ताज़ा खबर
 

दुनिया मेरे आगे: शहर का दूसरा छोर

जिंदगी के मायने, आम धारणाएं, समाज, मान्यताएं, लोग, गली, चबूतरे, बवाल, पड़ोसी, थकान, रिश्ते, विवशताएं, प्यार, संबंध, जुड़ाव, स्त्री-पुरुष, बेटा-बेटी, पति-पत्नी, रोजमर्रा के काम, कामों का बंटवारा, नजरिया, बातों का अर्थ, सुविधाएं...

Author Published on: September 28, 2018 3:18 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

काम पर से घर की ओर लौटते वक्त मन में चलने वाले कई प्रश्नों, थकान और उतरते-चढ़ते तमाम भावों के साथ उस दिन वह लड़की काफी देर से घर पहुंची। कुछ देर बिस्तर पर बैठने के बाद मन थोड़ा शांत होने ही लगा था कि अचानक गली में एक महिला के रोने और कुछ बोलते हुए जाने की आवाज सुनाई दी। छज्जे की तरफ जाकर गली में देखा तो दृश्य यह था कि एक उम्रदराज महिला को लगभग तीस-बत्तीस साल की एक लड़की अपने साथ लिए जा रही थी। यह लड़की शायद उसकी बेटी थी। कुछ पुरुष भी खड़े थे जो शायद उत्सुकता से उन्हें देख रहे थे। कुछ देर बाद उनकी बातचीत के आधार पर पता चला कि महिला का बेटा, एक पड़ोसी और घर के दो अन्य पुरुष सदस्य उस महिला को वापस घर चलने के लिए कह रहे थे। लेकिन वह महिला रोते हुए कह रही थी कि ‘पूरी जिंदगी निकल गई, लेकिन पति ने शराब पीकर आना नहीं छोड़ा। वह रोज पीकर आता है और मारता है।’ महिला को साथ ले जा रही लड़की ने भी कहा कि ‘अब मैं इसे ले जा रही हूं, कुछ नहीं बचा इसका तुम सबके पीछे।’ फिर वह महिला और लड़की, दोनों साथ जाने लगे। इस तरह की स्थितियों में जैसा कि आमतौर पर होता है, एक पड़ोसी आगे आया और उसने घर के बाकी सदस्यों को समझाना शुरू किया कि ‘पति सुबह निकलता है, दिन भर ऑटो चलाता है, थक जाता है। इसलिए थकान मिटाने के लिए पी लेता है। घर जाओ तुम लोग और गली में बवाल मत करो।’ लेकिन जब शराब पीकर पत्नी को मारने-पीटने की बात उठती है तो उसके पक्ष में कोई तर्क जगह नहीं बना पाता। केवल पीने के पीछे का तर्क ही बातों में आ पाता है। समाज किसी परंपरा, चलन या सामाजिक बर्ताव के पक्ष में तर्क अपनी सुविधा से गढ़ लेता है, भले वह परंपरा या चलन या फिर व्यवहार एक समूचे तबके के लिए तकलीफदेह या त्रासदी की वजह बनता हो।

उस महिला के बेटे की उम्र लगभग सत्ताईस-अट्ठाईस साल रही होगी। वह यह सब देख और सुन रहा था। उसने अचानक मां की तरफ देख कर जोर से आवाज लगाई- ‘मम्मी रुक जा, घर चल।’ महिला थोड़ा रुकी, लेकिन उसके साथ की लड़की उसे साथ ले जाने की जिद पर अड़ गई। महिला वहीं गली में कुछ दूर एक घर के पास बने चबूतरे पर बैठ कर रोने लगी। बेटी हाथ पकड़े खड़ी रही। कुछ देर बाद फिर दोनों साथ जाने लगे। बेटे ने कुछ देर गली के इसी छोर से देखा, फिर बिना कुछ कहे अपने घर की ओर लौटने लगा। उसके पीछे पड़ोसी भी चल पड़े और साथ में यह समझा रहे थे कि ‘अरे कोई बात नहीं… दो-चार दिन में वापस आ जाएगी, परेशान मत हो!’ यह कुछ समय के भीतर शुरू और खत्म हो जाने वाला दृश्य था। गली फिर से शांत हो गई। यह सब देखती लड़की वापस बिस्तर की ओर लौटी। रास्ते के सभी प्रश्न जवाब के रूप में उसके मन में उतर जाना चाहते थे। आंखें छत के पार आसमान में कुछ और जवाब की तलाश करने लगी थीं। एक गोल घेरे में उभरते शब्दों से एक कोलाज-सा चित्र बन रहा था… जिंदगी के मायने, आम धारणाएं, समाज, मान्यताएं, लोग, गली, चबूतरे, बवाल, पड़ोसी, थकान, रिश्ते, विवशताएं, प्यार, संबंध, जुड़ाव, स्त्री-पुरुष, बेटा-बेटी, पति-पत्नी, रोजमर्रा के काम, कामों का बंटवारा, नजरिया, बातों का अर्थ, सुविधाएं, वंचना, संसाधन, अवसर, सपने, सीमाएं, कार्य के घंटे, वेतन, आराम का वक्त, बचत, खपत और छुट्टी का दिन..! सब यथार्थ की कड़वाहटों के साथ!

न जाने किसका कैसा संबंध बनता होगा इन सभी ‘शब्दों’ के साथ! इनके क्या अर्थ होते होंगे उनके लिए! कौन थकने पर पीकर थकान मिटाता होगा… कौन पीकर मारता होगा! किसे थक कर, पिट कर, बिना पिए रोते हुए गली में निकल जाना पड़ता होगा! किसकी थकान वैतनिक या आमदनी आधारित होगी जो उसकी समाज और परिवार में स्थिति निर्धारित करती होगी और किसे थकान के बदले अगले दिन की थकान का भी लेखा-जोखा तैयार कर बिना किसी वेतन के भी पिट कर, रोकर सो जाना पड़ता होगा! कौन अपनी जिंदगी के खर्च हो जाने के बाद उसका अहसास कर पाता होगा! उस रात लड़की ने फिर से अपने लंबे कोट को निकाला और उसकी बड़ी-बड़ी जेबों में पत्थर भर कर वह किसी नदी में नहीं उतर गई। बल्कि उन बड़ी-बड़ी जेबों में उसने अपनी मजबूती से बंधी मुट्ठियां डालीं और भरी बरसात में बचत और खपत के समीकरण से जुटाए गए बड़े-बड़े जूते पहन कर शहर के दूसरे छोर पर बसी बस्ती में उम्मीद से भरी आंखों वाले बच्चों से बातें करने चली गई। आज उनका छुट्टी का दिन था… बने-बनाए कैलेंडरों से परे..!

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 दुनिया मेरे आगेः ठहरा हुआ अतीत
2 दुनिया मेरे आगे: फूल और कांटे
3 दुनिया मेरे आगे: बदलता परिवेश
जस्‍ट नाउ
X