डर की परतें

सकारात्मक डर जीवन के लिए लाभकारी होता है और नकारात्मक डर जीवन को हानि पहुंचाने वाला होता है।

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अरुणा कपूर

समाज के विकास क्रम में साहस और डर की अपनी जगह रही है। यों आगे की ओर बढ़ने के लिहाज से डर को एक प्रतिगामी भाव माना गया है और काफी हद तक यह सही भी है, लेकिन इसकी अपनी अहमियत रही है। दरअसल, अगर भाव की परतों में बांटें तो डर भी सकारात्मक और नकारात्मक, यानी दो प्रकार के होते हैं।

सकारात्मक डर जीवन के लिए लाभकारी होता है और नकारात्मक डर जीवन को हानि पहुंचाने वाला होता है। उदाहरण के तौर पर देखें तो बच्चों में अनुशासन का भाव जगाने के लिए कुछ दशकों पहले परिवार के किसी बड़े व्यक्ति के डर का प्रयोग किया जाता था। मसलन, तेज स्वर में जब बच्चे के दादा जी उससे पूछते थे कि स्कूल का होमवर्क किया कि नहीं, तब बच्चा अदब से कहता था कि मैंने होमवर्क कर लिया है और क्या अब मैं खेलने जा सकता हूं।

यानी बच्चे को दादा जी के गुस्से और डांट से बचने के लिए होमवर्क पहले से ही करके रखना पड़ता था और दादा जी को संतुष्ट करने के बाद वह खेलने जा सकता था। नतीजतन, बच्चों को खेलने जाने से पहले स्कूल का होमवर्क करने की आदत हो जाती थी और इस वजह से शिक्षा के प्रति उनका रुझान भी बढ़ता रहता था। इसी तरह रात को नियत समय पर सोने, सुबह नियत समय पर उठने, रोजमर्रा के कार्य नियत समय पर करने वगैरह अनुशासन की शिक्षा भी मां की या पिता की डांट पड़ने का खयाल रहता था। कहने का मतलब यह है कि बड़ों के ‘डर’ से बच्चे जीवन की आम बातें आत्मसात कर लेते थे, जिससे उनकी जीवनशैली सरल और तनाव रहित रहती थी।

साथ में स्वास्थ्य भी अच्छा रहता था। इसलिए इसे सकारात्मक डर के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि मनोविज्ञान के क्षेत्र में काम करने वाले यही सब आदतें बिना किसी डर के भी विकसित करने की बातें करते रहे हैं।
बहरहाल, अपने यहां के परिवेश को देखें तो इसके मुताबिक कई बातें अलग मिलती रही हैं। प्रतिस्पर्धी के आगे निकल जाने का ‘डर’ भी परीक्षा देने के लिए कड़ी मेहनत करने के किए विद्यार्थियों को प्रेरित करता रहा है।

इससे इतर सभी धार्मिक परंपराओं में बुरी आदतों से दूर रहने, शांतिपूर्ण व्यवहार करने और आपस में मित्रता का भाव रखने की शिक्षा दी गई है। ईश्वर या परम पिता का ‘डर’ हर धर्मग्रंथ में वर्णित है। बुरे कर्म करने वाले मनुष्यों को मृत्यु के बाद उनके धर्म के अनुसार नरक या जहन्नुम में स्थानांतरित हो जाने का ‘डर’। इस तरह की बातें बता कर बुरे कर्म करने से रोकने का काम करने की कोशिश की जाती थी। मकसद यह था कि इससे कि अपराधों में कमी आ सकेगा।

इसी तरह मनुष्यों को किसी भी विकट समस्या से परेशान होकर आत्महत्या न करने की सलाह भी ‘डर’ के सकारात्मक माध्यम से ही दी गई है। कहा गया है कि आत्महत्या करके मृत्यु पाप्त होने वाले जीवों को सद्गति नहीं मिलती और वह पाप का भागीदार बनता है। इसलिए आत्महत्या करना बुरा कार्य है। यह ‘डर’ भी मनुष्यों का मानसिक संतुलन बनाए रखने और आत्महत्या जैसा गलत कदम उठाने से रोकने में मददगार साबित हुआ है। हालांकि मन और परिस्थितियों के आकलन और संघर्ष की परिपक्व समझ भी बिना डर के आत्महत्या जैसे भाव से मुक्त कर सकती है।

मनुष्य जब जंगली अवस्था में था और जंगल में रह कर ही गुजर-बसर करता था। तब वह जंगल में रहने वाले शेर, चीते जैसे खूंखार जानवरों से डरा रहता था और अपने आप को बचाकर रखने की तरकीबें ढूंढ़ता रहता था। इन्हीं खूंखार जानवरों से बचाव के लिए उसने पहले साधारण और बाद में मजबूत घर बनाने शुरू किए।

अग्नि का आविष्कार भी पहले जंगली जानवरों से बचने के लिए और बाद में खाना पकाने के लिए हुआ। यानी डर की वजह से पैदा जरूरतों का सिरा सभ्यता के विकास क्रम से जुड़ जाता है। तेज धूप, बारिश और कड़ाके की ठंड से भी मनुष्य जीवन पर खतरा मंडरा रहा था। यह भी ‘डर’ का कारण बना और इससे बचने की जरूरतों के बाद मनुष्य पक्के मकान बनाने और कपड़ों का आविष्कार करने के लिए प्रेरित हुआ। कई तरह के हथियार भी मनुष्य ने बनाए। ‘डर’ था कि कहीं से शत्रु ने आक्रमण कर दिया तो क्या किया जाएगा!

आत्मसात किए हुए ज्ञान के नष्ट होने के ‘डर’ ने पहले अक्षरों को और बाद में लेखन कार्य को जन्म दिया। जिससे आगे चल कर पुस्तकें लिखी और संजोई गर्इं। आज हम पुरातन काल के बारे में इन्हीं पुस्तकों के माध्यम से बहुत कुछ जानते हैं! हमारे आगे बढ़ने में यही पुस्तकें सहायक बनी हुई हैं। साहित्य, कला और वैज्ञानिक आविष्कारों के नष्ट होने का ‘डर’ हमारे पूर्वजों को न होता तो आज हम इस सभ्यता के मुकाम तक पहुंचे न होते। हम वही आदि मानव होते, जो जंगलों में रहते थे और फल, कंद-मूल खाते थे। इस तरह देखें तो नकारात्मक डर ने जहां कई बार मनुष्य की सेहत और जीवन को जोखिम में डाला है, स्वाभाविक मानसिक विकास को बाधित किया है, वहीं सकारात्मक डर ने उसके जीवन को सहज बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।

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