ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे: सड़क का सद्भाव

डूबते हुए को बचाना या आग में झुलस रहे किसी को बाहर निकालना या कोई किसी को लूट रहा हो तो सीना तान कर उसकी रक्षा के लिए पिल पड़ना जैसे साहसी कारनामे हमेशा से प्रशंसा का विषय रहे हैं। संकट के समय मददगार के रूप में सामने आए लोगों के सद्भाव को हमारा देश और समाज सराहता आया है।

Author January 26, 2019 3:23 AM
प्रतीकात्मक फोटो।

जब भी कहीं से आई कोई ऐसी खबर पढ़ता-सुनता हूं जो बताती है कि कोई सड़क पर तड़प रहा था और बचाव के लिए कोई आगे नहीं आया तो एक आंतरिक पीड़ा होती है। और अब तो यह भी है कि लोग दुर्घटना का वीडियो बनाते रहते हैं, पर आगे बढ़ कर मदद करने की बात अक्सर नहीं सोचते! पीड़ा और निराशा इसलिए भी होती है कि घर के बाहर पांव रखने पर जो सड़क सुरक्षा ‘अपरिचितों’ की ओर से मिलनी चाहिए, उसका अभाव हो रहा है। सड़क पर ट्रेनों-बसों में मिलने वाला सद्भाव ही मानवीय संवेदना का सुंदर रूप है, जहां यह भय नहीं सताता कि अगर कोई अनहोनी हमारे साथ घट जाए तो हम उसे अकेले झेल रहे होंगे, कोई हमारे साथ आकर खड़ा नहीं होगा। आखिरकार सबको यह सलाह क्यों दी जाती है कि ‘अमुक अमुक रास्ते से जाना, क्योंकि वह चलता हुआ रास्ता है।’ यानी तुम वहां अकेले नहीं होगे। वे दिन और दृश्य याद आते हैं, जब ट्रेनों में किसी बच्चे, स्त्री, या वृद्ध को छोड़ने आया कोई व्यक्ति किसी से कहता था कि भाई साहब जरा इनका ध्यान रखिएगा। जिससे यह कहा जा रहा होता था, सिर्फ वही नहीं, आसपास बैठे सभी यात्री यही कहते थे कि ‘आप चिंता न करें। इन्हें कोई तकलीफ न होगी।’

फिर वे दृश्य भी देखे और अब भी देखता-सुनता हूं जब आरक्षित सीटों पर भी कई बार महिलाओं, बुजुर्गों को आरक्षण के बावजूद बैठने नहीं दिया जाता। चलती ट्रेनों-बसों और रास्तों में स्त्रियां-लड़कियां अपने को सुरक्षित महसूस नहीं करतीं। सद्भाव का घटता ग्राफ चिंता में डालता है और ऐसे में आशंकाओं का बढ़ जाना भी स्वाभाविक है। ऐसी भी खबरें आती हैं कि मदद का आश्वासन देकर वास्तव में किसी को ठग लिया गया। यह हाल तब है, जब ट्रेनों-बसों में सुरक्षाकर्मी भी तैनात रहते है और पुलिस की गाड़ियां सड़कों पर गश्त लगाती रहती हैं।

सच्चाई यह है कि वास्तविक या ‘पहले’ सुरक्षाकर्मी तो वे होते हैं या होने चाहिए, जो आपकी बगल में खड़े होते हैं या आपकी तरह सफर कर रहे होते हैं। पर अब आमतौर पर इस बात पर बहुतों को भरोसा नहीं होता कि जो ‘अनजान’ आपके आसपास दिख रहा है, वह जरूरत पड़ने पर पलक झपकते ही आपकी मदद के लिए आगे आ जाएगा। कुछ दिनों पहले ही यह खबर पढ़ी थी कि एक इंजीनियर गाड़ी में आग लगने के कारण कार में ‘लॉक’ हो गया। दरवाजे-खिड़कियां गाड़ी के बंद हो गए। वह दस मिनट तक हॉर्न बजा कर मदद के लिए लोगों को पुकारता रहा, पर लोग आगे आने की बजाय वीडियो बनाने में व्यस्त रहे। उसकी जान चली गई।

ऐसी खबरें हम अक्सर अखबारों में पढ़ते हैं या टीवी चैनलों पर देखते-सुनते हैं और चिंतित होते हैं। गनीमत यही है कि ऐसी खबरों को आईना दिखाती हुई वे खबरें भी आती हैं, जब किसी परिचित/अपरिचित के साथ कोई ‘दुर्व्यवहार’ या अन्याय देख कर कोई आगे आया, उसका प्रतिकार किया और यह खतरा उठाते हुए कि इससे उसे कोई नुकसान पहुंच सकता है, उसने अपना कर्तव्य निभाया।

डूबते हुए को बचाना या आग में झुलस रहे किसी को बाहर निकालना या कोई किसी को लूट रहा हो तो सीना तान कर उसकी रक्षा के लिए पिल पड़ना जैसे साहसी कारनामे हमेशा से प्रशंसा का विषय रहे हैं। संकट के समय मददगार के रूप में सामने आए लोगों के सद्भाव को हमारा देश और समाज सराहता आया है। यह तो सभी जानते हैं कि बिना ‘सड़क-सद्भाव’ से दुनिया की गाड़ी चल नहीं सकती है। अगर किसी की गाड़ी खराब हो गई है और वहां से गुजरने वाली गाड़ियों में से कोई मदद के लिए न रुके तो वह आगे खिसकेगी कैसे! जो महात्मा गांधी निडर अपनी राह चले और जीवन के हर क्षेत्र में सद्भाव की ही बात करते रहे, वे भी तो एक जबरदस्त प्रेरक हैं!

यह ‘सड़क-सद्भाव’ एक चौकन्नापन भी मांगता है। यह इच्छा तो मांगता ही है कि हम किसी को मुसीबत में देखें तो उसकी अनदेखी करके आगे नहीं बढ़ जाएंगे, संभव सहयोग का प्रयास करेंगे। ‘सद्भाव’ वैसे तो मानव स्वभाव में निहित है, क्योंकि जब हम किसी को संकट में पड़ा हुआ देख कर आगे बढ़ते हैं तो उस आगे बढ़ने के पीछे यह बात भी रहती ही है कि ऐसा संकट कभी हम पर भी आ सकता है! दरअसल, हममें से लगभग हर एक के पास ऐसे किस्से बताने-सुनाने को होते हैं, जब हमारी मदद के लिए कोई आगे आया, और हम भी किसी घटना-दुर्घटना के समय किसी की मदद करने को स्व-प्रेरित होकर आगे बढ़े!
‘सड़क-सद्भाव’ समाज-हित और परहित में तो कारगर है ही, उसके कारण हम स्व-हित भी कर पाते हैं। उससे एक ऊर्जा भी मिलती है न!

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App