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दुनिया मेरे आगे: अंधविश्वास की गिरफ्त

यह एक सहज और स्वाभाविक बात है कि ज्यादातार लोगों को किसी न किसी तरह का दुख-तकलीफ रहता ही है। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति मिले जो पूरी तरह संतुष्ट और खुश हो और उसे अपने जीवन को लेकर किसी तरह का मलाल नहीं हो।

Author August 11, 2018 2:24 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

चंदन कुमार चौधरी

मानव जीवन में कई सीमाओं की वजह से प्रकृति प्रदत्त कई तरह की समस्याएं रही हैं और उनका समाधान ढूंढ़ने के क्रम में कई बार कामयाबी भी मिलती है। जबकि ज्यादातर समस्याएं मानव निर्मित होती हैं, जिन्हें लोग अपने स्वार्थ और मनोरंजन के लिए तैयार करते हैं। इनका समाधान आसान नहीं होता और अगर कोई इसे रोकने का प्रयास करता है तो उसका जम कर विरोध किया जाता है। ऐसी ही समस्याओं में भूत-प्रेत और डायन-जोगिन के भ्रम का खेल समाज में आम है और इन्हें प्रथाओं और धर्मशास्त्रों का हवाला देकर सही ठहराने का प्रयास किया जाता है। यही कारण है कि समाज में बाबा, ओझा, तांत्रिक और भगत कुकुरमुत्तों की तरह नजर आते हैं।

बचपन में हमने अक्सर अपने गांव में डायन और भूत प्रेत के भ्रम से संबंधित कुछ गतिविधियां देखी हैं। हमारे पड़ोस में एक महिला रहती थी। उस पर अक्सर भूत आने की बात कही जाती थी। उस समय वह कुछ अजीब हरकतें करती थी। इसी तरह, मेरे पड़ोस में एक महिला को डायन करार दिया गया था। उसे देखते ही लोग घर में घुस जाते थे और अपने बच्चों को छिपा लेते थे। लोगों का कहना था कि यह ‘हक्कल डायन’ है, जिस पर जादू-टोना कर देगी उसका जीवन लीला खत्म। इसके पास काफी सिद्धि है और यह रात में पेड़ चलाती है। हालांकि ये सिर्फ सुनी-सुनाई बातें थीं, जिन्हें अफवाह के रूप में हवा देने में बाबा या ओझाओं का हाथ रहता था। उस महिला की अजीब हरकतों को किसी ने बीमारी या उसका इलाज कराने के नजरिए से देखने की कोशिश नहीं की। दरअसल, हमारे समाज में डायन, भूत-प्रेत, इंसान पर किसी बुरी आत्मा का साया और पुरानी परंपराओं के नाम पर महिलाओं के साथ क्रूरता की जाती है। कई बार देखा जाता है कि निजी रंजिश या किसी अन्य कारणों से महिलाओं को डायन बता कर यातनाएं दी जाती हैं, निर्वस्त्र करके घुमाया जाता है, मारा-पीटा जाता है। इन आरोपों में प्रताड़ित होने वाली महिलाओं में आत्मविश्वास और आत्मसम्मान तक की इतनी कमी हो जाती है कि वे अपनी तकलीफ भी बता पाने में समर्थ नहीं होती हैं। कई बार तो ऐसी प्रताड़ना के कारण महिलाओं में दब्बूपन, मानसिक विकृति और शारीरिक समस्या भी आ जाती है। ऐसे ही मामलों में पीड़ित महिलाओं के खुदकुशी कर लेने तक की खबरें आती रहती हैं। हालांकि हम समाज में प्रचलित अंधविश्वासों की वजह से कुछ क्रूर प्रथाओं को लंबे समय से चली आ रही परंपरा करार देते हैं और इस बहाने उसे सही ठहराने का प्रयास करते हैं। ओझा-तांत्रिक और भगत जैसे लोगों की इसमें काफी भूमिका होती है।

हमारे गांव में एक बीमार महिला पर अक्सर भूत आने की बात कही जाती थी। ओझा-तांत्रिक के कहने पर इलाज के बहाने महिला को काफी प्रताड़ित किया गया, काफी मारा-पीटा गया, उसके बाल काट दिए गए और खाने-पीने पर पाबंदी लगा दी गई। बाद में थक-हार कर उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया तब पता चला कि वह मनोरोग से ग्रस्त थी। यह जानकारी सामने आने पर उसके परिवार वाले और पति को काफी अफसोस हुआ, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। आखिर हम ऐसी गलती क्यों करते हैं? अगर उस महिला को पहले ही डॉक्टर के पास लेकर जाते तो शायद उसे ढेर सारी प्रताड़ना नहीं सहनी पड़ती।कुछ लोग ऐसे मामले में लाभ उठाते हुए दिख जाते हैं। किसी अकेली महिला की संपत्ति पर कब्जा जमाना हो या उसका शोषण करना हो, उसे डायन बता कर उसका दमन करना आसान हो जाता है। समाज में कथित भूत-प्रेत और डायन में अंधविश्वास से उपजा खौफ इस कदर है कि लोग सच को स्वीकार करना नहीं चाहते। ऐसे मामलों में अक्सर महिलाओं को पीड़ित होता देखा जाता है और ओझा-तांत्रिकों का फर्जीवाड़ा और ठगी का धंधा फलता-फूलता रहता है।

वे काला जादू, वशीकरण, प्रेम विवाह, मनचाहा प्यार, काम कारोबार, पति-पत्नी में अनबन, सौतन और दुश्मन से छुटकारा, गृह-क्लेश, विवाह में रुकावट, पढ़ाई में मन नहीं लगना, संतानहीनता, विवाह आदि में पैदा होने वाली समस्याओं से छुटकारा दिलाने का दावा करने लगते हैं। खुद को सिद्ध तांत्रिक बताने वाले ऐसे लोग जब किसी महिला के बारे में डायन होने की बात कह देते हैं या किसी पर कथित भूत-प्रेत का साया बता देते हैं तो अपने अज्ञान के कारण उनके चक्कर में पड़े रहते हैं। यों यह एक सहज और स्वाभाविक बात है कि ज्यादातार लोगों को किसी न किसी तरह का दुख-तकलीफ रहता ही है। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति मिले जो पूरी तरह संतुष्ट और खुश हो और उसे अपने जीवन को लेकर किसी तरह का मलाल नहीं हो। ऐसे में ये बाबा उनकी मजबूरी का लाभ उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। यह किसी भी देश और समाज को पीछे ले जाने वाली अंधविश्वास से जुड़ी ऐसी व्यापक समस्या है, जिसका खमियाजा महिलाओं को उठाना पड़ता है।

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