ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे – खुद की पहचान

हमारे लिए यही जरूरी है कि हम आत्मनिरीक्षण करें। खुद को पहचानें व अपनी क्षमता का सही उपयोग करें। जो मुमकिन है और किया जा सकता है वह हम पूरी ताकत, एकाग्रता व क्षमता से व सौ फीसद ईमानदारी से करें और असफल होने के बाद भी प्रयास करते रहें। एक दिन कामयाबी जरूर मिलेगी।
प्रतीकात्मक तस्वीर।

सभी लोगों में कुछ न कुछ करने की क्षमता होती है। यह तो बहुत-से लोग जानते हैं कि वे क्या कर सकते हैं। पर यह बोध बहुत कम लोगों को रहता है कि वे क्या नहीं कर सकते। खुद को पहचान पाना एक नियामत है और बहुत कम लोग खुद को यानी अपनी क्षमता को पहचान पाते हैं। आप क्या कर सकते हैं और क्या नहीं, यह आपके अलावा भला और कौन जान सकता है। पर होता यही है कि औरों की देखादेखी हम भी वहीं करने लगते हैं जो अन्य लोग कर रहे हैं। औरों की कामयाबी देख यदि हम भी उसी राह पर चलने लगें तो यह भेड़ियाधसान तो समझदारों का काम नहीं है। हम यह तो देखें कि इसके लिए हममें जरूरी काबिलियत भी है या नहीं।

यदि एक व्यक्ति कंप्यूटर साइंस में अच्छा कर रहा है या अच्छा डॉक्टर अथवा वकील या कलाकार है तो सभी उसकी देखादेखी वैसे नहीं हो सकते। पर त्रासदी यही है कि कुछ लोग यह तो जानते हैं कि वे क्या कर सकते हैं, पर यह नहीं जानते कि वे क्या नहीं कर सकते। पर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो भले ही यह न जानें कि वे क्या कर सकते हैं, पर यह जरूर जानते हैं कि वे क्या नहीं कर सकते। ऐसे ही लोगों को ध्यान में रख कर अंग्रेजी के आलोचना शास्त्र में ‘निगेटिव कैपेबिलिटी’ के सिद्धांत का उपयोग किया गया है। अकसर ऐसे लोग ही तरक्की करते हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो न तो यह जानते हैं कि वे क्या कर सकते हैं और न ही यह जानते हैं कि वे क्या नहीं कर सकते। ऐसे लोगों के साथ मेरी सहानुभूति है! साहित्य का ही उदाहरण लें। कई वरिष्ठ व स्थापित कवि छंद के अच्छे कवि थे और उनकी साख व ख्याति भी थी। पर चलन को देख कर वे मुक्तछंद व गजल तथा हाइकू भी लिखने लगे। पर इन क्षेत्रों में वे अधकचरे ही साबित हुए। वे न जाने क्यों यह भूल गए कि सभी लोग सभी कुछ नहीं कर सकते। यही बात अन्य क्षेत्रों में भी देखने को मिलती है। मसलन आक्रामक शैली का बल्लेबाज रक्षात्मक तथा रक्षात्मक शैली का बल्लेबाज आक्रामक शैली से नहीं खेल सकता और न ही उलटे हाथ का गेंदबाज सीधे हाथ से व सीधे हाथ का गेंदबाज उलटे हाथ से गेंदबाजी कर सकता है। स्टंट करने वाले कलाकारों की नकल में कई लोग घायल हुए हैं। तभी चेतावनी दी जाती है कि ये करतब पेशेवर लोगों द्वारा किए गए हैं व आम लोग उनकी नकल न करें। पर लोग भूल जाते हैं कि नकल में भी अक्ल की जरूरत होती है।

हमारे लिए यही जरूरी है कि हम आत्मनिरीक्षण करें। खुद को पहचानें व अपनी क्षमता का सही उपयोग करें। जो मुमकिन है और किया जा सकता है वह हम पूरी ताकत, एकाग्रता व क्षमता से व सौ फीसद ईमानदारी से करें और असफल होने के बाद भी प्रयास करते रहें। एक दिन कामयाबी जरूर मिलेगी। पर हम जो नहीं कर सकते और हो ही नहीं सकता व किया ही नहीं जा सकता उसे करने की कोशिश में अपना समय व ताकत जाया न करें। कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। महत्त्वपूर्ण यह है कि वह कितनी अच्छी तरह किया जाता है। और इसके लिए व्यक्तिमें अपेक्षित क्षमता, लक्ष्य के प्रति समर्पण, निष्ठा व प्रतिबद्धता भी होनी चाहिए। अत: आत्मावलोकन व ईमानदारी से स्वयं का मूल्यांकन करना जरूरी है। आत्मनिरीक्षण हमें अपनी असली क्षमता को पहचानने में मदद कर सकता है। एक क्षेत्र की असफलता से दुनिया का रास्ता बंद नहीं हो जाता बल्कि पता चलता है कि अन्य क्षेत्र भी हैं और संभव है किसी अन्य क्षेत्र में सफलता रास्ता देख रही हो।

वे दिन गए जब खानदान के सभी लोग एक ही काम में लगे रहते थे। पारिवारिक एकाधिकार के मामले में क्षमता या योग्यता का सवाल ही नहीं उठता। मगर दूध वाले व किराने वाले का बेटा भी वही करे जो पिता करते रहे यह जरूरी नहीं। अधिकतर लोगों ने धंधा बदल दिया है यानी अधिक खुलापन आया है व लोग अपनी क्षमता पहचानने लगे हैं। खानदानी धंधे में घर के अकुशल बल्कि नाकारा व्यक्ति को भी काम मिल जाता था व वह दुकान पर बैठने लगता था। पर आज की व्यावसायिक दुनिया में केवल कुशल, योग्य व हुनरमंद व्यक्ति के लिए ही अवसर व काम है। जो अपने हुनर में श्रेष्ठ हो उसे कभी कोई दिक्कत नहीं आती। कोई डॉक्टर या वकील या कलाकार हो या छोटा-मोटा काम करने वाला मामूली आदमी, उसकी सभी ओर पूछ है। ऐसे लोग वे ही हो सकते हैं जिन्होंने अपनी क्षमता को पहचाना हो और जो यह बात अच्छी तरह जानते हों कि वे क्या कर सकते हैं और क्या नहीं।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.