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दुनिया मेरे आगे: ना उम्र की सीमा हो…

पिछले बरस जब फ्रांस ने अपने नए राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रॉन को चुना तो वे अलग ही कारण से खबरों की सुर्खियों में छा गए थे। वजह यह थी कि उनकी पत्नी ब्रिगेट चौंसठ वर्ष की थीं और वे महज उनचालीस साल के थे। हमारी आदत हो गई है पति की उम्र पत्नी से ज्यादा देखने की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मलेनिआ ट्रंप में चौबीस वर्ष का अंतर है

रजनीश जैन

पिछले बरस जब फ्रांस ने अपने नए राष्ट्रपति इमेनुएल मैक्रॉन को चुना तो वे अलग ही कारण से खबरों की सुर्खियों में छा गए थे। वजह यह थी कि उनकी पत्नी ब्रिगेट चौंसठ वर्ष की थीं और वे महज उनचालीस साल के थे। हमारी आदत हो गई है पति की उम्र पत्नी से ज्यादा देखने की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मलेनिआ ट्रंप में चौबीस वर्ष का अंतर है। पत्नी से कहीं अधिक उम्र का पति अमूमन सारी दुनिया में कुछ किंतु-परंतु के सहारे सामाजिक रूप से स्वीकार्य है। लेकिन इसका उल्टा होना थोड़ा चौंका देता है। पिछले दिनों पूर्व मिस वर्ल्ड और बॉलीवुड की शीर्ष अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने अपने से ग्यारह वर्ष छोटे अमेरिकी गायक निक जोंस से सगाई की तो किसी ने उनकी उम्र के अंतर को लेकर विशेष टीका-टिप्पणी नहीं की, लेकिन आश्चर्य जरूर व्यक्त किया।

यानी भारतीय समाज भी अब इस तरह के विवाह में उम्र के अंतर को थोड़े संशय के साथ स्वीकारने लगा है। पारंपरिक विवाह से उलट, जिसमें लड़के की उम्र हमेशा लड़की से ज्यादा रहती आई थी, अब अधिक उम्र की लड़कियां युवा लड़कों से ब्याही जाने लगी हैं। खासकर फिल्मों और जानी-मानी हस्तियों के विवाहों में यह चलन आम होने लगा है। उम्र के इस असंतुलन पर बनी फिल्मों का सिलसिला सत्तर के दशक से हिंदी फिल्मों में आरंभ हुआ है। 1977 में आई फिल्म ‘दूसरा आदमी’ में परिपक्व राखी और युवा ऋषि कपूर संभवत: पहले नायक-नायिका थे, जिन्होंने फिल्मों में इस परंपरा की शुरुआत की थी। उस दौर में इस तरह की भूमिका अपवाद थी, लेकिन अब दृश्य पूरी तरह बदल गया है। आमजन की मानसिकता बदलने में निश्चित रूप से सिनेमा की कहानियों और उन्हें निभाने वाले नायक और नायिकाओं ने विशेष भूमिका अदा की है। शाहरुख खान ने अपने कॅरियर की शुरुआत में अधिक उम्र की नायिका दीपा साही के साथ ‘माया मेमसाब’ और श्रीदेवी के साथ ‘आर्मी’ फिल्म की थी। 2001 में फरहान अख्तर ने अपने निर्देशन में ‘दिल चाहता है’ के रूप में आधुनिक भारत के युवाओं की जीवन शैली और प्रेम को लेकर उनकी पसंद को ध्यान में रखा था। फिल्म के तीन नायकों में से एक का झुकाव परिपक्व महिला की तरफ होता है। आमिर और प्रीति जिंटा की प्रेम कहानी के बावजूद अक्षय खन्ना और डिंपल कपाड़िया का शालीन प्रेम ‘दिल चाहता है’ को एक पायदान ऊपर ले जाता है। इसी तरह अयान मुकर्जी के निर्देशन में बनी ‘वेक अप सिड’ में नायक-नायिका यानी रणवीर कपूर और कोंकणा सेन की उम्र का अंतर प्रेम में आड़े नहीं आता।

जगजीत सिंह ने अपने कालजयी गीत ‘ना उम्र की सीमा हो न जन्म का हो बंधन, जब प्यार करे कोई, तो देखे केवल मन’ से जंग लगी रिवायतों को सिरे से नकारते हुए फिल्मकारों और समाज को अपने दायरे से बाहर झांकने को प्रेरित किया था। भारत के पहले शो-मैन राजकपूर ने अपनी क्लासिक ‘मेरा नाम जोकर’ में एक किशोर लड़के के मन में अपनी टीचर को लेकर चल रही आसक्ति के अंतर्द्वंद्व को खूबसूरती के साथ उकेरा था। बाद में इसी विचार को विस्तार देकर उन्होंने ‘बॉबी’ बनाई। एक किशोर के किसी युवती के प्रति आसक्त हो जाने को सनसनी बना कर परोसने का प्रयास निर्देशक के शशिलाल नायर ने ‘एक छोटी-सी लव स्टोरी’ बना कर किया। फिल्म की पटकथा पंकज कपूर ने लिखी थी और नायिका थी मनीषा कोइराला। अच्छे विषय को गलत तरीके से संचालित किया जाए तो फिल्म का कैसे कबाड़ा हो सकता है, ‘एक छोटी-सी लव स्टोरी’ इसका एक उदाहरण थी।

हॉलीवुड से शुरू हुआ यह चलन अब बॉलीवुड में भी सामान्य मान लिया गया है। गंभीर और लोकप्रिय पत्रिका ‘साइकोलॉजी टुडे’ के आंकड़े इस तथ्य की पुष्टि करते हैं। इस पत्रिका के मुताबिक 1964 से 2015 तक इस तरह के विवाहों में चौंसठ फीसद की बढ़ोतरी हुई है। दूल्हा वही जो दुल्हन मन भाए जैसी शादियों के उदाहरण फिल्मों से लेकर खेल और कॉरपोरेट जगत तक बहुतायत से मौजूद हैं। शकीरा, एलिजाबेथ टेलर, टीना टर्नर, डेमी मुर, पेगी कोलिन से लेकर यहां ऐश्वर्या राय, प्रिटी जिंटा, उर्मिला मातोंडकर, फरहा खान, शिल्पा शेट्टी, अधाना अख्तर, अंजलि तेंदुलकर, बिपाशा बसु जैसे नाम समुद्र में तैरते हिमखंड के ऊपरी भाग की तरह हैं। कुल मिला कर रिश्तों की अहमियत तभी तक है, जब तक वे अच्छी भावनाओं और संवेदनाओं के साथ एक दूसरे से जुड़े रहें। और अच्छे संबंधों में उम्र का ज्यादा या कम होना कोई फर्क नहीं पैदा करता। अगर रिश्ते में आए दो लोग बालिग हैं, एक दूसरे से प्रेम करते हैं, जीवन के बहाव में सहज और सुखी हैं तो उम्र की अहमियत सिर्फ एक संख्या तक सीमित है। इससे ज्यादा उसके कोई मायने नहीं।