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दुनिया मेरे आगे: अपना भरोसा

स्टीफन हाकिंग्स इतनी आधी-अधूरी देह के बाद भी संसार के लिए मिसाल बन गए।

Author Published on: January 11, 2020 2:09 AM
अलबर्ट आइंस्टीन कहते थे कि हमारे पास सीमित ऊर्जा होती है।

हमारी एकमात्र वास्तविकता हमारा वर्तमान है। जो पल हमारे सामने है, बस यही हमारे पास है। हमें अपने आप से यह सवाल जरूर पूछना चाहिए कि हम अपने पलों को कैसे बिताते हैं। हम ऐसा क्या कर रहे हैं कि हमारा यह पल सार्थक हो रहा है। हम हरेक पल में सकारात्मक होकर आगे बढ़ रहे हैं। अपने किसी लक्ष्य की तरफ बढ़ रहे हैं या उसको नजरअंदाज कर रहे हैं। हमारे भोगे हुए पल हमको प्रसन्न कर रहे हैं या नहीं। हमें इन सब पर विचार करना चाहिए। एक कहावत है कि सपने में मधुमक्खी का छत्ता बनाने वाले का शहद हमेशा छत्ते सहित गायब हो जाता है। मोम भी बाकी नहीं रहता।

अलबर्ट आइंस्टीन कहते थे कि हमारे पास सीमित ऊर्जा होती है। हमें कई बार अजीबोगरीब लोग मिलते हैं। उनसे संवाद के समय हमें अपनी ऊर्जा का उपयोग समझदारी से करना चाहिए, क्योंकि अगर आप उलझ गए तो वे आपकी ऊर्जा को निचोड़ लेंगे। आपका अमूल्य समय पानी की तरह बह जाएगा। बचा रह जाएगा सिर्फ अफसोस। यह एक ऐसी स्थिति है जहां सतर्कता बहुत सहयोग करती है। स्पेन के मशहूर लेखक मिगेल, जिनका पूरा नाम मिगेल डी सर्वांतेज है, उन्होंने जीवन भर बेहद उठा-पटक झेली और बगैर किसी गलती के पांच साल से ज्यादा उन्हें नजरबंद भी रहना पड़ा खतरनाक समुद्री डकैतों के चंगुल में। मगर उनका जुझारूपन कभी कम नहीं हुआ। साठ साल की उम्र पार करने के बाद उन्होंने ‘डान किहोटे’ नामक उपन्यास लिखा। इस उपन्यास को पश्चिम का पहला आधुनिक शैली का उपन्यास कहा जाता है। स्पेनिश भाषा को इस उपन्यास ने पहचान दिलाई। हमारी कामयाबी अपनी ताकत यानी आत्मबल को बनाए रखने में है।

दरअसल, कुछ लोग इतने प्रतिभावान होते हैं कि बहुत कुछ कर सकते हैं, मगर वे अपने जीवन मूल्य बनाते ही नहीं। उत्साह को महसूस ही नहीं करते। दिन आराम से कट रहे हैं तो वे अपनी गति, लय, निरंतरता- सब रबर बन कर मिटा देते हैं। हम सुविधाओं में डूबे रहना चाहते हैं, जबकि सच तो यह है कि बहुत सुख, आराम, वैभव भी हमें उदासी से भर देता है। हम सब एक गुण लेकर इस संसार में आए हैं और उसका नाम है खुद को प्रस्तुत करना। कला, साहित्य, विज्ञान, संगीत- किसी भी तरह हम खुद को अभिव्यक्त कर सकते हैं। सोच और विचार हमें कुछ अनूठा करने की सूझ दे सकते हैं। तितलियां कहती हैं कि हमसे मिलने की चाहत है तो जंगल में चले आओ।

पर्वत हमसे कदमों के निशां ही तो मांगते हैं। इसलिए हमें अपनी विलासिता पर इतना आश्रित नहीं होना चाहिए कि बाद में हमारा मन अवसादों का स्थायी घर बन जाए। इस तरह हम हौले-हौले कठपुतली बनने लगते हैं। इससे ज्यादा भयानक और कुछ भी नहीं, क्योंकि हमें अपने हौसले की भी खबर नहीं रहती। हमारा अस्तित्व बिखरने लगता है। हम फिर किसी और सहारे के पीछे-पीछे भागने लगते हैं। हम इस संसार में क्या होने आए थे और क्या होकर निकल लेते हैं।

हममें से शायद सभी को यह बात मालूम न हो कि जीवन की इस यात्रा में कितने महान लोग जन्मजात रुकावट के बावजूद आगे बढ़ते रहे। वात्सल्य रस के विश्वविख्यात कवि सूरदास दृष्टिहीन थे। विंस्टन चर्चिल साफ नहीं बोल पाते थे, हकलाते थे। महान दार्शनिक सुकरात दिखने में कुरुप माने जाते थे और उनका पारिवारिक जीवन बहुत ही कलहपूर्ण रहा। महान शायर मिर्जा गालिब के सिर से बचपन में ही माता-पिता का सहारा नहीं रहा। महान वैज्ञानिक हेलन केलर कितनी शारीरिक अक्षमता के बाद भी सर्वोच्च काम करती रहीं।

स्टीफन हाकिंग्स इतनी आधी-अधूरी देह के बाद भी संसार के लिए मिसाल बन गए। इन लोगों ने अपनी कमियों का रोना-पीटना करने में समय बर्बाद नहीं किया और जीवन के सुंदर हार में अपने हर पल को मोती की तरह पिरो लिया। हमारा जीवन मंत्र यह होना चाहिए कि हम उन लोगों, उन परिस्थितियों, चीजों को बिल्कुल भूल जाएं, जिनसे हमें किसी तरह का नुकसान, दर्द, परेशानी मिली। इस तरह हम मुश्किल वक्त में भी अपना मानसिक संतुलन न खोएं। इसका सकारात्मक और सुखद परिणाम यह होगा कि हम बेहतरीन बातों का खुल कर स्वागत कर सकेंगे।

एक शोध के अनुसार पूरी दुनिया में सिर्फ बारह प्रतिशत लोग पूरी तरह से जागरूक, सजग हैं और संतुष्ट भी। मतलब साफ है कि संसार में सफलता के तमाम साधनों के बावजूद मानव पूरी तरह पूर्ण नहीं है। वह बहुत सारे काम अनमने ढंग से कर रहा है, मगर कुछ पसोपेश में है। इसीलिए आत्महत्या की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में हम सबका यह दायित्व बन जाता है कि अपना उपयोग दूसरों को भी करने दें। अपनी सहानुभूति, समय, धन, दुआ कुछ भी है, उसे अपने तक ही सीमित न रखें। हौले-हौले चाहे छोटा ही सही, मगर रोशनी की तरफ कदम तो बढ़ेगा ही। अपने आप को संपूर्ण बनाने के लिए हमें खुद की ही जरूरत है- शिष्य भी हम और गुरु भी।

पूनम पांडे

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