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दुनिया मेरे आगेः सुरमयी जीवन

रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ पल तो ऐसे होने चाहिए, जिन्हें हम अपने शौक से जिएं और नीरसता से भरे जीवन को कुछ पल के लिए ही सही, अल्प विराम दे सकें।

मेरा इन गीतों से संबंध कोई नया नहीं बना है, बल्कि वर्षों पुराना है।

योगेश गुप्ता

जीवन में आमतौर पर हम गांधीजी के द्वारा कहे गए कथन को चरितार्थ होता हुआ पाते हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि मानव जीवन में सुखों के बजाय दुख की अधिक मात्रा है। अगर हम अपने जीवन की किसी भी बीती हुई अवस्था का मूल्यांकन करने बैठें तो सदैव जीवन को नीरसता, दुख, तनाव और कई तरह की चिंता से घिरा हुआ पाते हैं। हमारी यह सोच आज की प्रतिपल बदलती दुनिया में ज्यादा मुखर हुई है। इसमें दो राय नहीं कि इस अति प्रतिस्पर्धा के इस दौर में जीविकोपार्जन और अपनी अलग पहचान बनाने की होड़ में हम निरंतर तनाव और चिंता में घिरे रहते हैं, लेकिन इसी क्रम में हम जीवन के इन झंझावातों में उलझ जाते हैं और एक सकरात्मक जीवन जीना भूल जाते हैं।

रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ पल तो ऐसे होने चाहिए, जिन्हें हम अपने शौक से जिएं और नीरसता से भरे जीवन को कुछ पल के लिए ही सही, अल्प विराम दे सकें। गहन तनाव के बीच सुकून के इन पलों के मायने हरेक व्यक्ति के लिए अलग हो सकते हैं। कोई इन्हें स्वादिष्ट भोजन में या खूबसूरत किताबे में या मधुर संगीत आदि में ढूंढ़ता है। या फिर नकारात्मक आदत होने पर किसी नशे में या अन्य किसी बुरी लत में अपने लिए सुकून पाने की नाकामयाब कोशिश करने लगता है।
अगर मैं अपनी बात कहूं तो मुझे तो सुकून सदैव ही मंत्रमुग्ध कर देने वाले गीतों में मिला है। खासकर वे गीत जिनमें आवाज मेरे पसंदीदा गायक किशोर कुमार की हो, धुन आरडी बर्मन की और बोल गुलजार के। मेरे लिए इन गीतों का अनुभव मई की तपिश भरी दोपहरी में बारिश की कुछ बूंदों के गिरने जैसा होता है। कुछ पल के लिए ही सही, इन गीतों में डूबना न केवल तनाव को तत्काल कम कर देता है, बल्कि जीवन के प्रति नई आशा और जोश भर देता है। जरूरी नहीं कि मेरी पसंद सबकी पसंद हो। अगर किसी को गीत-संगीत में डूबना अच्छा लगता है तो उनकी पसंद अलग हो सकती है, लेकिन मेरा मानना है कि डूबने का आनंद जैसे मुझे आह्लादित करता है, सुकून देता है, वैसे ही सबको देता होगा।

मेरा इन गीतों से संबंध कोई नया नहीं बना है, बल्कि वर्षों पुराना है। चाहे वह बचपन में ग्वालियर की एक संकरी गली में एक कमरे के मकान में जीवन-यापन के संघर्ष का दौर हो या आज हरियाणा में एक सरकारी महकमे में कार्य करने की चुनौतियों के बीच, इन गीतों ने सदैव मुझे संबल दिया और ऊजार्वान बनाया। मसलन, जहां इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद चार वर्षों तक नौकरी पाने के लिए पुरजोर संघर्ष के दौरान ‘रुक जाना नहीं, तू कही हार के’ और ‘जीवन में तू डरना नहीं, सर नीचा कभी करना नहीं’ जैसे जोशीले और उत्साहवर्धक गीतों ने मेरा आत्मविश्वास नहीं डिगने दिया, वहीं पारिवारिक रिश्तों को जोड़ता गीत ‘मां का प्यार, बहन का प्यार’ या आने वाले जीवन साथी का खयाल ‘पल-पल दिल के पास’ और ‘ओ हंसनी, मेरी हंसनी’ जैसे गीत मन को रोमांचित कर देते थे। जब कभी परिवारिक विवादों से परेशान अपने मन को ‘ये जीवन है, इस जीवन का’ जैसे गीतों से संतुलित करता तो कभी अपनी नन्ही-सी गुड़िया की मुस्कान में ‘बचपन हर गम से बेगाना होता है’ जैसे गीतों में अपना बचपन खोजने लगता। और कभी-कभी उदास मन गीत ‘जिंदगी का सफर है ये कैसा सफर’ में जीवन की सार्थकता को तलाशने की कोशिश किया करता।

जब भी कभी जीवन की परिस्तिथियों से या अपनी विफलताओं से मन खिन्न होने लगता तो ये निर्मल और कोमल गीत एक सच्चे मित्र की तरह सदैव मुझे अपनी बाहों में भर लिया करते हैं और मैं उनसे अपना दुख साझा करके अपने मन को हल्का कर लिया करता हूं। लोगों के बजाय मेरा गीतों के साथ सान्निध्य की वजह शायद यह है कि इंसानों की तरह गीतों की आपस कोई अपेक्षाएं नहीं होती और वे आपको निरंतर खुशी ही देते रहते हैं। जैसे कि गीत में मुखड़े और अंतरे का मेल ही सुरमयी गीत को जन्म देता है, वैसे ही सुख और दुखों के मेल का नाम जिंदगी है। और अगर इसे सकारात्मक दृष्टिकोण की धुन मिल जाए तो जीवन सुरमयी गीत बन जाता है। गीतों में जिंदगी जीना और जिंदगी को गीत बना कर गाना, यह हमारे दृष्टिकोण पर निर्भर करता है।

आखिर जीवन में होने वाले तनाव से कोई भी अछूता नहीं है, चाहे वह किसी प्रतिष्ठित व्यापारिक घराने से ताल्लुक रखता हो या शिखर छूता कोई बॉलीवुड का सितारा या दिन-रात जिंदगी से जद्दोजहद करता हुआ आम नौकरी पेशा आदमी। कभी-कभी तो इन्हीं तनावों के बीच अतिसंवेदनशील व्यक्ति अपनी जीवन लीला समाप्त करने जैसा कठोर कदम भी उठा लेते हैं जो कि सर्वथा अनुचित है। हालांकि उनके दुखों से सरोकार रखा जाना चाहिए, लेकिन समस्याओं की कीमत एक जीवन का अंत नहीं हो सकता। समस्याएं वक्त के साथ दूर हो सकती हैं, लेकिन एक बार गया जीवन फिर कभी वापस नहीं मिल सकता। इसी तनावग्रस्त और उत्साहहीन होती जिंदगी के बीच अपने किसी भी शौक के लिए वक्त निकालना या रुचिकर कार्य करना कुछ और नहीं, तो जिंदगी को जीने योग्य बनाए रखने के लिए आवश्यक सकारात्मक ऊर्जा तो प्रदान कर ही सकता है।

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