ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे: सुकून का सफर

हाल में अनायास ही दिमाग में यह सवाल घूमने लगा कि आखिर आदमी है क्या! क्या हमारा जीवन एक आदमी से इंसान बनने का एक सफर भर है? हमें अपना जीवन किस प्रकार जीना चाहिए? मुझे लगा कि बिस्तर पर पीठ टिकाते ही जिसे गहरी नींद आने लगे, क्या वह इंसान मैं हूं? वह इंसान दुनिया का सबसे सुखी मनुष्य है, जिसे बिस्तर पर पीठ टिकाते ही नींद आ जाए!

Author November 10, 2018 3:05 AM
प्रतीकात्मक फोटो

विलास जोशी

हाल में अनायास ही दिमाग में यह सवाल घूमने लगा कि आखिर आदमी है क्या! क्या हमारा जीवन एक आदमी से इंसान बनने का एक सफर भर है? हमें अपना जीवन किस प्रकार जीना चाहिए? मुझे लगा कि बिस्तर पर पीठ टिकाते ही जिसे गहरी नींद आने लगे, क्या वह इंसान मैं हूं? वह इंसान दुनिया का सबसे सुखी मनुष्य है, जिसे बिस्तर पर पीठ टिकाते ही नींद आ जाए! दरअसल, बिस्तर पर उसी आदमी को तत्काल नींद आ सकती है, जिसके दिलो-दिमाग पर कल का बोझ न हो। जब वह बिस्तर पर पीठ रखता है और उसे नींद आती है, वही क्षण उसका वर्तमान होता है। जाहिर है, एक बार गहरी नींद आ जाने के बाद तो किसी को पता नहीं होता कि वह स्वप्नलोक में किस दुनिया में विचरण कर रहा है। कहते हैं कि जिन्हें बिस्तर पर लेटते ही नींद आ जाती है, उन्हें सपने में भी भय नहीं सताता। वे तो नींद में भी खुश रहते हैं। कवि रवींद्रनाथ ठाकुर ने कहा था कि ‘मनुष्य नवजात शिशु तुल्य है, विकास उसका बल है। विश्व बड़ा है, जीवन विश्व से बड़ा है और मनुष्य जीवन से बड़ा है।’ लेकिन यह सब जानते हुए भी क्या हम अपने विकास के रास्ते पर चल पाते हैं? जो लोग गहरी नींद लेकर सुबह जल्दी उठते हैं, वे अपने नए दिन का स्वागत भी खुशी के साथ करते हैं और प्रकृति ने हमें जो खुशी रूपी उपहार से नवाजा है, उसके लिए उसे धन्यवाद देते हैं। संत कबीर ने भी कहा था कि ‘सोवा साधु जगाइए, करे नाम का जाप/ यह तीनों सोते भले- साकित, सिंह और सांप।’ उन्होंने इसमें इंसान का उल्लेख नहीं किया, क्योंकि वे जानते थे कि केवल इंसान के पास ही विवेक है और वह इसका सदुपयोग करते हुए नींद लेता है और जागता भी है।

दरअसल, इंसान वह है जो भावनाओं के उतार-चढ़ावों पर भी अपनी लोकप्रियता को दांव पर नहीं लगाता। वह अपनी पत्नी और बच्चों के बीच खुश रहना जानता है। उसके बच्चों में लड़का है या लड़की, वह बराबर खुश है। उसकी जुबान पर मिठास होती है। वह टीवी चैनलों पर दिखाए जाने वाले तथाकथित बाबाओं की चामत्कारिक बातों में नहीं उलझता। वह कर्मकांडों से हमेशा दूर रहता है, क्योंकि वह कर्म के सिद्धांत को मानता है। वह जानता है कि बबूल का पेड़ लगाने पर उसे भविष्य में आम चखने को नहीं मिलने है। वह अपनी नौकरी या पेशा करता है और परिवार को ठीक से पालता है। वह थोड़े में भी अपना और अपने परिवार का गुजारा कर लेता है, लेकिन घर आए मेहमान का स्वागत दिल खोल कर करता है। वह विश्व भर में होने वाली घटनाओं, देश और अपने राज्य में चलने वाली राजनीति की भी जानकारी रखता है। इस वर्ष कितने इंच वर्षा हुई, मंडी में सब्जियों के क्या भाव चल रहे हैं, पेट्रोल के दाम क्यों बढ़ रहे है, सोना क्या भाव चल रहा है, शेयर बाजार में किस प्रकार का उतार-चढ़ाव चल रहा है। यह सब जानते हुए भी वह उनमें फंसता नहीं, बल्कि समयानुसार उनके साथ अपना सामंजस्य बैठाता है।

वह अपने पड़ोसियों के साथ सदैव अच्छे संबंध बना कर रखता है। उनके हर एक सुख-दुख में उनका साथ देता है। वह अपने एक-एक रुपए को आवश्यकतानुसार खर्च करता है और माह के अंत में कुछ रुपए बच जाए तो उनको इस प्रकार सुरक्षित रूप में जमा करके रखता है, ताकि भविष्य में अचानक बहुत अधिक जरूरी काम आने पर उसका उपयोग कर सके। वह अपने मकान में रहे या किराए के, हमेशा खुश रहता है। वह कभी दूसरों की खुशियों की तुलना अपनी खुशियों के साथ नहीं करता।

उसे अच्छा संगीत सुनना भाता है। वह इसे कभी न उतरने वाल नशा समझ कर उसमें खोना जानता है। वह अपनी छोटी-छोटी खुशियों में बड़ा आनंद खोजना जानता है। वह दिन भर अपने आपको सकारात्मक कार्यों में व्यस्त रखता है। वह जानता है कि ‘समय’ ही ‘सोना’ है। वह अपने समय को सुनियोजित ढंग से विनियोजित करते रहता है। रवींद्रनाथ ठाकुर ने कहा था कि ‘जल में मीन मौन है, पृथ्वी पर पशु-पक्षियों का कोेलाहल है, लेकिन मनुष्य में समुद्र का मौन है।’ वह अपने भीतर समुद्र का मौन रखने की महत्ता जानता है। वह अपना भाग्य चमकाने के लिए लॉटरी का टिकट न लेकर अपने दोनों हाथों से प्रयास करके आने वाले हर एक क्षण को सोना बनाता है। ऐसे आदमी को बिस्तर पर अपनी पीठ रखते ही नींद आती है। अगर कोई ऐसा इंसान नहीं है तो कोई बात नहीं। अभी से ही ऐसा सुखी और खुशनसीब इंसान बनने के प्रयास में लग जाने की जरूरत है। ऐसा इंसान बना जा सकता है, क्योंकि कुदरत ने हम सभी मनुष्यों को विवेक और बुद्धि के साथ दो हाथ भी बख्शे हैं, जिनका सकारात्मक उपयोग किया जा सकता है। शायद यही हमारा एक आदमी से एक इंसान बनने का सुखद सफर है। दरअसल, मैं उनमें से एक हूं, जिसे बिस्तर पर पीठ रखते ही गहरी नींद आ जाती है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App