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दुनिया मेरे आगे: दरकिनार ईमान

हो सकता है आप घरेलू पम्प खरीदने जाएं और विक्रेता उसकी खूबियां कुछ इस प्रकार बताए कि यह पम्प बहुत अच्छा है… इससे कारपोरेशन के नल से पानी खींच सकते हैं। बस, नल से सीधे जोड़ दें। मैं खुद अपने घर में कई साल से इस पम्प का उपयोग कर रहा हूं। अभी तक कोई […]

Author Published on: January 27, 2020 1:50 AM
ऐसे अनेक घर हैं जो नल खुलने के समय से आधे घंटे पूर्व पंप चालू कर देते हैं।

हो सकता है आप घरेलू पम्प खरीदने जाएं और विक्रेता उसकी खूबियां कुछ इस प्रकार बताए कि यह पम्प बहुत अच्छा है… इससे कारपोरेशन के नल से पानी खींच सकते हैं। बस, नल से सीधे जोड़ दें। मैं खुद अपने घर में कई साल से इस पम्प का उपयोग कर रहा हूं। अभी तक कोई दिक्कत नहीं हुई वगैरह। उन दिनों आॅनलाइन बिजली बिल भुगतान की सुविधा नहीं थी। जनसेवा केंद्र खोले गए थे। कम बिजली बिल देख कर वहां नियुक्त कर्मचारी ने तपाक से पूछा था- ‘क्यों साहब, कोई व्यवस्था बना ली क्या?’ उसका इशारा मीटर शिथिल करके या सीधे कनेक्शन लेकर बिजली चोरी की व्यवस्था बना लेने से था। ऐसी सोच दयनीय है। कम बिजली प्रयोग करके बिजली के प्रति मितव्ययी होना आपको शक के दायरे में खड़ा कर सकता है! आपको बिजली-चोर बना सकता है।

गौरतलब है कि जल के स्रोत सीमित हैं। भू-जल स्तर गिरता जा रहा है। नदियों में जल की मात्रा घट रही है। दिनोंदिन पीने के पानी की कमी हो रही है। इसी प्रकार बिजली उत्पादन के साधन भी सीमित हैं। जबकि इन साधनों को उपयोग करने वाले लोग बढ़ती जनसंख्या के आंकड़ों के साथ बढ़ रहे हैं। क्या यही एक कारण है कि पानी और बिजली की चोरी इन दिनों आम हो गई लगती है? हालांकि ऐसे लोगों की भी कमी नहीं हैं, जो ईमानदार हैं। वे आवश्यकताओं को सीमित रखते हैं। बिजली और पानी चोरों के आंकड़े देना संभव नहीं है, लेकिन आस-पड़ोस का अवलोकन किया जाए तो स्थिति साफ हो जाएगी। इसमें हर वर्ग, जाति, धर्म और समाज के लोग शामिल हैं।

केवल अशिक्षित लोग ही इस बीमारी के शिकार नहीं है बल्कि उच्च शिक्षित समाज के प्रतिष्ठित और मार्गदर्शक माने जाने वाले लोगों की भी बड़ी संख्या है। ऐसे लोग मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं। एक तो वे, जो गरीब हैं। केवल प्रकाश के लिए बिजली और जीवनयापन के लिए पानी की चोरी करते हैं। वे अपनी झोपड़ी या घर के पास से गुजरने वाली बिजली के तारों से सीधा कनेक्शन ले लेते हैं। यह कनेक्शन अक्सर प्रतिदिन शाम को बनाए जाते हैं और सुबह होते-होते निकाल भी दिए जाते हैं। इसी प्रकार ये पास से गुजरने वाली पानी की पाइप लाइन से किसी तरह पानी ले लेते हैं।

कभी कुछ समय हुआ, बिजली चोरी का अनोखा मामला प्रकाश में आया। एक बड़ी इमारत में स्ट्रीट लाइट से बिजली चोरी का मामला था। स्ट्रीट लाइट के तार से सीधा कनेक्शन लिया गया था। आश्चर्य तब हुआ जब यह पाया गया कि इस इमारत से एक तार विकसित कॉलोनी के एक घर में जाता था! यह तार लगभग पंद्रह मीटर मैदान को खोद कर जमीन के नीचे से डाली गई थी। सवाल है कि विकसित कॉलोनी में रहने वाले संपन्न रहवासी को बिजली चोरी करने की क्या जरूरत थी? उसकी इतनी आमदनी थी कि वह अपने उपयोग के बिजली के बिल का भुगतान कर सकता था। फिर भी चोरी की जा रही थी। ऐसे चोरों को मैं दूसरे प्रकार का पानी और बिजली चोर मानता हूं जो केवल चोरी करने के लिए चोरी करते हैं। इनकी संख्या बहुत ज्यादा है। मध्यमवर्गीय परिवार से लेकर बड़े उद्योगपति तक इस लत के शिकार हैं। इन साधनों की सबसे अधिक बर्बादी भी यहीं से शुरू होती है, जो केवल जरूरत के लिए चोरी नहीं करते।

ऐसे अनेक घर हैं जो नल खुलने के समय से आधे घंटे पूर्व पंप चालू कर देते हैं और नल बंद होने के देर बाद तक चालू रखते हैं। पाइपलाइन में से पानी की एक-एक बूंद निकाल लेते हैं। हालांकि जल की आवश्यक मात्रा बहुत कम समय में ही पूरी हो जाती है। लेकिन शेष पानी बर्बाद किया जाता है। प्रतिदिन वाहन, आंगन, छत और बगीचे के पेड़ पौधे धोए जाते हैं। अगर इसके बाद भी पानी आता है तो पाइपलाइन को घर की नाली के मुहाने पर ठूंस दिया जाता है, ताकि नाली साफ हो जाए। यह पानी की बर्बादी नहीं तो क्या है?

हद तो तब हो जाती है जब सरकारी महकमों में कार्यरत कर्मी खुद ही पानी और बिजली की चोरी में लिप्त पाए जाते हैं। ऐसे लोग ज्यादा निर्भीक, आश्वस्त और चोरी करने की तकनीक में पारंगत होते हैं। इन्हें पकड़े जाने का भय नहीं होता है। वे जानते हैं कि निपटना कैसे है। ऐसे लोग आम चोरों के बीच सम्मानित होते हैं। कभी आप इनके सामने दुखड़ा रोएं, पानी और बिजली की दरों को लेकर चर्चा करें, तो ये तुरंत चोरी के तरीके सुझा देंगे! मेरा मानना है कि जरूरतमंदों के द्वारा इन साधनों की चोरी उतनी घातक नहीं, जितनी तथाकथित समर्थ चोर इन साधनों की बर्बादी करते हैं। इन साधनों की बेइंतेहा बबार्दी राष्ट्रीय हित में नहीं है। देश के विकास के लिए इन साधनों के उपयोग के प्रति ईमानदारी और मितव्ययिता पहली शर्त है।

राकेश सोहम्

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