ताज़ा खबर
 

प्यार की बोली

अरुणेंद्र नाथ वर्मा किसी टेलीफोन वार्तालाप के अंत में प्यार उड़ेलते हुए ‘लव यू, लव यू टू’ जैसे शब्द सबसे पहले अंगरेजी चलचित्रों में सुने थे। बाद में हॉलीवुड की फिल्मों के टेलीफोन संवादों में भी वे सुनाई पड़ने लगे। आमतौर पर नायक-नायिका को ही हर बार फोन वार्तालाप के अंत में एक-दूजे को अपने […]

अरुणेंद्र नाथ वर्मा

किसी टेलीफोन वार्तालाप के अंत में प्यार उड़ेलते हुए ‘लव यू, लव यू टू’ जैसे शब्द सबसे पहले अंगरेजी चलचित्रों में सुने थे। बाद में हॉलीवुड की फिल्मों के टेलीफोन संवादों में भी वे सुनाई पड़ने लगे। आमतौर पर नायक-नायिका को ही हर बार फोन वार्तालाप के अंत में एक-दूजे को अपने अनंत स्नेह का भरोसा दिलाने के लिए इस बैसाखी की जरूरत पड़ती थी। तब से अब तक गंगा में बहुत सारा पानी बह चुका है। प्यार का भरोसा दिलाने वाले इन शब्दों की जरूरत अब नायक-नायिका परिसंवाद की परिधि लांघ कर बहुत सारे मानवीय रिश्तों को परिभाषित करने लगी है। दूसरों के फोन संवाद चाहे-अनचाहे हर समय, हर जगह सुनाई पड़ने लगे हैं। ‘अहर्निशं सेवामहे’ वैसे तो भारतीय डाक-तार विभाग का ‘मोटो’ हुआ करता था, पर जब से सच्चे अर्थों में मोबाइल ने इस जिम्मेदारी को संभाल लिया है, दिन-रात कानों में मोबाइल लगाए लोग सड़कों पर, बसों, मेट्रो, रेलयात्रा में भीड़भाड़ से निर्लिप्त रह कर साथ वालों को बेधड़क अपनी बातचीत सुनने का पूरा अवसर देते रहते हैं। दूसरों की व्यक्तिगत बातचीत में अभद्र दिलचस्पी लेने का आरोपी न बनूं, इसलिए स्पष्ट कर दूं कि सफर करते हुए उन दीन-दुनिया से बेखबर लोगों की टेलीफोन पर बातचीत निष्प्रयास सुनाई पड़ती है। बात का विषय नितांत कामकाजी न हो और बातें करने वाले मानवीय रिश्तों से जुड़े हुए हों तो अब आमतौर पर वार्तालाप का अंत इन शब्दों के साथ सुनाई पड़ता है- ‘लव यू’ या फिर दूसरी ओर से मनुहार पहले ही कर दी गई है तो जवाब में ‘लव यू टू’।

मुझे अक्सर विस्मय होता है कि स्नेह सूत्र में बंधे दो लोगों को क्यों बार-बार विश्वास दिलाना पड़ता है कि वे एक दूसरे को प्यार करते हैं। मजे की बात कि ऐसा कहना उन रिश्तों में भी आम है, जिनमें सेंध लगने की संभावना नहीं या विरल होती है। युवाओं का दफ्तर में अपने किसी सहकर्मी से अगर स्नेह का नाता बना है तो खतरा असंभव नहीं। आखिर दफ्तर में और भी तो बहुत से प्रतिस्पर्धी हो सकते हैं, जिनकी मौजूदगी किसी अनचाहे खतरे का आभास बन कर सिर पर मंडराती रहती है!

एक के साथ टूट कर दूसरे के साथ सूत्र जुड़ जाना कोई ऐसी अनोखी बात तो अब रही नहीं। ऐसे संकट की संभावना से कातर मन में, हर दिन, हर घंटे, बल्कि हर कुछ मिनटों के बाद इस ‘लव यू’ और ‘लव यू टू’ वाली दवा की पुड़िया फांक लेने से कुछ तो हिम्मत बढ़ती ही होगी। डगमगाता हुआ विश्वास स्थिर होने की थोड़ी-सी आस तो लगाता होगा! शुद्ध मित्रता अगर सहजीवन के स्तर तक पहुंच चुकी है तो फिर ऐसे डर का और बढ़ जाना स्वाभाविक है। पर पति-पत्नी को भी हर बार एक दूसरे को विश्वास दिलाना पड़े कि जीवन भर साथ निभाने की कसम अभी भूली नहीं है, तो थोड़ा विस्मय अवश्य होता है। साथ-साथ जीने में टकराव की स्थितियां तो बनती-बिगड़ती रहती हैं। ऐसी ही किसी खटमिट्ठी खटपट की इससे मधुर परिणति क्या होगी कि ‘चलो जो हुआ सो हुआ’ के अंत में कहा जाए ‘लव यू’ और उत्तर में भी सुनने को मिले ‘लव यू टू’! लेकिन अगर हर संभाषण की यही टेक हो तो फिर क्या उन्हीं शब्दों का सारा अर्थ, सारा रस, सारी भावनाएं सूख कर चीमड़-सी नहीं बन जातीं? बार-बार हर वार्तालाप का अंत इन्ही शब्दों से करना क्या उन्हें एक अर्थहीन औपचारिकता में नहीं बदल देता?

अर्थहीनता की परम सीमा तो तब होती है जब प्रकृति के बनाए मधुरतम रिश्तों में बंधे लोग भी परस्पर अपने प्यार का भरोसा हर बार दिलाना आवश्यक समझते हैं। ऐसे रिश्ते जिनमें स्नेह की अजर-अमर, अविरल धार होती है संवादहीनता में भी मुश्किल से सूख सकते हैं, उन्हें इस बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति से क्या सींचना। क्या मां द्वारा बेटे से फोन पर बात करने के बाद ‘लव यू’ कहने और बेटे के मां को आश्वस्त करने के लिए ‘लव यू टू’ कहने में कोई सौंदर्य दिखता है, ममता बढ़ जाती है? हां, शैशव की देहरी पार कर चुके, मां-बेटों, बाप-बेटों के रिश्तों में कभी थोड़ी देर के लिए खटास आ जाए और उन स्थितियों से निपट लेने के बाद जब फिर से स्नेह सूत्र जुड़ जाएं तो उनके पुनरस्थापन पर इन शब्दों से लगी मुहर सार्थक होगी। प्यार का वृक्ष भी खाद-पानी मांगता है। उसे भी सींचना पड़ता है, अन्यथा सुदृढ़ रिश्ते भी मुरझाने लगते हैं। पर रिश्तों को सूखने से बचाने का इससे अधिक नीरस और कृत्रिम तरीका क्या होगा कि निहायत यांत्रिकता के साथ हर फोन संभाषण का अंत ‘लव यू’ और ‘आई लव यू टू’ से ही हो!

 

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- https://www.facebook.com/Jansatta

ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- https://twitter.com/Jansatta

 

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 हमसे स्कूल मत छीनो
2 भरोसे की राह
3 संगत का सिरा
ये पढ़ा क्या?
X