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दुनिया मेरे आगे- आधारशिला

मेरी एक परिचित लड़की है शोभा। अपने पति के साथ उसके संबंधों में इतनी तल्खी आ गई कि उसके सास-ससुर ने उसके माता-पिता को अपनी लड़की वापस ले जाने का फरमान जारी कर दिया।
प्रतीकात्मक चित्र।

किसी भी संबंध के टूटने की जो पीड़ा होती है, उसे बयान करना बेहद कठिन है। पति-पत्नी के बीच रिश्ते की कड़ी बहुत नाजुक और महीन होती है। आजकल हम देख रहे हैं कि पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातें बढ़ कर बड़ा ही विचित्र-विकराल रूप धारण कर लेती हैं। और फिर रिश्तों में मतभेद गहराता जाता है। फिर वही रिश्ता हाशिये पर आ जाता है और लोगों को पता ही नहीं चल पाता। सही है कि मनुष्य ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रगति की नई ऊंचाइयों को छुआ है लेकिन वह यह भूल गया है संबंधों की गहराई को कैसे पहचाने। लगता है कि जैसे तरक्की में वह इतना व्यस्त हो गया है कि संबंध उसे बोझ लगने लगे हैं। क्या हमें इससे हट कर यह सोचने-विचारने की आवश्यकता नहीं है कि आधुनिकीकरण की इमारत कमजोर संबंधों की नींव पर टिकी नहीं रह सकती। निस्संदेह तरक्की का मतलब संबंधों की बर्बादी नहीं हो सकती। हमें अगर सही तौर-तरीके से जीवन जीना है तो संबंधों को भी ठीक से जीना पड़ेगा। पति-पत्नी के रिश्ते को हम एक गाड़ी के दो पहियों से भी तुलना कर सकते हैं। अगर गाड़ी का एक पहिया अलग हो जाता है या एक-दूसरे के साथ तालमेल नहीं बैठता तो गाड़ी अपने आप बेकार हो जाती है।

मेरी एक परिचित लड़की है शोभा। अपने पति के साथ उसके संबंधों में इतनी तल्खी आ गई कि उसके सास-ससुर ने उसके माता-पिता को अपनी लड़की वापस ले जाने का फरमान जारी कर दिया। हालांकि शोभा के एक चाचा समझदार और सुलझे हुए व्यक्ति थे। आखिरकार उन्होंने वहां जाकर ससुराल वालों की बात पहले सुनी और फिर उनके साथ शोभा को सामने बैठाया। शोभा का पक्ष लेने की बजाय उससे खरी-खरी बात भी की। दोनों तरफ से सुलह हुई। इस प्रकार उसके चाचा ने उसका टूटता हुआ घर किसी तरह संभाल लिया। उसके ससुराल वाले भी अपनी तरफ से हुई गलतियों को खुशी-खुशी मानने को तैयार हो गए। यह कोई कहानी नहीं है, बल्कि हकीकत है। एक और उदाहरण भी मेरे सामने है, जो कि इसके ठीक विपरीत है। मेरी एक और परिचित है सोना, जिसके चार साल का एक बेटा भी है। उसने छोटी-छोटी बातों को लेकर अपने मन में अपने पति और ससुरालियों के प्रति इतनी कड़वाहट घोल ली कि आज तलाक की नौबत आ गई है। उसकी आदतें मैंने देखी हैं कि वह ससुराल वालों की छोटी-मोटी बात को भी तिल का ताड़ बना देती है। साथ-साथ सोना के मां-बाप उसके साथ लड़ने को तैयार रहते हैं। उनका यह व्यवहार घी में आग का काम कर रहा है। वे लोग तो अपनी लड़की से भी चार हाथ आगे हैं। उन्हें खुद अपना गलत व्यवहार भी गलत नहीं लगता तो अपनी लड़की को क्या समझाएंगे?

सीख यही है कि अपनी लड़की को कुछ दें या न दें लेकिन इतना लायक जरूर बनाना चाहिए कि वह रिश्तों को सही तरीके से निभाए। सबसे पहले यह समझना होगा कि किसी पति-पत्नी के बीच तलाक की नौबत को बचाने के लिए हर संभव समझ का इस्तेमाल करना चाहिए। तलाक लेना आसान है लेकिन उसका दंश असहनीय होता है। यह दर्द जनम भर पीछा नहीं छोड़ता। एक बार अगर घर की दीवारें चटख जाती हैं तो उन पर टिकी रिश्ते के नाम की छत गिर जाती है और तबाही के अलावा कुछ हाथ नहीं आता। पुरुषों को भी इस बात को समझना होगा कि बात-बात पर केवल महिलाओं को ही दोष देना, मारपिटाई करना, हिंसा पर उतारू होना किसी भी नजरिए से ठीक नहीं है। परिवार एक की समझदारी नहीं, दोनों की बुद्धिमत्ता से चलता है। सहनशीलता, उदारता, प्रेम, समर्पण जैसी भावनाओं से हम दिल भी जीत सकते हैं और रिश्ते भी। सहनशीलता की जरूरत दोनों को होती है। अगर धीरज हमारे पास है तो बुरा से बुरा वक्त भी निकल जाता है। विवाह होते ही कई बार हम महिलाएं पति की संपत्ति को खेलने-उड़ाने का सामान समझ बैठती हैं, यह अनुचित है। पति अगर अपने भाई-बहन या माता-पिता के लिए कुछ करना चाहता है तो उसमें बाधक नहीं बनना चाहिए, न रोक-टोक करनी चाहिए। हर क्षेत्र में अपनी चलाने को आजकल आधुनिकता और बराबरी का अधिकार माना जाने लगा है। लेकिन देखना यह है कि इसकी सीमा-रेखा क्या हो? कहां टांग अड़ानी है और कहां नहीं, इस बारे में ठीकठाक पता होना चाहिए। अगर गलत जगह प्रतिरोध होगा तो स्वाभाविक है कि उसके नतीजे भी सही नहीं होंगे। बल्कि अनर्थ होने की आशंका ही ज्यादा रहती है।

अगर आपसी प्रेम, सद्भाव समर्पण और समझदारी का दृष्टिकोण अपना लिया जाए तो पति-पत्नी ही क्या, सभी तरह के रिश्तों में दरार रोकी जा सकती है। इस प्रकार से एक सुखी परिवार और समाज की स्थापना हो सकती है। ऐसे लक्ष्य हासिल करने का रास्ता धीरज और प्रेम के जरिए ही तय किया जा सकता है। सत्य है कि जिसने रिश्ते निभाने में धीरज रख लिया उसने सब कुछ पा लिया। बेहतर समाज चाहिए तो बेहतर दांपत्य जीवन और सुखी परिवार ही उसकी आधारशिला हो सकती है।

 

 

 

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