबरें आ रही हैं, तब अपनी और अपने घर परिवार, दोस्तों, समाज और देश के लिए गहरे संतोष और उत्साह की प्रार्थना जीवन को संबल देती है। निराशा के इन क्षणों में आशा की किरणें अभी बाकी हैं और जिंदगी कभी रुकती नहीं है। ठहरा हुआ पानी कुछ देर ठहर सकता है, पर यह समय का चलन है कि यहां कुछ भी कभी भी रुकता नहीं है सब कुछ चलायमान है तो फिर चिंता, दुख, शोक, व्याकुलता, विवशता और असफलता का रोना-धोना किसलिए? इसका जवाब यह हो सकता है कि बहुत जतन से किए गए निर्माण के ध्वंस के बाद दुख होना स्वाभाविक है। लेकिन दुख में डूबे रह कर निर्माण नहीं किया जा सकता।

जबकि मनुष्य जीवन सभ्यताओं से गुजरते हुए निर्माण की बुनियाद के सहारे ही युगों को पार करता हुआ यहां तक पहुंच सका है कि अब उसने आपदाओं का सामना करना भी सीख लिया है। यही तो जीवन है जो सुख-दुख की पगडंडियों से खुशियों एवं रंगों भरी जिंदगी के रंगमहल की यात्रा की ओर ले जाता है। तो फिर उदास, निशब्द या मौन क्यों हों? चला जाए जीवन के रंगों की खोज में उत्साह की आकाशगंगा को देखते हैं। एक बार फिर से जीवन की शुरुआत करते हैं, जिसमें संघर्ष का उत्साह हो, जीने की ललक हो, रंगों की चमक हो। यही तो जीवन है। यही प्रकृति का स्वभाव है और इसी से दुनिया चलती है।

यह समय भले ही बेहद रुदन, पीड़ा और जीवन-मरण चुनौतियों के बीच सच्चाई का समय है, लेकिन इसने सिखाया भी है बहुत कुछ। इस समय में अगर हमने अपने गहरे अंतर्मन से अपने जीवन की अंतर्दृष्टि को साधते हुए अपने उत्साह और संघर्ष की सफलता से लबरेज सफर को जारी रखा तो फिर हम एक बार फिर जिंदगी की बाजी जीत जाएंगे। जीतना असल में जिंदगी की रंगों से भरी दीवानगी और उत्साह का आलम है तो फिर क्यों न संघर्ष और उत्साह के इन रंगों से फिर से आत्मसात करते हुए नए मानवीय सरोकार साकार करते हुए जिंदगी की जिंदादिली को सलाम करें। यह समय भी बीत जाएगा, संघर्ष और उत्साह के लम्हे जिंदगी को नई डगर पर चलायमान रखेंगे। तो फिर बस चलने की जरूरत है… सलाम जिंदगी!

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