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दुनिया मेरे आगे- सुविधा के संबंध

हम तो बचपन के दोस्त रहे हैं!’ तब उनका यही कहना था कि ‘आजकल संबंध जरूरत के हिसाब से ही तय होते हैं।’

Author June 12, 2017 05:34 am
प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रदीप उपाध्याय

मेरे एक मित्र हाल ही में बड़े सरकारी ओहदे से सेवानिवृत्त हुए तो मैंने सोचा कि करीबी मित्र होने के नाते सौजन्य-भेंट कर लेना चाहिए। मैंने तुरंत अपने एक अन्य मित्र को फोन लगाया, क्योंकि स्कूल के दिनों से हम तीनों की घनिष्ठ मित्रता थी। यानी इसे ‘दांत काटी रोटी’ के संबंध कह सकते हैं। लेकिन समय की अपनी चाल है, रफ्तार है। कॉलेज तक तो साथ रहे, लेकिन बाद में हम तीनों की राहें बदल गर्इं। इसलिए जब मेरे मित्र सरकारी ओहदेदार मित्र से मिलने के लिए मुझ पर जोर डालते तब मैं टाल जाता था, क्योंकि ऊंचे पद पर पहुंच कर व्यक्ति की प्राथमिकताएं बदल जाती हैं और अगर सामने वाला समय न दे पाए तो लगता है कि उसमें घमंड आ गया है। या फिर व्यवहार में कुछ रूखापन या औपचारिकता ही परिलक्षित हो जाए, तब भी लगता है कि अब दोस्ती में वह बात नहीं रही। फिर भी मेरे मित्र ने उनसे नजदीकी बनाए रखी, क्योंकि उनके अपने निजी स्वार्थ थे।

खैर, जब मैंने अपने मित्र को फोन पर उनसे मिलने के लिए चलने को कहा तो उनकी बात सुन कर मैं सकते में आ गया। उन्होंने कहा कि ‘अरे, अब उनसे संबंध बनाए रखने से क्या लाभ! अब वे पावर में भी नहीं रहे। अब वे कोई काम करवा सकेंगे, इसमें मुझे संदेह है। भले ही उनके संपर्क अभी भी बने हुए हैं, लेकिन रिटायरमेंट के बाद किसको कौन पूछता है।’ मैंने जवाब में कहा कि भाई, हमारी दोस्ती उसके पद या प्रतिष्ठा के कारण नहीं थी! हम तो बचपन के दोस्त रहे हैं!’ तब उनका यही कहना था कि ‘आजकल संबंध जरूरत के हिसाब से ही तय होते हैं।’ उनका जवाब सुन कर मैं निरुत्तर हो गया। इसी तरह, मेरे एक परिचित के रिश्तेदार राज्य सरकार में बहुत ऊंचे ओहदे पर थे और शासन में उनकी अच्छी-खासी पहुंच भी रही। मेरे परिचित जहां भी जाते, अपने परिचय के साथ अपनेरिश्तेदार का जिक्र करना कभी नहीं भूलते थे। इसका एक फायदा यह भी रहता कि उनकी अपनी सरकारी नौकरी पर कोई आंच नहीं आती और उनके अफसर और मातहतों पर भी प्रभाव जमा रहता। जैसे ही उनके रिश्तेदार सेवानिवृत्त हुए, उन्होंने उनका जिक्र करना बंद कर दिया और मिलना-जुलना भी सीमित कर दिया।

ये कुछ उदाहरण मात्र हैं। ऐसे अन्य अनेक लोग आपको मिल जाएंगे, जहां संबंध काम और आवश्यकता के आधार पर बनते-बिगड़ते हैं। कहा भी जा रहा है कि ‘जरूरत खत्म, रिश्ता खत्म’। यानी आजकल लोगों में आत्मीयता की कमी होती जा रही है, संबंधों में भावनाएं कम होती जा रही हैं। चाहे रिश्तेदारी हो, दोस्ती हो या फिर पास-पड़ोस का मामला। हालत यह होती जा रही है कि हम आसपास रहने वालों के नाम तक नहीं जानते। कॉलोनी में कौन रह रहे हैं, क्या काम करते हैं, किनके कितने बच्चे हैं, परिवार में कौन-कौन हैं, यह सब जानकारी एक दूसरे को नहीं रहती। पहले गली-मोहल्ले तो ठीक, गांव-कस्बे के लोगों की पूरी-पूरी जानकारी रहती थी। लोगों में बहुत ही अपनत्व का भाव था। मिलजुल कर रहना, एक दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनना लोगों का सहज गुण था। किसी को बताने या सिखाने-पढ़ाने की आवश्यकता ही नहीं रहती थी। लेकिन अब हमें अपने बच्चों को भी बताना पड़ता है और कहना पड़ता है कि ये अंकल-आंटी फलां-फलां हैं और फलानी जगह रहते हैं। बच्चों की भी परिचय बढ़ाने में कोई ज्यादा उत्सुकता नहीं रहती।

संबंध रखने, दोस्ती बढ़ाने, रिश्ते कायम करने में पद-प्रतिष्ठा, स्तर, हैसियत देखी जाने लगी है। आप चाहे कितने ही गुणी हों, अगर किसी महत्त्वपूर्ण पद पर नहीं हैं, समाज में आपकी मान-प्रतिष्ठा प्रचारित नहीं है, आपकी जीवनशैली साधारण दर्जे की है तो आपके मित्रों की संख्या गिनती की होगी, आपसे रिश्ता बताने वालों की संख्या नगण्य होगी। आपको ही लोगों से रिश्ता बताने के लिए आगे आना होगा। यहां तक देखा गया है कि साधारण या निम्न स्तर का जीवनयापन करने वालों से किसी तरह का रिश्ता-नाता रखना या बताना अपनी तौहीन माना जाने लगा है। दूसरी ओर, यह भी विकट स्थिति है कि अगर दूर का रिश्तेदार या परिचित उच्च पद पर है या फिर विधायक, सांसद है या अन्य कोई महत्त्वपूर्ण पद संभाले हुए है तो उससे संबंध बताने में लोग बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेंगे। भले ही वे कोई पूछ-परख भी न करते हों। वहीं जो पूछ-परख करने वाले हों, लेकिन साधारण हों तो उनकी तरफ कोई ध्यान भी नहीं देता। हमारे समाज में ऐसी विषमतापूर्ण स्थिति बनती जा रही है। संबंधों को लाभ-हानि की तुला पर नहीं तौला जाना चाहिए, क्योंकि जो उच्च स्थान पर है तो मान-सम्मान भी उसी का होगा, न कि बताने वाले का। जो बात भावनात्मक संबंधों और रिश्तों की है, वह नफा-नुकसान वाले रिश्तों में कहां! हमें इस मानसिकता को बदलना होगा। जो रिश्ते स्वार्थ पर आधारित हों, उनकी अवधि सीमित होती है। जमीनी रिश्ते स्थायी और सुकून देने वाले होते हैं।

 

 

 

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